अयोध्या, 18 अगस्त। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर परिसर में चढ़ावा चोरी और व्यवस्थागत गड़बड़ियों के मामले में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट के बाद कार्रवाई नए मोड़ पर पहुंच गई है। राज्य प्रशासन ने इस प्रकरण की विस्तृत रिपोर्ट आगे के निर्णय के लिए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सौंप दी है। लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत के नेतृत्व वाली तीन सदस्यीय एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट में सूत्रों के अनुसार ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और पूर्व सदस्य अनिल मिश्रा का नाम शामिल नहीं है।
किसका नाम रिपोर्ट में नहीं
एसआईटी टीम में आईजी रेंज किरण एस. और विशेष सचिव वित्त नील रतन कुमार भी शामिल रहे। गौरतलब है कि प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में एसआईटी ने चंपत राय को क्लीन चिट दी थी, जबकि अनिल मिश्रा की भूमिका पर सवाल उठाए थे। दोनों ने सवाल उठने के बाद अपने पदों से इस्तीफा भी दे दिया था।
अंतिम रिपोर्ट में मुख्य रूप से उन आठ कर्मचारियों को आरोपी बनाया गया है, जो पहले से ही न्यायिक हिरासत में हैं। एसआईटी ने मंदिर के आय-व्यय, बैंक खातों, दान पेटियों के प्रबंधन और ट्रस्ट में सिफारिश पर की गई नियुक्तियों की भी पड़ताल की। जांच में एसबीआई और ट्रस्ट के बीच किए गए अनुबंध में कुछ खामियां भी सामने आई थीं, जिन्हें एसआईटी ने प्रारंभिक रिपोर्ट में शासन के समक्ष रखा था।
सीसीटीवी में सामने आई सच्चाई
27 अप्रैल से 5 जून 2026 के बीच के सीसीटीवी फुटेज के अध्ययन में यह बात सामने आई कि निर्धारित सुरक्षा नियमों और तलाशी प्रक्रिया में अनदेखी के चलते कर्मचारियों द्वारा करीब 70 बार नकदी छिपाकर बाहर ले जाने की बात कही गई थी। जांच में यह भी सामने आया कि करीब 80 लाख रुपये पुलिस को सूचना दिए बिना बरामद कराए गए थे।
25 जून को श्रीराम जन्मभूमि थाने में ट्रस्ट सदस्य कृष्णमोहन की शिकायत पर आठ नामजद आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ था। इनमें अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू शामिल हैं, जिन्हें जेल भेजा जा चुका है।
आगे की जांच अदालत में
राज्य सरकार की रिपोर्ट मिलने के बाद स्थानीय पुलिस अपनी विवेचना इन निष्कर्षों के अनुरूप आगे बढ़ाएगी और जरूरत पड़ने पर संबंधित लोगों से दोबारा पूछताछ भी कर सकती है। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गठित एक अन्य स्वतंत्र जांच दल भी ट्रस्ट के वित्तीय रिकॉर्ड की अलग पड़ताल जारी रखे हुए है।
इस दूसरी टीम की रिपोर्ट सीधे सीलबंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट को सौंपी जानी है, जिस पर आगे की कानूनी दिशा निर्भर करेगी। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सात जून को यह मुद्दा सबसे पहले उठाया था, जिसके बाद आप सांसद संजय सिंह ने भी चंपत राय की भूमिका पर लगातार सवाल उठाए थे।

