लखनऊ, 5 अगस्त। लखनऊ कानपुर एक्सप्रेसवे पर सड़क धंसने की घटना के बाद नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) ने कड़ी कार्रवाई की है। मरम्मत कार्य पूरा होने तक इस एक्सप्रेसवे पर टोल वसूली पूरी तरह रोक दी गई है। इसके साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों, निर्माण एजेंसी और स्वतंत्र अभियंता एजेंसी पर भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है।
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टोल वसूली फिलहाल बंद
63 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे का निर्माण एनएचएआई ने 4,200 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से कराया था। इसका उद्घाटन 13 जुलाई को हुआ था। एक्सप्रेसवे पर चार पहिया वाहन के लिए एक तरफ का टोल 275 रुपये तय किया गया था, जो देश में सबसे महंगे टोल में गिना जाता है।
एनएचएआई के अनुसार 26 जुलाई को एक्सप्रेसवे के किमी 64 (RHS) के पास करीब 300 मीटर हिस्से में सड़क धंसने की घटना सामने आई। इसके बाद उस स्थान पर यातायात को डायवर्ट किया गया, जो फिलहाल सुचारु रूप से चल रहा है। क्षेत्रीय अधिकारी गौतम विशाल ने बताया कि जब तक क्षतिग्रस्त हिस्से की पूरी मरम्मत नहीं हो जाती, तब तक यात्री बिना किसी टोल शुल्क के एक्सप्रेसवे का इस्तेमाल कर सकेंगे।
जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई
एनएचएआई ने परियोजना से जुड़े अधिकारियों पर भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की है। मौजूदा प्रोजेक्ट डायरेक्टर नकुल प्रकाश वर्मा को उनके मूल विभाग में वापस भेज दिया गया है। साथ ही उन्हें और पूर्व परियोजना निदेशक सौरभ चौरसिया दोनों को कथित लापरवाही के आरोप में चार्जशीट जारी की गई है, क्योंकि सौरभ चौरसिया के कार्यकाल में ही एक्सप्रेसवे का अधिकांश निर्माण कार्य हुआ था।
इससे पहले निर्माण एजेंसी के प्रोजेक्ट मैनेजर विवेक कुमार गुप्ता, स्वतंत्र अभियंता टीम के प्रमुख सुरेंद्र कुमार और रेजिडेंट इंजीनियर यतेंद्र कुमार को भी परियोजना से हटाया जा चुका है। इन तीनों को दो साल के लिए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, एनएचएआई तथा एनएचआईडीसीएल की किसी भी परियोजना से जुड़ने पर रोक लगा दी गई है।
निर्माण एजेंसी पर कसा शिकंजा
एनएचएआई ने निर्माण एजेंसी पीएनसी इंफ्राटेक लिमिटेड को नॉन-परफॉर्मर घोषित करने का प्रस्ताव रखते हुए इसकी सूचना जारी की है, जिसके तहत भविष्य में कंपनी एनएचएआई की किसी भी परियोजना के टेंडर में हिस्सा नहीं ले सकेगी। इसके साथ ही एजेंसी को कारण बताओ नोटिस भेजते हुए परफॉर्मेंस सिक्योरिटी का 2 प्रतिशत जुर्माना लगाने, पेवमेंट व हाईवे प्रभारी सहित जिम्मेदार कर्मचारियों पर तीन साल तक डिबारमेंट की कार्यवाही शुरू करने और कंपनी की कंसेशनायर रेटिंग (पेवमेंट कंडीशन इंडेक्स) घटाने का प्रस्ताव रखा गया है।
एजेंसी को अपने खर्च पर करीब तीन करोड़ रुपये की लागत से प्रभावित हिस्से की पूरी मरम्मत कराने का निर्देश दिया गया है। एनएचएआई ने परियोजना की स्वतंत्र अभियंता एजेंसी थीम इंजीनियरिंग सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड को भी भविष्य की परियोजनाओं से दूर रखने के लिए डिबारमेंट नोटिस जारी किया है। टोल न वसूलने से होने वाले राजस्व नुकसान की भरपाई भी निर्माण एजेंसी से ही कराई जाएगी।
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तकनीकी टीम कर रही जांच
सुधारात्मक उपायों के तहत एनएचएआई पूरे प्रोजेक्ट क्षेत्र में लेजर प्रोफिलोमीटर तकनीक से सड़क की सतह का विस्तृत आकलन करा रहा है। इसके साथ ही आईआईटी खड़गपुर के प्रोफेसर केएस रेड्डी के नेतृत्व में पेवमेंट विशेषज्ञों की एक टीम गठित की गई है, जो घटना के मूल कारणों की गहराई से जांच कर उचित सुधारात्मक उपाय सुझाएगी।
एनएचएआई ने कहा है कि वह राष्ट्रीय राजमार्ग ढांचे के निर्माण और रखरखाव में उच्चतम गुणवत्ता, सुरक्षा और जवाबदेही के मानकों को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। विशेषज्ञ टीम की रिपोर्ट आने के बाद ही एक्सप्रेसवे को पूरी तरह सुरक्षित घोषित किया जाएगा।

