मुजफ्फरनगर। उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के तितावी थाना क्षेत्र के मांडी गांव में संचालित एक दोना फैक्टरी में बंधुआ मजदूरी का जो मामला सामने आया है, वह रोंगटे खड़े करने वाला है। बिहार, राजस्थान और उत्तराखंड से ₹10 से 12 हजार मासिक वेतन, भोजन और आवास का झांसा देकर लाए गए मजदूरों को डेढ़ साल तक बंधक बनाकर रखा गया। उनसे जबरन काम कराया गया और विरोध करने पर कोड़े मारे गए, कुत्तों से कटवाया गया और नुकीले हथियारों से यातनाएं दी गईं। पुलिस ने मुक्त कराए गए मजदूरों में से रंजीत, साहिल, विक्रम और जगदीश के बयान न्यायालय में दर्ज करा दिए हैं। फैक्टरी मालिक अंकित बालियान और उसका एक सहयोगी अभी भी फरार हैं।
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झांसे से लाए, बंधक बनाए
अलग-अलग राज्यों से आए इन मजदूरों को फैक्टरी तक पहुंचने से पहले अच्छी कमाई और बेहतर जिंदगी का सपना दिखाया गया था। लेकिन फैक्टरी पहुंचते ही तस्वीर बदल गई। मजदूरों का कहना है कि उनके दस्तावेज जब्त कर लिए गए और फैक्टरी का मुख्य गेट हमेशा बंद रखा जाता था। गेट केवल सामान की आवाजाही या मालिक के आने-जाने पर खुलता था। गेट पर ‘कुत्तों से सावधान’ का बोर्ड लगा था ताकि बाहरी लोग वहां न आएं।
हालात इतने भयावह थे कि कई मजदूरों को महीनों तक यह भी नहीं पता था कि वे किस गांव और किस जिले में हैं। एक मजदूर ने पुलिस को बताया कि वह आठ महीने से वहां काम कर रहा था लेकिन अपने ठिकाने का नाम तक नहीं जानता था। भरपेट खाना नहीं मिलता था — अक्सर चोकर की सूखी रोटियां देकर काम कराया जाता था। थकान जताने या काम से मना करने पर मारपीट की जाती थी।
जान जोखिम में डालकर भागे
इस पूरे मामले का पर्दाफाश तब हुआ जब राजस्थान निवासी मजदूर विक्रम ने जान जोखिम में डालकर फैक्टरी से भागने की कोशिश की। वह दिन उसके लिए मौका बना जब फैक्टरी का सुपरवाइजर शिवा शराब पीने बाहर गया हुआ था और मालिक भी मौजूद नहीं था। मालिक के पिता के फैक्टरी से निकलने के बाद साथी मजदूरों ने विक्रम को तिरपाल में छिपाकर बाहर निकाला।
बाहर निकलते ही उसे दीवार फांदनी पड़ी। तीन लोगों ने उसका पीछा किया लेकिन विक्रम गन्ने के खेत में छिप गया। किसी तरह वह तितावी थाने पहुंचा और पुलिस को पूरी आपबीती सुनाई। जैसे ही सुपरवाइजर को विक्रम के भागने की खबर मिली, उसने फैक्टरी में मौजूद बाकी मजदूरों की पिटाई की। विक्रम की इसी हिम्मत ने इस पूरे कांड को उजागर किया।
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कोर्ट में बयान, परिजन पहुंचे थाने
पुलिस ने फैक्टरी से मुक्त कराए गए मजदूरों में से रंजीत, साहिल, विक्रम और जगदीश के बयान न्यायालय में दर्ज करा दिए हैं। बिहार निवासी संतोष और उज्ज्वल को भी बयान के लिए ले जाया गया था लेकिन समयाभाव के कारण उनके बयान दर्ज नहीं हो सके। शेष मजदूरों के बयान दर्ज कराने की प्रक्रिया जारी है।
इस बीच बिहार, राजस्थान और उत्तराखंड से मजदूरों के परिजन तितावी थाने पहुंचने लगे हैं। पुलिस ने सभी मजदूरों के घरवालों को सूचना दे दी है और उन्हें सुरक्षित घर भेजने की तैयारी की जा रही है।
एसपी देहात अक्षय संजय महाडीक ने बताया कि फैक्टरी मालिक अंकित बालियान और एक अन्य आरोपी फरार हैं — उनकी तलाश में पुलिस की टीमें लगी हुई हैं। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की गहन जांच की जा रही है और सभी दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


