लखनऊ। शिया इस्लामिक विद्वान और सामाजिक चिंतक मौलाना जावेद हैदर ज़ैदी ने सोमवार को दिल्ली में सीजेपी के समर्थन में जुटे छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई को लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध बताया। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से नैतिक जिम्मेदारी लेकर पद छोड़ने की मांग की और सरकार से छात्रों के साथ संवाद का रास्ता अपनाने की अपील की।
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छात्रों पर बल प्रयोग चिंताजनक
मौलाना ज़ैदी ने कहा कि देश में युवा आज शिक्षा में पारदर्शिता, निष्पक्ष अवसर और जवाबदेही की मांग लेकर सड़कों पर उतरे हैं। यह मांग पूरी तरह जायज है और किसी भी सरकार का दायित्व है कि इन सवालों का जवाब बातचीत से दे, बल प्रयोग से नहीं।
उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। जंतर-मंतर पर एकत्रित हुए छात्र किसी हिंसा या उत्पात के लिए नहीं बल्कि अपने भविष्य की चिंता लेकर आए थे। ऐसे में उन पर किया गया बल प्रयोग न केवल लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध है बल्कि संविधान की भावना के भी खिलाफ है।
मौलाना ज़ैदी ने केंद्र सरकार से मांग की कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने जो कार्रवाई की उसकी निष्पक्ष जांच हो। भविष्य में किसी भी शांतिपूर्ण आंदोलन पर इस तरह का बल प्रयोग न दोहराया जाए। उन्होंने कहा कि छात्रों की शिकायतों पर गंभीरता से विचार होना चाहिए और शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए ठोस और पारदर्शी कदम उठाए जाने चाहिए।
धर्मेंद्र प्रधान दें इस्तीफा
मौलाना ज़ैदी ने कहा कि संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों की जवाबदेही सिर्फ प्रशासनिक नहीं बल्कि नैतिक भी होती है। देशभर में शिक्षा व्यवस्था को लेकर व्यापक असंतोष है। पेपर लीक की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं और छात्रों का गुस्सा सड़कों तक पहुंच चुका है।
ऐसे हालात में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। मौलाना ज़ैदी का कहना था कि सत्ता में बैठे लोग जब जवाबदेही से मुंह मोड़ते हैं तो जनता का भरोसा सरकारी तंत्र से उठने लगता है। केंद्र सरकार को यह बात समझनी होगी कि छात्रों के आक्रोश को नजरअंदाज करने से समस्या और गहरी होगी।
मौलाना ज़ैदी ने यह भी कहा कि सरकार को चाहिए कि शिक्षा व्यवस्था की खामियों को दूर करने के लिए तत्काल और कारगर कदम उठाए जाएं। पेपर लीक में शामिल दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो और भर्ती परीक्षाओं को पारदर्शी बनाया जाए ताकि युवाओं का विश्वास बहाल हो सके।
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संवाद से मजबूत होगा लोकतंत्र
मौलाना जावेद हैदर ज़ैदी ने अंत में कहा कि लोकतंत्र की असली ताकत जनता का विश्वास होती है। संवाद, संवैधानिक मूल्य और पारदर्शिता — इन्हीं तीन आधारों पर लोकतांत्रिक व्यवस्था टिकी होती है। दमनात्मक उपाय कभी स्थायी समाधान नहीं देते।
मौलाना ज़ैदी ने कहा कि देश का भविष्य युवाओं के हाथों में है। छात्रों की आवाज सुनने से लोकतंत्र और मजबूत होगा। जब सरकारें विरोध की आवाज को जबरन दबाती हैं तो आम जनता का भरोसा संस्थाओं से हटने लगता है।
उन्होंने कहा — “लोकतंत्र में सत्ता की सबसे बड़ी ताकत जनता का विश्वास होता है। सरकार को चाहिए कि वह छात्रों की आवाज सुने, संवाद का रास्ता अपनाए और शिक्षा व्यवस्था में आवश्यक सुधारों के लिए ठोस एवं पारदर्शी कदम उठाए। यही संविधान की भावना और राष्ट्रहित के अनुरूप है।”

