नई दिल्ली, 19 अगस्त। बिहार में मुजफ्फरपुर-सितामढ़ी-सोनबरसा हाईवे को चार लेन में विकसित करने की परियोजना को बुधवार को केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी मिल गई। इसके साथ ही पश्चिम बंगाल, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु से जुड़ी चार रेल परियोजनाओं को भी स्वीकृति दी गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की बैठक में इन प्रस्तावों पर फैसला लिया गया।
हाईवे पर भारी निवेश
बिहार में स्वीकृत हाईवे परियोजना की लंबाई 82.578 किलोमीटर है। इसका विकास हाइब्रिड एन्युइटी मोड के तहत किया जाएगा। यह कॉरिडोर मुजफ्फरपुर को सीतामढ़ी होते हुए सोनबरसा और भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र से जोड़ता है। सरकार के मुताबिक, इस मार्ग के चार लेन होने से मुजफ्फरपुर, रुन्नी सैदपुर, दुमरा, भुतही और सोनबरसा समेत आसपास के आबादी वाले क्षेत्रों में यातायात दबाव कम करने में मदद मिल सकती है।
परियोजना में सात प्रमुख पुल, तीन रेलवे ओवरब्रिज और दो फ्लाईओवर बनाए जाने का प्रावधान है। इनमें बागमती नदी पर 340 मीटर लंबा पुल भी शामिल है। दो फ्लाईओवर की लंबाई 1,170 मीटर और 270 मीटर होगी। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, सड़क को 100 और 80 किलोमीटर प्रति घंटे की डिजाइन गति के अनुरूप तैयार किया जाएगा और मध्य विभाजक में समतल-स्तरीय खुला मार्ग नहीं होगा।
सरकार ने इस परियोजना को प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान से जोड़ते हुए कहा है कि इससे औद्योगिक क्षेत्रों, रेलवे स्टेशनों और अन्य आर्थिक एवं लॉजिस्टिक्स केंद्रों तक संपर्क बेहतर होगा। इसके अलावा बौद्ध सर्किट और सीतामढ़ी के पुनौरा धाम समेत कई धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक पहुंच में सुधार का अनुमान जताया गया है।
चार रेल परियोजनाएं मंजूर
कैबिनेट ने पश्चिम बंगाल, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में चार रेल परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इनमें खड़गपुर-भद्रक चौथी लाइन 173 किलोमीटर, भद्रक-हरिदासपुर चौथी लाइन 75 किलोमीटर, गुम्मिडिपुंडी-गुडुर तीसरी और चौथी लाइन 90 किलोमीटर तथा कटक-पारादीप तीसरी और चौथी लाइन 72 किलोमीटर की परियोजनाएं शामिल हैं।
इन परियोजनाओं की कुल लंबाई करीब 410 किलोमीटर होगी और ये आठ जिलों से होकर गुजरेंगी। इससे लगभग 6,448 गांवों की रेल कनेक्टिविटी में सुधार होने का अनुमान है, जिनमें करीब 60 लाख लोग रहते हैं। अतिरिक्त रेल लाइनों का उद्देश्य व्यस्त मार्गों पर ट्रेनों की आवाजाही के लिए क्षमता बढ़ाना और परिचालन से जुड़ी भीड़ को कम करना है।
इन रेल मार्गों का इस्तेमाल कोयला, लौह अयस्क, सीमेंट, लोहा-इस्पात, कंटेनर, ऑटोमोबाइल और अनाज जैसी वस्तुओं की ढुलाई में होता है। सरकारी अनुमान के मुताबिक, परियोजनाओं के पूरा होने के बाद हर साल करीब 7.6 करोड़ टन अतिरिक्त माल ढुलाई की क्षमता उपलब्ध हो सकती है।
पर्यटन और माल ढुलाई
इन परियोजनाओं से कुलडीहा वन्यजीव अभयारण्य, भितरकनिका राष्ट्रीय उद्यान, चांदीपुर और तलसारी-उदयपुर समुद्र तट, पुलिकट झील समेत कई पर्यटन और धार्मिक स्थलों तक रेल संपर्क बेहतर होने की उम्मीद है।
रेल क्षमता बढ़ने से लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आने की उम्मीद है। परियोजनाओं से सालाना करीब 13 करोड़ लीटर तेल आयात और लगभग 65 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम होने का अनुमान है। साथ ही, उत्सर्जन में यह कमी करीब 2.60 करोड़ पेड़ लगाए जाने के बराबर बताई गई है।
अतिरिक्त रेल लाइन और बिहार में चार लेन हाईवे बनने से यात्रियों और माल की आवाजाही के लिए क्षमता बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि, इन परियोजनाओं का वास्तविक असर इनके निर्माण और संचालन के बाद ही स्पष्ट होगा।

