बलिया, 6 अगस्त। रसड़ा विधानसभा सीट से बसपा विधायक दिवंगत उमाशंकर सिंह की राजनीतिक यात्रा और सामाजिक पहचान एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है। तीन बार विधायक रहे उमाशंकर सिंह को क्षेत्र में गहरी पैठ रखने वाले नेता के तौर पर जाना जाता था। 2012 में पहली बार चुनाव जीतने के बाद से वे लगातार क्षेत्र की राजनीति में सक्रिय रहे।
लगातार तीन बार विधायक
उमाशंकर सिंह का जन्म 2 जनवरी 1971 को बलिया जिले के रसड़ा क्षेत्र स्थित खनवर गांव में हुआ था। उनके पिता घुराहु सिंह भारतीय सेना से सेवानिवृत्त सैन्यकर्मी थे। उन्होंने सतीश चंद्र कॉलेज, बलिया से स्नातक की पढ़ाई की और 1991 में छात्रसंघ के महामंत्री चुने गए, जहां से उनका राजनीतिक सफर शुरू हुआ। वर्ष 2011 में उन्होंने बहुजन समाज पार्टी की सदस्यता ली और 2012 में पहली बार रसड़ा विधानसभा सीट से चुनाव जीता।
इसके बाद उन्होंने 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में भी लगातार जीत दर्ज की। वर्ष 2022 के चुनाव में जब पूरे उत्तर प्रदेश में बसपा को केवल एक सीट मिली, तब उमाशंकर सिंह ही पार्टी के इकलौते विजयी उम्मीदवार थे। इसके बाद पार्टी ने उन्हें बसपा विधायक दल का नेता भी नियुक्त किया।
रॉबिनहुड नाम से थे मशहूर
राजनीति के साथ-साथ उमाशंकर सिंह व्यवसाय से भी जुड़े रहे और छात्र शक्ति कंस्ट्रक्शन के नाम से बड़े ठेकेदार के रूप में जाने जाते थे। अपनी मजबूत जन-पहुंच के कारण क्षेत्र में उन्हें “रॉबिनहुड” के नाम से भी पुकारा जाता था। उन्होंने कई सामूहिक विवाह आयोजनों में भूमिका निभाई, जिनमें एक बार 251 और बाद में 351 जोड़ों की शादी कराकर वे प्रदेशभर में चर्चा में आए थे। इसके अलावा रसड़ा में मुफ्त वाई-फाई क्षेत्र शुरू कराने में भी उनकी अहम भूमिका रही।
यह भी पढ़ें: बसपा विधायक उमाशंकर सिंह के निधन पर मायावती भावुक
आयकर छापे और विवाद
विधायक बनने के बाद भी सरकारी ठेकेदारी जारी रखने के आरोप में उमाशंकर सिंह के खिलाफ लोकायुक्त जांच हुई थी। इसी दौरान एक पद पर रहते हुए दो लाभ लेने के आरोप में उनकी विधानसभा सदस्यता अयोग्य ठहराए जाने का मामला भी सामने आया, हालांकि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में कानूनी लड़ाई लड़कर अपनी सदस्यता बहाल कराई।
वर्ष 2026 की शुरुआत में लखनऊ के गोमतीनगर स्थित आवास व कार्यालय, खनवर स्थित आवास तथा बलिया और सोनभद्र स्थित उनके करीबियों के ठिकानों पर आयकर विभाग की बड़ी छापेमारी हुई थी, जिसमें करीबियों के ठिकानों से करीब 10 करोड़ रुपये नकद बरामद होने की बात सामने आई थी।
इसके अलावा बलिया में कैबिनेट मंत्री दयाशंकर सिंह के साथ भी उनका विवाद चर्चा में रहा, जो एनएच-31 पर स्थित कटहल नाला पुल को बिना उद्घाटन खोले जाने को लेकर शुरू हुआ था। मंत्री दयाशंकर सिंह ने लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों पर उमाशंकर सिंह के इशारे पर काम करने का आरोप लगाया था, जिसके जवाब में उमाशंकर सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा था कि पुल केंद्र सरकार व एनएचएआई के अधीन है। यह विवाद समय-समय पर दोनों नेताओं के तीखे बयानों के साथ राजनीतिक गलियारों में उठता रहा।
क्षेत्र में शोक की लहर
निधन की खबर फैलते ही उमाशंकर सिंह के पैतृक आवास खनवर पर सन्नाटा पसर गया। रात से ही शुभचिंतकों और समर्थकों के पहुंचने का सिलसिला जारी रहा। खनवर स्थित पैतृक आवास पर क्षेत्र की जनता के अंतिम दर्शन के लिए पार्थिव शरीर रखे जाने की तैयारी की जा रही है। इसके बाद शुक्रवार को बलिया के गंगा घाट पर राजकीय एवं धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा।
विधायक के निधन की खबर से रसड़ा, नगरा समेत आसपास के क्षेत्रों में गहरा शोक व्याप्त है। श्रद्धांजलि स्वरूप कई बाजारों में दुकानें बंद रहीं, वहीं कई स्कूल और कॉलेज भी बंद रहे। विभिन्न शिक्षण संस्थानों में शोक सभाओं का आयोजन कर दो मिनट का मौन रखा गया।


