गाज़ीपुर, 10 सितंबर। परमवीर चक्र विजेता अब्दुल हमीद के 61वें शहादत दिवस पर गुरुवार को पैतृक गांव धामूपुर पहुंचे केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय और रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की, जहां नित्यानंद राय ने 1965 के युद्ध में उनके शौर्य को युवा पीढ़ी का प्रेरणास्रोत बताया। शहीद के पौत्र जमील आलम ने जिले में उनके नाम पर अलग भर्ती, गाज़ीपुर से दिल्ली ट्रेन और प्रस्तावित सैनिक स्कूल शीघ्र शुरू करने की मांग उठाई, जिस पर गृह राज्य मंत्री ने विभागीय स्तर पर पहल का आश्वासन दिया, वहीं कैप्टन योगेंद्र सिंह यादव ने कारगिल युद्ध के संस्मरण साझा किए।
मरणोपरांत मिला था परमवीर चक्र
10 सितंबर 1965 को भारत पाकिस्तान युद्ध में अब्दुल हमीद ने दुश्मन के कई टैंक नष्ट किए थे और इसी दिन शहीद हुए, जिसके बाद उन्हें मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया। नित्यानंद राय ने कहा कि शक्तिशाली टैंकों के सामने प्रदर्शित उनका शौर्य भारतीय सैनिक के पराक्रम का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि सरहद की रक्षा में तैनात सैनिक राष्ट्र की सुरक्षा को सर्वोपरि रखने का संदेश देता है।
गृह राज्य मंत्री ने कहा कि भारतीय सेना के पराक्रम को पूरा विश्व स्वीकार करता है और आवश्यकता पड़ने पर वह शत्रु को माकूल जवाब देने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि आज देश के पास हौसला भी है और अत्याधुनिक हथियार भी, जबकि भारतीय सेना हथियारों के साथ साहस और संकल्प की ताकत से मोर्चा संभालती है। रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने युवाओं से अब्दुल हमीद के त्याग और शौर्य को आत्मसात करने का आह्वान किया।
पौत्र ने रखीं तीन मांगें
समारोह के आयोजक एवं अब्दुल हमीद के पौत्र जमील आलम ने जिले में शहीद के नाम पर अलग भर्ती आयोजित करने की मांग रखी। साथ ही गाज़ीपुर से दिल्ली के लिए ट्रेन संचालन और जिले में प्रस्तावित सैनिक स्कूल को शीघ्र शुरू कराने की मांग भी की। नित्यानंद राय ने कार्यक्रम में आमंत्रित किए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त की और कहा कि इन मांगों को संबंधित विभागों के समक्ष रखकर पूरा कराने का प्रयास किया जाएगा।
योगेंद्र ने सुनाई कारगिल गाथा
परमवीर चक्र विजेता कैप्टन योगेंद्र सिंह यादव ने अब्दुल हमीद की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर कारगिल युद्ध से जुड़े अपने अनुभव लोगों से साझा किए। उन्होंने बताया कि युद्ध के दौरान 17 गोलियां लगने के बावजूद उन्होंने हौसला नहीं खोया।
कैप्टन योगेंद्र सिंह यादव ने आगे बताया कि कारगिल युद्ध के बाद उन्होंने लगभग 300 शहीद जवानों के परिजनों से मुलाकात कर उनकी कठिनाइयों को समझा और सहयोग का प्रयास किया। उन्होंने युवाओं से अनुशासन और राष्ट्रप्रेम के साथ देशसेवा के लिए आगे आने की अपील की।
सैकड़ों पूर्व सैनिक हुए शामिल
कार्यक्रम स्थल पर नित्यानंद राय को गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान दिया गया। इसके बाद नित्यानंद राय, संजय सेठ और कैप्टन योगेंद्र सिंह यादव ने अब्दुल हमीद और उनकी पत्नी रसूलन बीबी को नमन कर समारोह का शुभारंभ किया। अब्दुल हमीद पर बनी पांच मिनट की फिल्म का प्रदर्शन हुआ, जिसमें युद्धभूमि में उनके पराक्रम और जीवन के प्रमुख प्रसंगों को दर्शाया गया। विद्यार्थियों और युवाओं ने देशभक्ति गीत एवं नृत्य की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं।
समारोह में वीरता पुरस्कार से सम्मानित सैनिकों और उनके परिजनों को सम्मानित किया गया, वहीं पूर्वांचल के कई जिलों से आए सैकड़ों पूर्व सैनिकों ने शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला, पुलिस अधीक्षक डॉ. ईरज राजा, वाराणसी के स्टेशन कमांडिंग ब्रिगेडियर जयदीप चंदा, मेजर जनरल अभिजीत शोभा, पूर्व सांसद अतुल राय और भाजपा जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश राय उपस्थित रहे।

