प्रयागराज, 9 सितंबर। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने देवरिया के गौरीबाजार थाने में कथित गैरकानूनी हिरासत के मामले में सीसीटीवी फुटेज पेश न किए जाने पर पुलिस अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई है। बुधवार को जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस दिवेश चंद्र सामंत की बेंच ने सुनवाई के दौरान एसपी अभिजीत आर. शंकर और थाना प्रभारी से सीसीटीवी व्यवस्था को लेकर जवाब मांगा। कोर्ट ने दोनों पर 5-5 लाख रुपये का मुआवजा लगाने की चेतावनी भी दी। साथ ही चार याचिकाकर्ताओं को कुल 65,000 रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया, जिसकी वसूली थाना प्रभारी के वेतन से की जाएगी।
पुलिस फुटेज पेश नहीं कर सकी
याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि उन्हें 13 अप्रैल से 23 अप्रैल 2026 के बीच गौरीबाजार थाने में गैरकानूनी तरीके से हिरासत में रखा गया। मामले की स्थिति स्पष्ट करने के लिए थाने की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग मांगी गई, लेकिन पुलिस हिरासत की अवधि की फुटेज कोर्ट के सामने पेश नहीं कर सकी।
पुलिस की ओर से सीसीटीवी सिस्टम खराब होने की बात कही गई। सुनवाई के दौरान थाना प्रभारी ने बताया कि 12 अप्रैल को सीसीटीवी सिस्टम में खराबी आई थी। कोर्ट ने पूछा कि अगर सिस्टम खराब हुआ था तो इसकी जानकारी और मरम्मत की कार्रवाई जनरल डायरी यानी जीडी में दर्ज क्यों नहीं की गई। इस पर थाना प्रभारी ने बताया कि ऐसी कोई जीडी एंट्री नहीं की गई थी।
सीसीटीवी फुटेज को लेकर पुलिस अधिकारियों के जवाब से नाराज कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी की। सुनवाई के दौरान जस्टिस अतुल श्रीधरन ने अधिकारियों के जवाबों को लेकर उन्हें “झूठों का झुंड” तक कहा।
एसपी से लापरवाही पर सवाल
कोर्ट ने देवरिया के पुलिस अधीक्षक अभिजीत आर. शंकर से पूछा कि उन्हें सीसीटीवी सिस्टम के काम नहीं करने की जानकारी क्यों नहीं दी गई और लापरवाही सामने आने के बाद थाना प्रभारी के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई। पुलिस अधीक्षक ने कोर्ट से माफी मांगी। इस पर जस्टिस श्रीधरन ने कहा कि कोर्ट से नहीं, जनता से माफी मांगनी चाहिए।
कोर्ट ने थाना प्रभारी के खिलाफ निलंबन या सेवा समाप्ति जैसी कार्रवाई को लेकर भी सवाल किए। सुनवाई के दौरान जस्टिस श्रीधरन ने थाना प्रभारी की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि जो अधिकारी जीडी में जांच तक दर्ज नहीं कर सकता, उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
पुलिस अधीक्षक ने बताया कि थाना प्रभारी को हटाकर क्राइम ब्रांच भेज दिया गया है। हालांकि, कोर्ट इस कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हुआ। इसी दौरान कोर्ट ने एसपी और थाना प्रभारी पर 5-5 लाख रुपये का मुआवजा लगाने की चेतावनी दी।
भुगतान और रकम पर सवाल
हाईकोर्ट ने थानों में सीसीटीवी व्यवस्था को लेकर जारी धनराशि और उसके इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए। कोर्ट के सामने पेश हलफनामे के मुताबिक, उत्तर प्रदेश सरकार ने देवरिया जिले के पुलिस स्टेशनों के लिए सीसीटीवी व्यवस्था पर 46 लाख 46 हजार रुपये जारी किए थे। हालांकि, हलफनामे में रकम जारी किए जाने की तारीख का उल्लेख नहीं था।
कोर्ट ने यह भी गौर किया कि पुलिस अधीक्षक की ओर से की गई कार्रवाई की तारीख 14 अगस्त 2026 थी, जबकि कोर्ट का पिछला आदेश 4 अगस्त 2026 का था। इस पर कोर्ट ने प्रथम दृष्टया माना कि अधिकारियों की कार्रवाई याचिका पर आए आदेश के बाद शुरू हुई।
इसके अलावा सीसीटीवी का काम पूरा हुए बिना ही संबंधित एजेंसी को पूरा भुगतान किए जाने पर भी कोर्ट ने सवाल उठाया। कोर्ट ने कहा कि ऐसी एजेंसी को ब्लैकलिस्ट किया जाना चाहिए था। मामले में एसपी को 4 अगस्त से पहले की गई कार्रवाई का विवरण देने के लिए व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं।

