नई दिल्ली। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक खुला पत्र साझा किया जिसमें उन्होंने बताया कि उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी को अपना त्यागपत्र भेज दिया है। NEET-UG पेपर लीक विवाद और जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच यह बड़ा कदम उठाते हुए प्रधान ने कहा कि देश की एकता और छात्रों का भविष्य उनके इस फैसले की सबसे बड़ी वजह है।
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CJP आंदोलन और छात्रों का विरोध
6 जून 2026 को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने जंतर-मंतर पर पहला प्रदर्शन किया। SFI, AISA और AISF जैसे कई छात्र संगठन भी धीरे-धीरे इस आंदोलन से जुड़ते गए। NEET-UG पेपर लीक के बाद परीक्षा में बर्बाद हुए वर्षों की मेहनत और कई छात्रों की आत्महत्या ने इस आंदोलन को देशव्यापी रूप दिया। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग थी कि पीड़ित छात्रों को न्याय मिले, NTA में सुधार हो और केंद्रीय शिक्षा मंत्री अपने पद से इस्तीफा दें।
28 जून 2026 को सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन अनशन शुरू किया। 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव हुआ जिसमें कई छात्र घायल हुए। 22 जुलाई को पटना में भी आंदोलनकारी छात्रों पर बल प्रयोग किया गया। 26 दिन के अनशन के बाद 23-24 जुलाई की रात जेपी नड्डा की मौजूदगी में वांगचुक ने उपवास समाप्त किया। 24 जुलाई को संविधान क्लब में CJP और सरकार के बीच वार्ता हुई जिसमें तीन बिंदुओं पर सहमति बनी लेकिन धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का मुद्दा अनसुलझा रहा।
CBT से होंगी परीक्षाएं
धर्मेंद्र प्रधान ने अपने खुले पत्र में लिखा कि शिक्षा, शिक्षक और छात्र — यही उनके जीवन की प्राथमिकता रही है और पिछले 4 दशकों से वे इसी दिशा में काम करते रहे हैं। उनका मानना है कि किसी भी राष्ट्र की नींव उसकी शिक्षा व्यवस्था की मजबूती, समावेशिता और दूरदर्शिता पर टिकी होती है।
उन्होंने लिखा कि 3 मई 2026 को हुई NEET-UG परीक्षा में अनियमितता सामने आई। भारत सरकार ने तुरंत संज्ञान में लेते हुए जांच CBI को सौंपी और परीक्षा रद्द कर दी। इसके बाद पुनः परीक्षा की तिथि घोषित की गई और अगले वर्ष से इस परीक्षा को सीबीटी (Computer-based test) मोड में करने का निर्णय लिया गया।
20 लाख छात्रों की परीक्षा पूरी
प्रधान ने लिखा कि इस दौरान उनकी प्रमुख प्राथमिकता यह रही कि 20 लाख से अधिक छात्रों की परीक्षा सुचारू रूप से आयोजित की जाए। इसके लिए पूरी सरकारी मशीनरी को एकजुट कर काम किया गया। भारत सरकार के साथ राज्य सरकार और जिला प्रशासन की महत्वपूर्ण भूमिका रही। छात्रों, अभिभावकों और माता-पिता के सहयोग से 21 जून 2026 को यह परीक्षा पूर्ण हुई।
16 जुलाई को घोषित NEET-UG के परिणाम संतोषजनक रहे जिसमें गरीब पृष्ठभूमि से आए कई मेधावी छात्रों को भी सफलता मिली। प्रधान ने लिखा कि पहले ही दिन से उन्होंने जिम्मेदारी ली और इस परिस्थिति से कभी मुंह नहीं मोड़ा। उनका संकल्प था कि किसी भी मेधावी छात्र की संभावना परीक्षा माफिया के कारण खराब नहीं होने देंगे।
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देश की एकता के लिए त्यागपत्र
प्रधान ने लिखा कि परंतु इस दौरान भी कई छात्रों को गुमराह करने के लिए जिम्मेदार पदों पर बैठे व्यक्तियों ने बाधा डालने की कोशिश की जिससे मन अत्यंत व्यथित हुआ।
उन्होंने लिखा कि जंतर-मंतर पर और देश में जो स्थिति बनी है उसका राष्ट्र विरोधी ताकतें लाभ न उठाएं, देश की एकता बनी रहे, भारत के एक भी विद्यार्थी का भविष्य कानूनी पेचीदगियों में न उलझे और हमारे बच्चे अपना समय पढ़ाई में लगाएं, करियर बनाने पर फोकस करें — इसी बात पर विचार करते हुए उन्होंने अपना त्यागपत्र माननीय प्रधानमंत्री जी को भेज दिया है।
प्रधान ने PM मोदी के मार्गदर्शन, विश्वास और निरंतर सहयोग के लिए हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त की। साथ ही मंत्रिपरिषद के सभी सम्मानित सहयोगियों, मंत्रालय के अधिकारियों एवं कर्मचारियों का भी आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रसेवा उनके जीवन की सर्वोच्च प्राथमिकता है और वे इसके लिए सदैव समर्पित रहेंगे।
प्रभु श्रीजगन्नाथ के आशीर्वाद से वे भविष्य में भी भारत माता, ओडिशा की जनता तथा देश के युवाओं की आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए हर संभव रूप में स्वयं को समर्पित रखेंगे।



