गाज़ीपुर। जिले के बीज उत्पादकों, डीलरों और रिटेलरों के लिए शुक्रवार को एक अहम निर्देश जारी किया गया। जिला कृषि अधिकारी उमेश कुमार ने बताया कि शासन के निर्देश पर अब सभी बीज व्यवसायियों का साथी पोर्टल पर अनिवार्य पंजीकरण करना होगा। जिन विक्रेताओं ने निर्धारित समय के भीतर पंजीकरण नहीं कराया उनका बीज लाइसेंस निरस्त कर दिया जाएगा। जिन विक्रेताओं की आईडी और पासवर्ड अभी तक नहीं बने हैं वे 4 दिन के भीतर जिला कृषि कार्यालय से संपर्क कर पंजीकरण पूरा करा लें।
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डिजिटल होगा बीज व्यापार
जिला कृषि अधिकारी उमेश कुमार ने बताया कि प्रदेश में बीज व्यवसाय को डिजिटल, पारदर्शी और ट्रेसिबिलिटी आधारित बनाने के उद्देश्य से यह व्यवस्था लागू की गई है। सभी बीज उत्पादक संस्थाओं, कंपनियों, फर्मों, सहकारी एवं राजकीय बिक्री केंद्रों को साथी पोर्टल पर पंजीकृत होना अनिवार्य है।
साथी पोर्टल पर बीज का स्टॉक, उसका स्थानांतरण, बिक्री, किसानों से लेनदेन और बीज वापसी सब कुछ ऑनलाइन दर्ज होगा। इससे बीज आपूर्ति श्रृंखला पर सरकार की सीधी नजर रहेगी और किसानों को घटिया या नकली बीज मिलने का खतरा काफी हद तक कम होगा।
स्टॉक में गड़बड़ी पर कार्रवाई
जिला कृषि अधिकारी उमेश कुमार ने चेताया कि पोर्टल पर दिखने वाला स्टॉक और दुकान में रखा वास्तविक माल दोनों में जरा भी फर्क मिला तो विक्रेता के खिलाफ तत्काल कार्रवाई होगी। बीज की कालाबाजारी और स्टॉक में हेरफेर रोकने के लिए यह सख्त व्यवस्था लागू की गई है।
यह व्यवस्था इसलिए लागू की गई है ताकि बीज की कालाबाजारी और स्टॉक में हेरफेर पर रोक लगाई जा सके। अब कोई भी विक्रेता पोर्टल पर दर्ज किए बिना बीज की खरीद-बिक्री नहीं कर सकेगा। यदि भौतिक सत्यापन में पोर्टल के रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में फर्क मिला तो यह नियम उल्लंघन माना जाएगा।
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4 दिन में पूरा करें पंजीकरण
जिला कृषि अधिकारी उमेश कुमार ने जिले के सभी बीज व्यवसायियों से अपील की है कि वे समय रहते पंजीकरण करा लें। जिन विक्रेताओं की आईडी और पासवर्ड अभी तक नहीं बने हैं वे 4 दिन के भीतर जिला कृषि कार्यालय से संपर्क करें।
कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि पंजीकरण में देरी करने वाले विक्रेताओं को लाइसेंस निरस्तीकरण का सामना करना पड़ सकता है। यह सख्त कदम इसलिए उठाया गया है ताकि बीज व्यापार में पारदर्शिता आए और किसानों को प्रमाणित और गुणवत्तापूर्ण बीज समय पर मिल सके। कृषि विभाग की यह पहल जिले के किसानों के लिए दीर्घकाल में लाभकारी साबित होगी।
नोट: (फोटो AI जनरेटेड)

