लखनऊ, 5 अगस्त। समाजवादी पार्टी के संस्थापक नेताओं में शुमार जनेश्वर मिश्र की जयंती बुधवार को लखनऊ में पूरे उत्साह के साथ मनाई गई। सपा प्रमुख अखिलेश यादव खुद इस मौके पर मौजूद रहे और पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ अपने वरिष्ठ नेता को याद किया। कार्यक्रम में प्रदेशभर से बड़ी संख्या में समाजवादी कार्यकर्ता जुटे।
पार्क में उमड़ी भीड़
सुबह करीब 11:45 बजे अखिलेश यादव जनेश्वर मिश्र पार्क पहुंचे। गोल्फ कार्ट से प्रतिमा तक जाते ही कार्यकर्ता उनके इर्द-गिर्द जमा होने लगे, नारेबाजी का शोर पूरे परिसर में गूंजने लगा। इतनी भीड़ जुट गई कि सुरक्षाकर्मियों को रास्ता बनाने में खासी मशक्कत करनी पड़ी। आखिरकार अखिलेश यादव को सुरक्षित प्रतिमा स्थल तक पहुंचाया जा सका, जहां उन्होंने माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी।
ब्राह्मण नेताओं के बीच पहुंच
पार्क से निकलकर अखिलेश यादव सीधे पार्टी कार्यालय गए, जहां उस दिन प्रबुद्धजन सम्मेलन का आयोजन था। यह सम्मेलन खासतौर पर ब्राह्मण समाज से जुड़े नेताओं और पदाधिकारियों के लिए बुलाया गया था, और राज्यभर से लोग इसमें शामिल होने पहुंचे थे। मंच से बोलते हुए अखिलेश यादव ने जनेश्वर मिश्र के योगदान को याद किया और कहा कि उनके विचार आज भी पार्टी को दिशा देते हैं। पीडीए की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा, “पीडीए में पी पंडित है, और जितनी पीड़ा दोगे पीडीए उतना ही मजबूत होगा।”
सरकार को घेरने की कोशिश
इसी मंच से अखिलेश यादव ने राज्य सरकार पर सीधा हमला बोला। उनका दावा था कि सूबे में लगभग 26 हजार स्कूल बंद कर दिए गए, जबकि दूसरी तरफ पीडीए पाठशाला चलाने पर मुकदमे दर्ज हुए। सड़क निर्माण को लेकर भी उन्होंने सवाल उठाए, कहा कि 63 किलोमीटर की एक सड़क पर करीब 4 हजार करोड़ रुपये खर्च हुए और वह भी कुछ ही दिनों में खराब हो गई। भाजपा को लेकर उनका कहना था कि पार्टी बार-बार पीडीए की परिभाषा बदल रही है, और आने वाले 2027 चुनाव में इसका जवाब देना जरूरी होगा।
फर्जी मुठभेड़ों की जांच
सम्मेलन में पूर्व मंत्री अभिषेक मिश्रा ने भी मंच साझा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के कार्यकाल में ब्राह्मण समाज के फर्जी एनकाउंटर हुए हैं। उनका कहना था कि सपा सरकार बनने पर इन सभी मामलों की दोबारा जांच कराई जाएगी, और अगर किसी अधिकारी की भूमिका सामने आती है तो पद चाहे जो भी हो, कार्रवाई तय है।
कार्यक्रम स्थल पर बड़े आयोजन को अनुमति न मिलने का मुद्दा भी उठा। इस पर अखिलेश यादव ने कहा कि जगह भले सीमित हो, पर 2027 में बदलाव की मांग को इससे रोका नहीं जा सकता।
जनेश्वर मिश्र को समाजवादी आंदोलन के प्रमुख चेहरों में गिना जाता है, और उनकी जयंती हर साल पार्टी के लिए एक बड़ा आयोजन होती है। इस बार भी कार्यक्रम में सपा के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। प्रबुद्धजन सम्मेलन को पार्टी की ब्राह्मण समाज में पैठ बढ़ाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है, जिसमें आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर भी बातचीत हुई।


