लखनऊ/अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावा गबन मामले की जांच अब निर्णायक मोड़ पर है। प्रारंभिक रिपोर्ट अपर मुख्य सचिव को सौंपने के बाद SIT गुरुवार को अयोध्या पहुंचकर आरोप लगाने वाले पक्षों से पूछताछ शुरू कर सकती है। सूत्रों के अनुसार जांच टीम ने आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह को गुरुवार को अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया है। इसी बीच विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने अयोध्या में 25 से 29 जून के बीच प्रस्तावित अपनी पांच दिवसीय केंद्रीय बैठक को फिलहाल स्थगित कर दिया है। इस मामले की गूंज अब धार्मिक और राजनीतिक दोनों हलकों में गहरी होती जा रही है।
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SIT की पूछताछ शुरू
SIT की जांच अब दूसरे चरण में प्रवेश कर रही है। पहले चरण में दस्तावेज, CCTV फुटेज और गवाहियां जुटाई गईं। अब जांच टीम उन सभी व्यक्तियों और संगठनों के प्रतिनिधियों के बयान दर्ज करने की तैयारी में है जिन्होंने सार्वजनिक रूप से राम मंदिर की दानराशि, चढ़ावे की गिनती और वित्तीय प्रबंधन को लेकर सवाल उठाए थे।
बुधवार को अयोध्या में पूरे दिन यह चर्चा रही कि SIT किसी भी समय पहुंच सकती है। प्रशासनिक अधिकारियों और विभिन्न पक्षों के प्रतिनिधियों ने संभावित पूछताछ को लेकर तैयारियां शुरू कर दीं। सूत्रों के मुताबिक प्रारंभिक पूछताछ में मिले तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर आगे की जांच की दिशा तय होगी।
जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है। यदि किसी स्तर पर अनियमितता साबित होती है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी बनती है — यही SIT तय करेगी। पहले चरण में आरोप लगाने वाले पक्षों से तथ्य जुटाए जाएंगे। इसके बाद मंदिर ट्रस्ट, संबंधित कर्मचारियों और व्यवस्थाओं से जुड़े लोगों से पूछताछ कर आरोपों का सत्यापन किया जाएगा।
VHP की बैठक टली
राम मंदिर चढ़ावा गबन मामले की आंच अब विश्व हिंदू परिषद तक पहुंच गई है। अयोध्या में 25 से 29 जून तक प्रस्तावित VHP की केंद्रीय प्रबंध समिति और प्रन्यासी मंडल की पांच दिवसीय बैठक को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। VHP की ओर से इसके पीछे अपरिहार्य कारण बताए गए हैं और जल्द नई तिथि घोषित करने का संकेत दिया गया है।
सूत्रों के मुताबिक इस बैठक में चढ़ावा चोरी प्रकरण पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना थी। कुछ संतों और पदाधिकारियों की ओर से तीखे सवाल उठाए जा सकते थे जिससे बैठक में हंगामे की स्थिति बन सकती थी। हरिद्वार में हाल ही में हुई VHP के मार्गदर्शक मंडल और उच्चाधिकार समिति की बैठक में भी यह मुद्दा प्रमुख रहा। वहां शामिल संतों ने कहा कि रामलला के नाम पर मिली दानराशि का हर पैसा श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा है और उसकी पूरी जवाबदेही सुनिश्चित होनी चाहिए। संतों ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के खातों की स्वतंत्र जांच की मांग भी उठाई।
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संतों ने कहा — जांच पूरी होने दो
इस पूरे विवाद के बीच राम जन्मभूमि परिसर स्थित शेषावतार मंदिर में ध्वजारोहण समारोह हुआ जिसमें रामनगरी के अनेक प्रमुख संत-महंत मौजूद रहे। इस अवसर पर राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा और गोपाल राव सहित ट्रस्ट से जुड़े कई पदाधिकारी भी उपस्थित रहे।
समारोह में शामिल संतों ने जांच प्रक्रिया पर भरोसा जताते हुए कहा कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले अंतिम रिपोर्ट का इंतजार किया जाना चाहिए। जगद्गुरु रामदिनेशाचार्य ने कहा कि बिना पूरी जांच के किसी व्यक्ति या संस्था को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा — “सत्य को सामने आने में समय लग सकता है, लेकिन वह कभी छिप नहीं सकता।”
श्रीराम बल्लभाकुंज के अधिकारी राजकुमार दास ने कहा कि SIT ने रिपोर्ट शासन को सौंप दी है और अंतिम निष्कर्ष आने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट होगी। उन्होंने लोगों से अफवाहों से दूर रहने की अपील की। महंत गिरीश दास ने कहा कि राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है और इससे जुड़े किसी भी विषय पर तथ्यों के आधार पर ही राय बनाई जानी चाहिए। SIT की जांच के निष्कर्ष आने वाले दिनों में मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर व्यापक असर डाल सकते हैं।

