नई दिल्ली। NEET पेपर लीक को लेकर देशभर में युवाओं के आक्रोश और CJP के लगातार प्रदर्शनों के बीच गुरुवार से शुक्रवार तक सरकार ने एक के बाद एक कई अहम फैसले लिए। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अनशन के 26वें दिन देर रात 12:48 बजे अपनी भूख हड़ताल समाप्त की। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने मेदांता अस्पताल में जूस पिलाकर उनका अनशन तुड़वाया। शुक्रवार को केंद्रीय कैबिनेट ने पेपर लीक पर कठोर सजा के प्रावधान वाले बिल के मसौदे को मंजूरी दे दी और CJP व सरकार के बीच संविधान क्लब में बातचीत हुई।
PM मोदी की तीन बड़ी घोषणाएं
गुरुवार की सुबह PM मोदी ने एक्स पर लिखा कि युवाओं का हित सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और पेपर लीक के मामलों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित किए जाएंगे। गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में उच्च स्तर पर बैठकों के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने पहले फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन की अधिसूचना जारी की।
इसी दौरान उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी का तबादला कर पंचायती राज विभाग भेजा गया। नरेश गंगवार नए उच्च शिक्षा सचिव और टीके अनिल कुमार नए शिक्षा सचिव बनाए गए।
आधी रात PM मोदी ने वीडियो संदेश पोस्ट कर कहा कि पेपर लीक रोकने के लिए कठोर कानून इसी मानसून सत्र में लाया जाएगा। शुक्रवार को PM मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक हुई जिसमें पेपर लीक संशोधन बिल को मंजूरी दे दी गई। इस बिल में फास्ट ट्रैक कोर्ट और कठोर सजा के प्रावधान हैं।
सोनम वांगचुक ने तोड़ा अनशन
सोनम वांगचुक ने एक्स पर लिखा कि देश में संभावित हिंसा को टालने के लिए यह फैसला लिया। पिछले दो दिनों से सरकार के साथ बातचीत चल रही थी और वे लिखित आश्वासन चाहते थे। सरकार ने लिखित में तीन प्रमुख मांगें स्वीकार कीं।
पहली — जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों और 20 जुलाई के संसद मार्च में शामिल छात्रों पर कोई FIR दर्ज नहीं होगी। दूसरी — पेपर लीक की वजह से जान गंवाने वाले 20 से अधिक बच्चों के परिवारों को ₹1-1 करोड़ मुआवजा दिया जाएगा। तीसरी — संसद में पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में सुधार पर विस्तृत बहस होगी।
जेपी नड्डा ने वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंगमो और जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में जूस पिलाकर अनशन तुड़वाया। 65 सांसदों ने पत्र लिखकर आग्रह किया था। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर वांगचुक ने कहा कि सरकार इस पर लिखित आश्वासन नहीं दे सकी।
शिक्षा मंत्री इस्तीफे पर वांगचुक का जवाब
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के सवाल पर वांगचुक ने कहा कि सरकार इस पर कोई लिखित आश्वासन नहीं दे सकी। उनके सामने दो रास्ते थे — या तो भूख हड़ताल जारी रखते जिससे जान जाने का खतरा था, या अनशन समाप्त करते। उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा न देना खुद सरकार के लिए नुकसानदायक है। वांगचुक के लिए सबसे जरूरी था कि मासूम बच्चों पर FIR दर्ज न हो क्योंकि उन्होंने लद्दाख में देखा है कि FIR किस तरह युवाओं का भविष्य बर्बाद करती है।
CJP-सरकार वार्ता — तीन मांगों पर सहमति
शुक्रवार दोपहर संविधान क्लब में सरकार और CJP के बीच बातचीत हुई। सरकार की ओर से जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह जबकि CJP की ओर से सौरव दास और आशुतोष रांका बैठक में शामिल हुए।
बैठक में तीन बिंदुओं पर सहमति बनी। मृत छात्रों के परिजनों को ₹1-1 करोड़ मुआवजा, पेपर लीक के आरोपियों के लिए 10 साल की सजा का प्रावधान और 20 जुलाई के प्रदर्शन में शामिल छात्रों पर कोई FIR दर्ज न होना। हालांकि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर कोई सहमति नहीं बन सकी। सरकार ने बाकी मुद्दों पर विचार के लिए शनिवार दोपहर 2 बजे तक का समय मांगा।
CJP प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि डेढ़ महीने के विरोध के बाद PM ने ध्यान दिया लेकिन असली सवाल यह है कि पेपर लीक होते क्यों हैं — इसका जवाब मिलना चाहिए। CJP ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक आंदोलन जारी रखने का एलान किया।
कोर्ट का निर्देश, विपक्ष का हमला
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि वह NTA सुधारों को “बहुत करीब से” मॉनिटर करेगा। सरकार से Computer Based Testing (CBT) मोड, साइबर सुरक्षा और परीक्षा सुरक्षा पर विस्तृत हलफनामा मांगा गया। अगली सुनवाई 27 जुलाई को होगी।
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने एक्स पर लिखा कि सुबह PM मोदी ने फास्ट ट्रैक कोर्ट का एलान किया लेकिन धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का क्या हुआ। उन्होंने कहा कि PM का यह बयान एक “हारे हुए, दिशाहीन लेकिन अहंकारी व्यक्ति” का लगता है।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा कि छात्र धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांग रहे हैं — उनकी बुद्धिमत्ता का अपमान न करें। उन्होंने तीन मांगें रखीं — धर्मेंद्र प्रधान को बर्खास्त किया जाए, लाठीचार्ज करने वालों पर कार्रवाई हो और प्रदर्शनकारियों से माफी मांगी जाए। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे समेत पूरे विपक्ष ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर संसद में प्रदर्शन किया।



