लखनऊ, 6 अगस्त। बलिया जिले की रसड़ा विधानसभा सीट से बसपा विधायक उमाशंकर सिंह का बुधवार शाम दिल्ली के एक निजी अस्पताल में कैंसर से लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वे 55 वर्ष के थे और यूपी में बसपा के इकलौते विधायक थे। पार्टी सुप्रीमो मायावती के भरोसेमंद नेताओं में गिने जाने वाले उमाशंकर सिंह पिछले करीब दो साल से दिल्ली और विदेश में इलाज करा रहे थे। अंतिम दर्शन के लिए गुरुवार को उनका पार्थिव शरीर लखनऊ के गोमतीनगर स्थित आवास पर रखा गया।
बीमारी में भी सक्रिय रहे
बीमारी के बावजूद उमाशंकर सिंह राजनीति में लगातार सक्रिय बने रहे। मिली जानकारी के मुताबिक निधन से दो दिन पहले उन्होंने अस्पताल से ही फोन कर विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना से बातचीत की थी। यह उनकी बीमारी के अंतिम दिनों में भी क्षेत्र और विधानसभा से जुड़े मुद्दों में उनकी रुचि को दर्शाता है।
नेता पहुंचे श्रद्धांजलि देने
पार्थिव शरीर गोमतीनगर आवास पर रखे जाने के बाद बड़ी संख्या में नेता श्रद्धांजलि देने पहुंचे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी आवास पहुंचे और श्रद्धासुमन अर्पित किए। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने भी वहां पहुंचकर श्रद्धांजलि दी और कहा कि उमाशंकर सिंह के न रहने से उत्तर प्रदेश की राजनीति में बहुत अंतर आया है।
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता शिवपाल यादव भी आवास पहुंचे और परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। बसपा नेता सतीश मिश्रा ने भी श्रद्धांजलि दी और कहा कि उमाशंकर उनके छोटे भाई की तरह थे।
बड़े नेताओं ने जताया शोक
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर भी लिखा कि रसड़ा विधानसभा क्षेत्र से विधायक उमाशंकर सिंह का निधन अत्यंत दुखद है। राज्यसभा सांसद नीरज शेखर ने इसे सामाजिक और राजनीतिक जगत के लिए अपूरणीय क्षति बताते हुए कहा कि सार्वजनिक जीवन में उनके योगदान को हमेशा सम्मान के साथ याद किया जाएगा। पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी एक्स पर श्रद्धांजलि दी।
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मायावती भावुक नजर आईं
बसपा सुप्रीमो मायावती गोमतीनगर आवास पहुंचकर परिवार से मिलने और श्रद्धांजलि देने पहुंचीं। उन्होंने कहा कि जब तक उमाशंकर सिंह बसपा में रहे, तब तक उन्होंने हमेशा ईमानदारी का परिचय दिया, साथ ही अपने क्षेत्र और समाज दोनों का ध्यान रखा।
मायावती ने बताया कि वह पेशे से व्यवसायी थे, और अक्सर देखा जाता है कि सत्ता परिवर्तन के दौरान व्यवसायी वर्ग पार्टियां बदल लेता है, लेकिन उतार-चढ़ाव के बावजूद उमाशंकर सिंह ने पार्टी को कभी धोखा नहीं दिया। उन्होंने कहा कि बहुत से लोग भाई बने, लेकिन अनुसूचित जाति को छोड़कर बाकी सभी धोखा देकर चले गए, जबकि उमाशंकर सिंह ने कभी धोखा नहीं दिया। मायावती ने बताया कि वह उन्हें अपनी सगी बहन की तरह मानते थे और रक्षाबंधन के मौके पर हमेशा उनसे राखी बंधवाते थे।
उन्होंने बीमारी के दौरान की एक घटना का भी जिक्र किया। मायावती ने बताया कि तबियत ठीक न होने के बावजूद उमाशंकर सिंह एक बार उनसे मिलने पहुंच गए थे, क्योंकि उन्हें लगा कि बहन जी को देखे हुए काफी दिन हो गए हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने उमाशंकर सिंह से कहा था कि बीमारी की हालत में आने की जरूरत नहीं, वे खुद मिलने आ जातीं, लेकिन उमाशंकर सिंह फिर भी मिलने पहुंच गए थे।
परिवार को दिया भरोसा
मायावती ने कहा कि उमाशंकर सिंह जब भी रसड़ा विधानसभा सीट से बसपा के टिकट पर चुनाव लड़े, हर बार जीत दर्ज की और हर सुख-दुख की घड़ी में क्षेत्र की जनता के साथ खड़े रहे। उन्होंने बताया कि उनके परिवार में एक बेटा और एक विवाहित बेटी है, और अभी परिवार की महिलाएं, बेटी, बेटा सभी काफी दुखी हैं।
मायावती ने भरोसा दिलाया कि अगर परिवार चाहेगा तो वे उमाशंकर सिंह के बेटे को राजनीति में आगे बढ़ाने का प्रयास करेंगी और उन्हें पिता के स्थान पर पूरा महत्व देंगी। उन्होंने कहा कि रसड़ा विधानसभा क्षेत्र के लोग भी संभवतः यही चाहेंगे कि अब उनके बेटे को आगे बढ़ाया जाए। मायावती ने कहा कि पार्टी को इस निधन से बड़ी क्षति हुई है और इस दुख की घड़ी में पूरी पार्टी परिवार के साथ खड़ी है।
क्षेत्र में लोकप्रियता और पहचान
अपने विधानसभा क्षेत्र में उमाशंकर सिंह को गरीबों की मदद करने वाले नेता के तौर पर जाना जाता था और स्थानीय स्तर पर उन्हें “रॉबिनहुड” के नाम से भी पुकारा जाता था। सामाजिक कार्यों और जनसेवा के चलते उनकी क्षेत्र में मजबूत पकड़ मानी जाती थी। निधन के बाद उनकी विधानसभा सीट को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है, क्योंकि रसड़ा से लगातार तीन बार जीत दर्ज करने वाले उमाशंकर सिंह 2022 में बसपा के इकलौते विजयी उम्मीदवार बने थे। पार्थिव शरीर को गुरुवार को ही बलिया के लिए रवाना किया गया, जहां क्षेत्र की जनता के अंतिम दर्शन के बाद अंतिम संस्कार किया जाएगा।



