लखनऊ, 7 अगस्त। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के मौके पर राजधानी के जनभवन में शुक्रवार को एक खास आयोजन हुआ, जिसमें घुमंतू जनजाति समुदाय की महिलाओं को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की मौजूदगी में समरसता सेवा संस्थान और घुमंतू जनजाति परिषद के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुआ।
घुमंतू महिलाओं का सम्मान
समारोह में सिलाई और कढ़ाई का प्रशिक्षण पूरा कर चुकीं महिलाओं को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। राज्यपाल ने महिलाओं द्वारा तैयार किए गए उत्पादों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया और उनकी रचनात्मकता की तारीफ की। इस मौके पर उन्होंने महिलाओं को दस सिलाई मशीनें भी वितरित कीं। राज्यपाल ने महिलाओं से कहा कि जो भी हुनर उन्हें सिखाया जाए, उसे लगन के साथ सीखकर उसमें महारत हासिल करें।
राज्यपाल ने बताया कि घुमंतू समुदाय के पात्र लोगों को भूमि पट्टे, आवास और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं भी दी जा रही हैं। उन्होंने ऐसे वंचित लोगों की सूची तैयार करने पर जोर दिया जिन्हें अभी तक सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि ग्राम प्रधान इस तरह के पात्र लाभार्थियों की सूची बनाकर जिलाधिकारी और राज्यपाल कार्यालय को भेजें, ताकि उन्हें योजनाओं से जोड़ा जा सके।
कौशल प्रशिक्षण से रोजगार
राज्यपाल ने बताया कि प्रदेश के सभी राज्य विश्वविद्यालयों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने खाली पड़े शैक्षणिक भवनों और संसाधनों का उपयोग करते हुए कम से कम पांच सौ ऐसे युवाओं व व्यक्तियों के लिए कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाएं, जिन्होंने पढ़ाई बीच में छोड़ दी है लेकिन कोई हुनर सीखकर आगे बढ़ना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण पूरा होने के बाद इन युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने में भी मदद की जाएगी।
राज्यपाल ने घुमंतू समुदाय से अपील की कि वे कम से कम सौ ऐसे लोगों की सूची तैयार करें, जिन्हें किसी न किसी कौशल का प्रशिक्षण चाहिए। कार्यक्रम में समाज कल्याण राज्य मंत्री असीम अरुण, संस्थान के संस्थापक सुनील शर्मा, रीना सिंह, एमएलसी पवन कुमार सिंह तथा घुमंतू जनजाति परिषद अवध प्रांत के संगठन मंत्री राजेश पांडेय समेत कई लोग मौजूद रहे।
सुरक्षित भविष्य की सलाह
राज्यपाल ने कार्यक्रम में मौजूद बेटियों को असामाजिक तत्वों से दूर रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि बेटियों को अपने जीवन को सुरक्षित रखते हुए शिक्षा और भविष्य पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। राज्यपाल ने बताया कि कुछ बेटियां ऐसी भी हैं जिन्हें हालात की वजह से बालिका गृहों में रहना पड़ता है, और प्रदेश के विश्वविद्यालय इनके लिए शिक्षा, कौशल विकास, पाक-कला, स्वास्थ्य देखभाल तथा पोषण की दिशा में काम कर रहे हैं।
उन्होंने विशेष रूप से काशी के बालिका गृह का जिक्र करते हुए बताया कि वहां रहने वाली बेटियों को अलग-अलग क्षेत्रों में प्रशिक्षण देकर संस्थानों में रोजगार से जोड़ने का काम भी किया जा रहा है।

