लखनऊ, 7 अगस्त। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को लखनऊ में आयोजित राष्ट्रीय हथकरघा दिवस समारोह में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने बुनकरों और हस्तशिल्पियों को सम्मानित करने के साथ-साथ प्रदेश सरकार की कई योजनाओं का लाभ भी वितरित किया।
सीएम का विपक्ष पर निशाना
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सपा मुखिया अखिलेश यादव पर तंज कसते हुए कहा, “कुछ लोग जीवन भर बच्चे ही बने रहते हैं। बबुआ भी यही करते थे।” मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि बबुआ दोपहर 12 बजे सोकर उठते थे, दो बजे तैयार होते थे, पांच बजते-बजते जिम जाने का समय हो जाता था और शाम सात बजे महफिल सज जाती थी, जिसके चलते देश-प्रदेश के बारे में सोचने का समय ही नहीं मिलता था।
बुनकरों को मिले पुरस्कार
लखनऊ में आयोजित इस समारोह में उत्कृष्ट बुनकरों को संत कबीर राज्य स्तरीय हथकरघा पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसके साथ ही मुख्यमंत्री हैंडलूम एवं पावरलूम उद्योग विकास योजना तथा झलकारी बाई कोरी हथकरघा एवं पावरलूम विकास योजना के लाभार्थियों को चेक भी वितरित किए गए। कार्यक्रम में हथकरघा उत्पादों के प्रमुख क्रेताओं के साथ एमओयू का आदान-प्रदान भी हुआ। मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले साल 40 हजार से अधिक हस्तशिल्पियों को 109 करोड़ रुपये की विद्युत अनुदान सुविधा उपलब्ध कराई गई थी।
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हथकरघा उद्योग को मिल रही मजबूती
मुख्यमंत्री ने बताया कि भदोही में भारत सरकार के सहयोग से कारपेट एक्सपो मार्ट का निर्माण कराया गया है, वहीं वाराणसी में ट्रेड फैसिलिटेशन सेंटर की स्थापना से स्थानीय उत्पादों और सिल्क क्लस्टर को वैश्विक पहचान मिल रही है। उन्होंने बताया कि वाराणसी के फैसिलिटेशन सेंटर से जुड़े करीब 450 छात्रों को पिछले साल स्कॉलरशिप दी गई, जिसमें उन्हें डिजाइनिंग, तकनीक और पैकेजिंग का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
लखनऊ में एक हजार एकड़ में पीएम मित्र पार्क की स्थापना की जा रही है, जिससे टेक्सटाइल उद्योग को मजबूती मिलेगी। इसके साथ ही संत कबीर के नाम पर प्रदेश में पांच स्थानों पर टेक्सटाइल पार्क बनाने का काम भी आगे बढ़ाया जा रहा है। मुख्यमंत्री के अनुसार प्रदेश में हथकरघा उद्योग से जुड़े परिवारों की संख्या करीब ढाई लाख है, जबकि पावरलूम को जोड़ने पर यह आंकड़ा 30 लाख से अधिक लोगों तक पहुंचता है।
लखनऊ की चिकनकारी सहित प्रदेश के कई क्षेत्रों की हस्तकला को लेकर भी मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में चर्चा की। उन्होंने कहा कि बाराबंकी, अंबेडकरनगर, संत कबीर नगर, गोरखपुर, मऊ, आजमगढ़, वाराणसी, भदोही और मिर्जापुर जैसे क्षेत्र अपने हस्तशिल्प उत्पादों के लिए वैश्विक स्तर पर पहचान बना चुके हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार भदोही का कालीन क्लस्टर अब सैकड़ों करोड़ रुपये का निर्यात कर रहा है।
उन्होंने बताया कि पहले हस्तशिल्पियों की भट्टियां कोयले और केरोसिन से चलती थीं, जिससे प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्रवाई का सामना करना पड़ता था। अब उन्हें पीएनजी और बिजली कनेक्शन की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। मुख्यमंत्री ने मेरठ का भी जिक्र करते हुए बताया कि यह अब खेल उत्पादों के निर्माण का प्रमुख केंद्र बन चुका है। मुख्यमंत्री ने यह भी दावा किया कि इस क्षेत्र में काम करने वालों में महिलाओं की भागीदारी 70 प्रतिशत से ज्यादा है, जो इसे रोजगार के लिहाज से खास बनाता है।
स्वदेशी आंदोलन से जुड़ा है यह दिवस
मुख्यमंत्री ने बताया कि सात अगस्त 1905 को भारत की आजादी के आंदोलन में स्वदेशी आंदोलन की शुरुआत हुई थी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने भी खादी और स्वदेशी को आजादी के आंदोलन का प्रमुख हथियार बनाया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2015 से सात अगस्त को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के रूप में मनाना शुरू किया।
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि नई संसद भवन में भदोही की कालीन का इस्तेमाल किया गया है। उन्होंने कहा कि आज प्रदेश में 96 लाख एमएसएमई इकाइयां काम कर रही हैं और पंजीकृत इकाइयों को प्रतिवर्ष पांच लाख रुपये का सुरक्षा बीमा कवर भी दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने हस्तशिल्पियों और व्यापारियों के बीच के पारंपरिक भरोसे के रिश्ते का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि चिकनकारी उद्योग में शुरुआत में कोई नकद भुगतान नहीं होता, कारीगर पहले व्यापारी से मिला कच्चा माल तैयार कर उसे सौंपता है, और हिसाब-किताब का निपटारा काफी समय बाद, तय तारीख पर होता है।


