गाज़ीपुर, 4 सितंबर। गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर बना हुआ है और बाढ़ का पानी जनपद के कई इलाकों में परेशानी बढ़ा रहा है। शुक्रवार सुबह आठ बजे नदी का जलस्तर 63.660 मीटर दर्ज किया गया। जिला प्रशासन के अनुसार, फिलहाल जलस्तर स्थिर है। इसके बावजूद गंगा 63.105 मीटर के खतरे के निशान से 55.5 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। जिले की पांच तहसीलों के 25 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। निचले इलाकों में पानी फैलने से कई संपर्क मार्गों पर आवागमन प्रभावित हुआ है, जबकि खेतों में पानी भरने से फसलों को भी नुकसान पहुंचा है। मौजूदा जलस्तर वर्ष 2024 में दर्ज 63.670 मीटर के उच्चतम स्तर से महज एक सेंटीमीटर कम है।
गंगा के तेवर थमे, लेकिन खतरा बरकरार
जिला प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार गंगा का सामान्य जलस्तर 59.906 मीटर, चेतावनी स्तर 62.100 मीटर और खतरे का निशान 63.105 मीटर है, जबकि उच्च बाढ़ स्तर 65.220 मीटर निर्धारित है। मौजूदा जलस्तर इन निशानों को पार कर खतरे के निशान से काफी ऊपर बह रहा है।
गुरुवार को जलस्तर सुबह आठ बजे 63.480 मीटर, 11 बजे 63.510 मीटर और शाम पांच बजे 63.570 मीटर तक बढ़ा था। शुक्रवार सुबह यह 63.660 मीटर पर स्थिर हुआ, जो वर्ष 2025 के 64.690 मीटर के उच्चतम स्तर से 1.03 मीटर नीचे है। प्रशासन के अनुसार फिलहाल जलस्तर में तत्काल बढ़ोतरी दर्ज नहीं की गई है।
गांवों में पहुंचा पानी
बाढ़ का असर सदर, मुहम्मदाबाद, सेवराई, सैदपुर और जमानिया तहसील के गांवों में दर्ज किया गया है। रेवतीपुर क्षेत्र के निचले हिस्सों में पानी बढ़ने से लोगों की परेशानी बनी हुई है। हसनपुरा, नसीरपुर, रामपुर और वीरउपुर का जिला मुख्यालय से सड़क संपर्क प्रभावित हुआ है, जिसके चलते इन गांवों में नाव आवागमन का प्रमुख साधन बन गई है।
कृषि क्षेत्र पर भी बाढ़ का सीधा असर पड़ा है। आपदा विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 294.371 हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई है। अलग-अलग क्षेत्रों में धान, मक्का, बाजरा, तिल, चरी और सब्जियों की खेती पानी में डूबी है। गौरहट-तेतारपुर क्षेत्र में पानी भरने से ग्रामीणों को मुख्य सड़क तक पहुंचने के लिए अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है।
कर्मनाशा-गोमती का बढ़ा पानी
गंगा के साथ कर्मनाशा और गोमती नदियों का बढ़ा पानी भी परेशानी का कारण बना है। कर्मनाशा में पानी बढ़ने से देवढ़ी-दाउदपुर मार्ग प्रभावित हुआ है, जिससे बिहार की ओर आने-जाने वाले लोगों को दिक्कत हो रही है। नदी के आसपास के गांवों के निचले हिस्सों और खेतों में पानी पहुंच गया है।
खानपुर इलाके में गोमती के पानी ने भी कई गांवों को प्रभावित किया है। गौरहट और तेतारपुर के बीच मुख्य रास्ते पर जलभराव होने से ग्रामीणों का सामान्य आवागमन बाधित है। खेतों में कई दिनों से पानी जमा होने के कारण खरीफ और अन्य फसलों के नुकसान का खतरा बढ़ गया है।
शहर में भी पानी का दबाव
बाढ़ का असर अब नदी किनारे के गांवों तक सीमित नहीं रहा। गाज़ीपुर शहर के कुछ निचले हिस्सों में भी पानी पहुंचने लगा है, जिससे स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ गई है। शास्त्रीनगर के निचले क्षेत्र और लकड़ी टाल के आसपास जलभराव दर्ज किया गया है, वहीं नालों में पानी के बैकफ्लो से स्थिति बिगड़ने की आशंका बनी हुई है।
भांवरकोल क्षेत्र के कई गांवों के सिवान में पानी फैला है और कुछ स्थानों पर नाव से आवागमन कराया जा रहा है। रेवतीपुर-रामपुर मार्ग के हिस्सों में जलभराव से लोगों को दिक्कत हो रही है। प्रशासन ने तटवर्ती इलाकों की निगरानी बनाए रखी है और प्रभावित क्षेत्रों में सतर्कता बरती जा रही है।

