लखनऊ। योगी सरकार ने रविवार दोपहर 2 बजे प्रदेश के 826 ब्लॉक प्रमुखों को प्रशासक नियुक्त करने का आदेश जारी कर दिया। 19 जुलाई को ब्लॉक प्रमुखों का पांच वर्षीय कार्यकाल समाप्त होने से पहले ही सरकार ने यह फैसला ले लिया। उत्तर प्रदेश के इतिहास में यह पहली बार है जब जिला पंचायत अध्यक्ष, ब्लॉक प्रमुख और ग्राम प्रधान — तीनों को एकसाथ प्रशासक बनाया गया है। सामान्यतः कार्यकाल समाप्त होने के बाद खंड विकास अधिकारी (BDO) को प्रशासक बनाया जाता है लेकिन इस बार सरकार ने ब्लॉक प्रमुखों को ही यह जिम्मेदारी सौंपी है।
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826 ब्लॉक प्रमुख बने प्रशासक
योगी सरकार ने 11 जुलाई को प्रदेश के 75 जिला पंचायत अध्यक्षों को प्रशासक बनाया था। 25 मई को 57 हजार से अधिक ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त करने का आदेश जारी किया था हालांकि वह मामला हाईकोर्ट में लंबित है। अब 826 ब्लॉक प्रमुखों को भी प्रशासक बना दिया गया है।
शासनादेश के अनुसार यह व्यवस्था आगामी पंचायत चुनाव होने तक या अधिकतम छह माह तक — जो भी पहले हो — लागू रहेगी। संबंधित जिलाधिकारी/जिला मजिस्ट्रेट को ब्लॉक प्रमुखों को प्रशासक के रूप में नामित करने का अधिकार दिया गया है।
यूपी में पहली बार तीनों एकसाथ
UP के इतिहास में यह पहला अवसर है जब तीनों स्तरों — ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत — के निर्वाचित प्रतिनिधियों को एकसाथ प्रशासक नियुक्त किया गया है।
राजनीतिक विश्लेषक वीरेंद्र नाथ भट्ट के अनुसार इस फैसले का फायदा BJP के साथ ब्लॉक प्रमुखों को भी होगा। पंचायत चुनाव में देरी के कारण मौजूदा ब्लॉक प्रमुखों में पावर छिनने का डर था जिसे सरकार ने इस आदेश से दूर कर दिया। अधिकांश ब्लॉक प्रमुख अगले साल होने वाले पंचायत चुनाव में खुद या अपने परिजन को ब्लॉक प्रमुख बनाना चाहते हैं। प्रशासक के रूप में उन्हें BDC सदस्यों के दखल के बिना काम करने का अतिरिक्त समय मिलेगा।
प्रशासक के रूप में ब्लॉक प्रमुख कोई बड़ा नीतिगत फैसला नहीं ले पाएंगे लेकिन सामान्य रूटीन काम निपटाते रहेंगे। किसी भी नीतिगत मामले से संबंधित प्रस्ताव DM के माध्यम से शासन को भेजा जाएगा। शासन स्तर पर ही अंतिम मुहर लगेगी।
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हाईकोर्ट में मामला लंबित
26 जून को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने UP में पंचायत चुनाव टालने पर कड़ी नाराजगी जताई थी। ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने को चुनौती देने वाली याचिका पर जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की बेंच ने सरकार से पूछा था कि प्रधानों को प्रशासक कैसे बनाया। कोर्ट ने इसे डिविजन बेंच के आदेश का उल्लंघन और अदालत की अवमानना की कैटेगरी में रखा।
हाईकोर्ट ने पंचायत चुनाव टालने को असंवैधानिक बताते हुए सरकार से OBC रिपोर्ट और पंचायत चुनाव कराने की टाइमलाइन मांगी है। सहारनपुर के अरविंद राठौर ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। कोर्ट ने कहा था कि यदि सरकार संतोषजनक जवाब नहीं देती तो संबंधित अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा। हालांकि कोर्ट ने अभी किसी अंतरिम रोक का आदेश नहीं दिया है।



