📌 अमित मणि त्रिपाठी
अयोध्या, 2 सितंबर। अयोध्या के श्रीराम मंदिर के संचालन और प्रशासन को अब पहली बार पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी मिल गया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने भारतीय वायुसेना के सेवानिवृत्त एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को अपना पहला सीईओ नियुक्त किया है। करीब चार दशक के सैन्य अनुभव वाले जितेंद्र मिश्रा ने वायुसेना में कई अहम कमान और रणनीतिक जिम्मेदारियां संभाली हैं। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वह पश्चिमी वायु कमान के प्रमुख थे।
देवरिया गांव से जुड़ा रिश्ता
जितेंद्र मिश्रा मूल रूप से उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के भोपतपुरा गांव के रहने वाले हैं। यह गांव श्रीरामपुर थाना क्षेत्र में आता है और भाटपाररानी विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा है। उनका परिवार अब मुख्य रूप से दिल्ली में रहता है। उनके पिता नथुनी मिश्र दिल्ली विश्वविद्यालय में कॉमर्स के प्रोफेसर रह चुके हैं। भाई डॉ. देवेंद्र मिश्रा दिल्ली के एक मेडिकल कॉलेज में प्रशासनिक पद पर हैं, जबकि बहन डॉ. वंदना मिश्रा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में प्रोफेसर हैं।
राम मंदिर ट्रस्ट के सीईओ पद पर नियुक्ति की जानकारी मिलते ही भोपतपुरा में खुशी का माहौल बन गया। ग्रामीण उनके पैतृक आवास पर पहुंचे और मिठाई बांटने के साथ आतिशबाजी की। स्थानीय लोगों ने इसे गांव के लिए गौरव का विषय बताया। स्थानीय भाजपा नेता राजकुमार शाही और प्रधान प्रतिनिधि दिनेश मिश्र ने भी परिवार से मुलाकात कर बधाई दी।
1986 में शुरू हुआ सैन्य सफर
जितेंद्र मिश्रा ने 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायुसेना में फाइटर पायलट के तौर पर कमीशन प्राप्त किया था। सैन्य सेवा के दौरान उन्होंने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, एयर फोर्स टेस्ट पायलट्स स्कूल, अमेरिका के एयर कमांड एंड स्टाफ कॉलेज और ब्रिटेन के रॉयल कॉलेज ऑफ डिफेंस स्टडीज जैसे संस्थानों में प्रशिक्षण लिया।
करीब चार दशक लंबे करियर में वह कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे। वह डिप्टी चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ और बाद में पश्चिमी वायु कमान के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ रहे। 30 अप्रैल 2026 को वह वायुसेना से सेवानिवृत्त हुए। उनके सैन्य करियर में 3,000 घंटे से अधिक उड़ान का अनुभव और 18 से ज्यादा तरह के विमान उड़ाने का अनुभव भी शामिल रहा है।
ऑपरेशन सिंदूर में कमान
जितेंद्र मिश्रा का सैन्य करियर करीब चार दशक लंबा रहा है। सेवा के दौरान उन्होंने ऑपरेशनल, टेस्ट पायलट और रणनीतिक भूमिकाओं में काम किया। कारगिल युद्ध के दौरान मिराज-2000 से जुड़े ऑपरेशनल कार्यों का अनुभव भी उनके सैन्य करियर का हिस्सा रहा।
मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वह पश्चिमी वायु कमान के प्रमुख थे। सैन्य सेवा में उनके योगदान के लिए उन्हें सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल, अति विशिष्ट सेवा मेडल और विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया गया। 30 अप्रैल 2026 को वायुसेना से सेवानिवृत्त होने के बाद अब उन्हें अयोध्या में नई जिम्मेदारी मिली है।
5,585 आवेदनों में चयन
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सीईओ पद के लिए चयन प्रक्रिया के तहत कुल 5,585 आवेदन प्राप्त हुए थे। आवेदनों की छंटनी के बाद 16 उम्मीदवारों को आगे की प्रक्रिया में शामिल किया गया। इसके बाद चयन समिति ने तीन नामों का पैनल तैयार कर ट्रस्ट के सामने रखा।
पैनल में एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा के साथ मेजर जनरल संजय प्रताप सिंह और श्रुति भारद्वाज के नाम शामिल थे। ट्रस्ट की बैठक में इन नामों पर विचार के बाद जितेंद्र मिश्रा के नाम पर अंतिम मुहर लगाई गई। इस तरह वह श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी बने।
सीईओ पद की जिम्मेदारी
राम मंदिर के निर्माण के साथ अब मंदिर परिसर के नियमित संचालन और प्रशासन की जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण हो गई है। सीईओ के तौर पर जितेंद्र मिश्रा को ट्रस्ट से जुड़े प्रशासनिक कामकाज और मंदिर के संचालन में समन्वय की भूमिका निभानी होगी। श्रद्धालुओं की सुविधाओं, कर्मचारियों और परिसर से जुड़ी व्यवस्थाओं पर भी उनकी जिम्मेदारी रहेगी।
मंदिर से जुड़ी अलग-अलग व्यवस्थाओं के लिए सरकारी विभागों और अन्य एजेंसियों के साथ तालमेल भी इस भूमिका का हिस्सा होगा। वायुसेना में बड़े स्तर की जिम्मेदारियां संभालने का उनका अनुभव इस पद के लिए अहम माना गया है। लंबे सैन्य सेवाकाल के बाद अब उनके सामने अयोध्या में मंदिर से जुड़ी व्यवस्थाओं को संभालने की नई जिम्मेदारी होगी।
ट्रस्ट में हुआ बदलाव
जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में प्रशासनिक स्तर पर बदलाव किए जा रहे हैं। हाल के महीनों में मंदिर से जुड़े चंदे की कथित चोरी को लेकर मामला सामने आया था और इसके बाद ट्रस्ट में कई स्तरों पर बदलाव हुए। इसी दौर में पहली बार पूर्णकालिक सीईओ का पद बनाया गया और इसके लिए चयन प्रक्रिया शुरू की गई।
ट्रस्ट की ओर से सीईओ की नियुक्ति का उद्देश्य मंदिर के प्रशासन और संचालन के लिए एक अलग पूर्णकालिक जिम्मेदारी तय करना है। निर्माण के साथ-साथ अब बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं, सुविधाओं, कर्मचारियों और रोजमर्रा के संचालन को व्यवस्थित तरीके से संभालना भी ट्रस्ट की प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल है।
वायुसेना के बाद नई भूमिका
करीब चार दशक तक देश की वायु सुरक्षा और सैन्य अभियानों से जुड़ी जिम्मेदारियां निभाने के बाद जितेंद्र मिश्रा के सेवाकाल का नया अध्याय अब अयोध्या से शुरू हुआ है। एक तरफ उनके पास बड़े सैन्य संगठन की कमान संभालने का अनुभव है, वहीं दूसरी तरफ अब उन्हें देश के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में से एक के प्रशासन और संचालन की जिम्मेदारी निभानी होगी।
नियुक्ति के बाद जितेंद्र मिश्रा ने कहा, “इतने सारे योग्य उम्मीदवारों में से मुझे इस पद के लिए चुना गया, यह मेरे लिए बहुत बड़े सौभाग्य की बात है। मैं इसे भगवान श्रीराम का आशीर्वाद मानता हूं। भारतीय वायुसेना में 43 वर्षों तक देश की सेवा करने के बाद, अब मुझे श्रीराम मंदिर और रामभक्तों की सेवा करने का यह पवित्र अवसर मिला है।” उन्होंने चयन समिति, ट्रस्ट और भगवान राम का आभार भी व्यक्त किया और इस जिम्मेदारी को अच्छे से निभाने की क्षमता के लिए प्रार्थना की।

