लखनऊ, 10 अगस्त। शहरों में बरसों से जमा संपत्ति कर, जलकर और सीवरकर के बकाये को खत्म करने के लिए राज्य सरकार एक नई योजना लेकर आई है। 762 नगरीय निकायों में फैले इस बकाये की वसूली अब एकमुश्त समाधान योजना के जरिए की जाएगी, जिसे सरकार ने सोमवार को मंजूरी दी। इस कदम से जहां बकायेदारों को राहत मिलेगी, वहीं निकायों की कमाई में भी इजाफा होगा।
762 निकायों में लागू होगी योजना
लाभार्थियों में 17 नगर निगम, 200 नगर पालिका परिषद और 545 नगर पंचायतें शामिल होंगी, यानी हर स्तर के शहरी निकाय के बकायेदार इस राहत के दायरे में आएंगे। सरकार की कोशिश है कि पुराना बकाया आसानी से चुक जाए, टैक्सपेयर्स पर आर्थिक दबाव कम हो और मामले अदालत तक न पहुंचें। योजना कुल चार महीने तक चलेगी, यानी 15 अगस्त से 15 दिसंबर 2026 तक। शुरुआती एक महीने यानी 15 अगस्त से 14 सितंबर तक हर निकाय को अपने क्षेत्र के करदाताओं तक योजना की जानकारी पहुंचाने और प्रचार करने का काम सौंपा गया है।
तीन किस्तों में जमा होगा बकाया
बकाया चुकाना आसान हो, इसके लिए भुगतान को तीन हिस्सों में बांटा गया है। पहला हिस्सा, यानी कुल राशि का एक तिहाई, योजना शुरू होने के 30 दिन के अंदर जमा करना अनिवार्य है। बचे हुए दो-तिहाई हिस्से को अगले दो महीनों में बराबर-बराबर दो किस्तों में चुकाया जा सकता है। इस तरह करदाता के पास पूरा बकाया निपटाने के लिए कुल तीन महीने का समय रहेगा।
मजबूत होगी निकायों की आय
नगर विकास मंत्री अरविंद कुमार शर्मा ने बताया कि सरकार नगरीय निकायों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और नागरिकों को बेहतर सुविधाएं देने की दिशा में लगातार काम कर रही है। उन्होंने ओटीएस योजना को इसी प्रयास की एक अहम कड़ी बताया, जिससे पुराने कर बकाये का समाधान होगा। मंत्री के अनुसार इस योजना से निकायों को लंबित राजस्व की समयबद्ध वसूली में मदद मिलेगी।
मंत्री शर्मा ने बताया कि इस राजस्व का इस्तेमाल शहरों में सड़क, जल निकासी, पेयजल, सफाई और रोशनी जैसी जरूरी सुविधाओं को बेहतर बनाने में किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि नगरीय निकायों के पास आय के मजबूत स्रोत हों, ताकि वे अपने विकास कार्यों के लिए ज्यादा सक्षम बन सकें।

