लखनऊ, 5 अगस्त। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने बुधवार को पत्रकारों से बातचीत में समाजवादी पार्टी के प्रबुद्धजन सम्मेलन पर टिप्पणी की। उसी दिन सपा प्रमुख अखिलेश यादव जनेश्वर मिश्र जयंती के मौके पर ब्राह्मण समाज से जुड़े नेताओं के इस सम्मेलन में शामिल हुए थे। ब्रजेश पाठक ने सम्मेलन को लेकर सपा पर आरोप लगाए।
“केवल तुष्टिकरण की राजनीति”
ब्रजेश पाठक का पहला निशाना सीधे सम्मेलन की मंशा पर था। उनका कहना था कि इस आयोजन का ब्राह्मण समाज या समाज के किसी भी बड़े तबके से वास्तव में कोई सरोकार नहीं है, बल्कि यह सिर्फ एक राजनीतिक कवायद है। उन्होंने खुलकर कहा, “यह समाजवादी पार्टी का ब्राह्मण सम्मेलन से कोई लेना देना नहीं, यह केवल तुष्टिकरण की पॉलिटिक्स में लिप्त है।”
जयंती को बताया गैर-राजनीतिक
ब्रजेश पाठक ने बताया कि बुधवार को समाजवादी विचारक जनेश्वर मिश्र की जयंती है और वह भी प्रदेश सरकार की ओर से उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित करते हैं। उन्होंने कहा कि इस अवसर का ब्राह्मण समाज या समाज के किसी अन्य वर्ग से कोई संबंध नहीं जोड़ा जाना चाहिए। उपमुख्यमंत्री के मुताबिक जयंती एक स्वतंत्र आयोजन है, जिसे किसी राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए।
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“सपा खुद कन्फ्यूज है”
आगे उपमुख्यमंत्री ने सपा की सामाजिक रणनीति को ही कठघरे में खड़ा कर दिया। उनका आरोप था कि पार्टी का रुख लगातार बदलता रहता है — कभी पीडीए का नारा, तो कभी सवर्ण समाज को अलग खांचे में रखने की कोशिश, कभी उन्हें अल्पसंख्यक तक करार देना। पाठक के मुताबिक यह सब सिर्फ वोट बैंक साधने की कवायद है, विकास या जनकल्याण से इसका कोई रिश्ता नहीं।
इसी क्रम में उन्होंने यह भी जोड़ा कि जनता अब ऐसी राजनीति को भलीभांति पहचान चुकी है और समाजवादी पार्टी को नकार चुकी है। सपा के पिछले शासनकाल का जिक्र करते हुए उनका आरोप था कि उस दौर में कानून व्यवस्था बिगड़ी और अराजकता बढ़ी। पाठक ने यहां तक कहा कि लोकतांत्रिक मर्यादाओं में सपा का भरोसा सीमित है, पार्टी सिर्फ सदन में हंगामे पर यकीन रखती है।
गौरतलब है कि उसी सम्मेलन में अखिलेश यादव ने पीडीए शब्द को नई व्याख्या दी थी — उनके मुताबिक इसमें “पी” का मतलब पंडित है, और जितना इस समुदाय को दबाया जाएगा, वह उतना ही मजबूत होकर उभरेगा। पाठक की टिप्पणी इसी बयान की प्रतिक्रिया के तौर पर सामने आई।

