लखनऊ। राम मंदिर चढ़ावा गबन मामले की जांच कर रही SIT के सामने गुरुवार को आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह पेश हुए। SIT प्रमुख विजय विश्वास पंत को उन्होंने अयोध्या में जमीन खरीद से जुड़े घोटाले के दस्तावेज सौंपे। संजय सिंह ने मीडिया से बात करते हुए दावा किया कि अयोध्या में ₹4 करोड़ की जमीन कुछ ही दिनों में ₹8 करोड़ में खरीदी गई और इसमें राम मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों से जुड़े लोग शामिल हैं। इसी बीच एक और खुलासा हुआ — ट्रस्ट गठन के कुछ महीनों बाद ही एक निजी ऑडिट फर्म ने वित्तीय व्यवस्था में गंभीर खामियां पाई थीं लेकिन उन पर ध्यान नहीं दिया गया।
यह भी पढ़ें: राम मंदिर चढ़ावा गबन में संजय सिंह को समन
संजय सिंह का बड़ा दावा
SIT के सामने पेश होने के बाद संजय सिंह ने सार्वजनिक रूप से कहा कि अयोध्या में भगवान श्रीराम के नाम पर महाघोटाला हुआ है। उनका आरोप है कि जमीन खरीद में दाम कुछ ही दिनों में दोगुने हो गए और यह सब राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े लोगों की मिलीभगत से संभव हुआ। उन्होंने कहा — “जमीन खरीद के नाम पर ट्रस्ट ने करोड़ों का घोटाला किया। मैंने सारे दस्तावेज SIT को सौंप दिए हैं।”
संजय सिंह के अनुसार SIT ने दस्तावेज लेकर कार्रवाई का भरोसा दिलाया है। उन्होंने कहा कि अब देखना है कि इन सबूतों पर क्या कदम उठाए जाते हैं। यह मामला सिर्फ चढ़ावे की चोरी तक सीमित नहीं रहा — जमीन खरीद में भी अनियमितता के आरोप अब जांच के दायरे में हैं।
2020 में ही ऑडिट फर्म ने दी थी चेतावनी
इस पूरे प्रकरण में एक और तथ्य सामने आया है जो ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। 2020 में ट्रस्ट के गठन के कुछ महीनों बाद ही एक निजी ऑडिट फर्म ने अपनी रिपोर्ट में दान प्रबंधन, आभूषणों के रिकॉर्ड, वित्तीय निगरानी और प्रशासनिक व्यवस्था में गंभीर खामियां चिन्हित की थीं। सूत्रों के अनुसार फर्म ने साफ कहा था कि वित्तीय रिपोर्टिंग के लिए जरूरी अभिलेखों का अभाव है और जवाबदेही तय करने वाली प्रशासनिक व्यवस्था भी नहीं है।
फर्म ने लेन-देन, डेटा प्रबंधन, मानव संसाधन और रिकॉर्ड संधारण के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) लागू करने की सिफारिश की थी। सबसे गंभीर टिप्पणी दान और आभूषणों के रिकॉर्ड को लेकर थी — नकदी के अलावा प्राप्त दान के लिए स्टॉक रजिस्टर और निगरानी तंत्र की कमी पाई गई। बैंक समन्वयन के लिए प्रशिक्षित कर्मियों का अभाव और डेटा सुरक्षा के लिए पर्याप्त नियंत्रण तंत्र न होने पर भी फर्म ने चिंता जताई थी।
यह भी पढ़ें: राम मंदिर चढ़ावा गबन SIT प्रारंभिक रिपोर्ट
ट्रस्ट को पता था — फिर भी अनदेखी
इस ऑडिट रिपोर्ट की सबसे बड़ी अहमियत यह है कि ट्रस्ट को उसकी खामियों की जानकारी छह साल पहले ही दे दी गई थी। इसके बावजूद न SOP लागू की गई, न वित्तीय निगरानी मजबूत हुई। अब जब SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट में भी चढ़ावे और वित्तीय प्रबंधन से जुड़े सवाल उठे हैं तो यह पुरानी ऑडिट रिपोर्ट जांच का अहम आधार बन सकती है।
संजय सिंह के जमीन घोटाले के दावे और इस ऑडिट रिपोर्ट के खुलासे — दोनों मिलकर राम मंदिर ट्रस्ट की पारदर्शिता और जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े करते हैं। SIT के हाथ अब दो अलग-अलग मोर्चों पर काम करना है — एक तरफ चढ़ावा गबन, दूसरी तरफ जमीन खरीद में अनियमितता। जांच के निष्कर्ष जो भी हों, अयोध्या में राम मंदिर से जुड़ा यह विवाद राजनीतिक और धार्मिक दोनों स्तरों पर गहरा असर डाल रहा है।



