लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को लखनऊ में ₹200 करोड़ से अधिक की लागत से निर्मित उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (UPSDMA) के नवीन मुख्यालय भवन का लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने हाल में खराब मौसम के कारण एक ही दिन में 111 लोगों की मौत पर गहरा दुख और नाराजगी व्यक्त की। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को अर्ली वार्निंग सिस्टम को तुरंत प्रभावी बनाने और आपसी समन्वय के साथ कार्य करने के कड़े निर्देश दिए। UPSDMA की वेबसाइट का भी शुभारंभ कर SDRF, PAC और अग्निशमन सेवा के उत्कृष्ट कर्मियों को सम्मानित किया।
यह भी पढ़ें: यूपी में 826 ब्लॉक प्रमुख बने प्रशासक — इतिहास में पहली बार तीनों एकसाथ बने
₹200 करोड़ का नया मुख्यालय
लखनऊ में ₹200 करोड़ से अधिक की लागत से निर्मित UPSDMA के नवीन मुख्यालय का लोकार्पण प्रदेश की आपदा प्रबंधन व्यवस्था को नई दिशा देगा। आधुनिक तकनीक, बेहतर समन्वय और त्वरित प्रतिक्रिया से सुसज्जित यह मुख्यालय प्रदेश की आपदा प्रबंधन क्षमता को और मजबूत बनाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा के प्रति पहले से सतर्कता, तैयारी और जागरूकता ही जन-धन की हानि को न्यूनतम स्तर तक ला सकती है। आपदा प्रबंधन को दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाना होगा। सोशल मीडिया, डिजिटल मीडिया और प्रिंट मीडिया के माध्यम से व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाए ताकि प्रत्येक नागरिक खुद भी आपदा से निपटने के लिए तैयार रहे।
111 मौतों पर जताई नाराजगी
मुख्यमंत्री ने खराब मौसम से एक ही दिन में 111 लोगों की जान जाने पर गहरा दुख जताया। लखनऊ, फतेहपुर, प्रयागराज, जौनपुर और आजमगढ़ में अचानक बदले मौसम से ये मौतें हुईं। उन्होंने कहा कि विभागों के बीच समन्वय बेहतर होता तो यह जनहानि कम हो सकती थी।
उन्होंने कहा कि आपदा आने के बाद राहत कार्य शुरू करना पर्याप्त नहीं है — पहले से तैयारी ही सबसे बड़ा बचाव है। स्कूल और घर दोनों जगह बच्चों को आग, बाढ़ और भूकंप जैसी आपदाओं से निपटने के तरीके सिखाए जाने चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले के दौर में परिवारों में यह ज्ञान पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ता था — उस परंपरा को फिर से जीवित करने की जरूरत है।
अर्ली वार्निंग सिस्टम होगा प्रभावी
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि अर्ली वार्निंग सिस्टम को तुरंत प्रभावी बनाया जाए। तकनीक के उपयोग से डेढ़-दो घंटे पहले ही किसी क्षेत्र में आकाशीय बिजली गिरने की जानकारी दी जा सकती है।
आकाशीय बिजली से बचाव के तरीके बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि घने काले बादल दिखने पर खुले स्थान या पेड़ के नीचे न खड़े हों। लोहे या धातु की वस्तु लेकर न चलें। पक्के भवन में शरण लेना सबसे सुरक्षित है। तकनीक के अभाव में भी 40 साल पहले लोग इन सावधानियों का पालन करते थे — यह परंपरा फिर से जीवित करनी होगी।
आपदा मित्र को मिलेगी प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने प्रशिक्षण पर विशेष जोर देते हुए कहा कि 45 हजार होमगार्ड की भर्ती प्रक्रिया पूरी की जा रही है। प्रशिक्षित आपदा मित्रों को इस भर्ती में प्राथमिकता दी जाएगी। होमगार्ड को भी आपदा मित्र का प्रशिक्षण अनिवार्य रूप से दिया जाएगा क्योंकि ये फर्स्ट रिस्पांडर होते हैं।
सरकार इन्हें ₹5 लाख की कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा प्रदान करती है। घटना या दुर्घटना होने पर परिजनों को ₹35-40 लाख तथा मुख्यमंत्री राहत कोष से ₹5 लाख अतिरिक्त सहायता दी जाती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ये सुविधाएं इन कर्मियों पर बोझ नहीं बल्कि समाज सेवा के बेहतर उपयोग का अवसर हैं।
यह भी पढ़ें: वांगचुक के समर्थन में युवाओं का प्रदर्शन — SDM को सौंपा खून से लिखा ज्ञापन
यूपी पहला राज्य बना
मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य है जिसने मानव-वन्यजीव द्वंद्व को भी आपदा की श्रेणी में शामिल किया है। प्रभावित लोगों को राहत और सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।
मुख्यमंत्री ने संकल्प जताया कि उत्तर प्रदेश को ऐसा राज्य बनाया जाए जहां प्रत्येक नागरिक यह विश्वास लेकर जीवन जिए कि संकट की घड़ी में सरकार के साथ-साथ वह स्वयं भी आपदा से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। इस अवसर पर SDRF, PAC और अग्निशमन सेवा के उत्कृष्ट कर्मियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।



