लखनऊ। आज 25 मई 2026 से नौतपा की शुरुआत हो गई है। यह भीषण गर्मी का वह काल है जब सूर्य की तपिश अपने चरम पर होती है और धरती सचमुच तवे की तरह जलती है। यह 9 दिनों का विशेष काल — 25 मई से 2 जून 2026 तक — उत्तर भारत के लोगों के लिए साल का सबसे कठिन समय माना जाता है। मौसम विभाग (IMD) ने उत्तर प्रदेश के 33 जिलों में लू का अलर्ट जारी किया है। अगले 9 दिनों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बने रहने की संभावना है।
नौतपा क्या है — वैज्ञानिक और ज्योतिषीय दृष्टिकोण
नौतपा का शाब्दिक अर्थ है — “नौ दिनों की विशेष तपिश”। ज्योतिष शास्त्र और पंचांग के अनुसार जब सूर्यदेव चंद्रमा के नक्षत्र “रोहिणी” में प्रवेश करते हैं — तब नौतपा की शुरुआत होती है। इस वर्ष सूर्य ने 25 मई को दोपहर 3:37 बजे रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश किया। सूर्य इस नक्षत्र में कुल 15 दिनों तक रहते हैं — लेकिन पहले 9 दिन सबसे अधिक खतरनाक और गर्म होते हैं — इसीलिए इसे नौतपा कहा जाता है।
वैज्ञानिक दृष्टि से देखें तो इस काल में सूर्य पृथ्वी के सबसे करीब होता है — जिससे सूर्य की किरणें सीधे और तीव्र रूप से पृथ्वी पर पड़ती हैं। इसके परिणामस्वरूप तापमान रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच जाता है और लू चलने लगती है।
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पहले 5 दिन सबसे खतरनाक
नौतपा शुरू होते ही गर्मी का पारा और चढ़ने लगता है — लेकिन इन 9 दिनों में से पहले 5 दिन सबसे अधिक गर्म और कष्टकारी होते हैं। 25 मई से 29 मई के बीच तापमान 45 से 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच सकता है। पूर्वांचल के जिलों — गाज़ीपुर, देवरिया, वाराणसी, मिर्जापुर, सोनभद्र — में भीषण लू का प्रकोप रहेगा। पश्चिमी UP के मेरठ, शामली, बुलंदशहर, सहारनपुर में 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चल सकती है।
मानसून और नौतपा का अटूट रिश्ता
नौतपा केवल तपिश का काल नहीं — यह अच्छे मानसून का संकेत भी है। पौराणिक मान्यता और प्राकृतिक अनुभव दोनों यही कहते हैं कि नौतपा जितना तेज होगा — मानसून उतना ही भरपूर होगा। जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में अच्छी तरह तपता है तो समुद्र से वाष्पीकरण अधिक होता है — जिससे मानसूनी बादल भरपूर नमी लेकर आते हैं। किसानों के लिए यह एक शुभ संकेत माना जाता है।
नौतपा में क्या करें — पुण्य और आरोग्य के उपाय
शास्त्रों और आयुर्वेद दोनों में नौतपा के दौरान विशेष नियम बताए गए हैं —
जल दान — इस काल में प्यासे व्यक्ति को जल पिलाना सबसे बड़ा पुण्य माना गया है। सार्वजनिक स्थानों पर प्याऊ लगाना या राहगीरों को पानी पिलाना अत्यंत फलदायी है।
दान का महत्व — सत्तू, मिट्टी का घड़ा, हाथ का पंखा और छाता दान करना इस काल में विशेष शुभ माना जाता है। इससे सूर्य दोष शांत होता है और भाग्योदय होता है।
पशु-पक्षियों की सेवा — घर की छत या आँगन में मिट्टी के पात्र में पानी भरकर रखें। चिड़ियों के लिए दाना डालें। गाय और अन्य पशुओं के लिए पानी और चारे का इंतजाम करें।
सूर्य देव को अर्घ्य — सुबह जल्दी उठकर तांबे के पात्र में जल और लाल फूल डालकर सूर्य देव को अर्घ्य दें। इससे शारीरिक कष्टों में कमी आती है।
शिवलिंग पर जलाभिषेक — नौतपा में भगवान शिव का जलाभिषेक करना भी अत्यंत फलदायी माना जाता है।
पौधों में जल — तुलसी, पीपल और बरगद जैसे पवित्र पौधों में जल अर्पित करें। प्रकृति को हरा-भरा रखना भी इस काल में पुण्य का काम है।
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नौतपा में क्या न करें
दोपहर 12 से 4 बजे के बीच बिना जरूरत घर से बाहर न निकलें। तेज धूप में नंगे पाँव न चलें। ठंडे पानी से एकदम नहाने से बचें — शरीर का तापमान धीरे-धीरे कम करें। बासी खाना न खाएं — पाचन तंत्र इस काल में कमजोर होता है। अधिक मेहनत वाला काम दोपहर में न करें।
UP में कहाँ-कहाँ है अलर्ट?
मौसम विभाग के अनुसार आज UP के 10 जिलों में रेड अलर्ट और 23 जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी है। तराई और पूर्वांचल के 14 जिलों में तेज आंधी की चेतावनी है। दिल्ली-NCR में 27 मई तक भीषण लू का अलर्ट है। मध्य प्रदेश में रेड अलर्ट जारी है। इस बार नौतपा में गर्मी सामान्य से अधिक रहने की आशंका है।
