गाज़ीपुर। अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे में कथित अनियमितता पर गाज़ीपुर सांसद अफजाल अंसारी ने सोमवार को राइफल क्लब सभागार में खुलकर बात की। उन्होंने चढ़ावे में कथित अनियमितता को करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था पर हमला बताया और SIT जांच पर सवाल उठाते हुए चारों शंकराचार्यों से जांच कराने की मांग की। इस मौके पर पूर्व मंत्री एवं जमानियां विधायक ओमप्रकाश सिंह और विधायक डॉ. वीरेंद्र यादव भी उपस्थित रहे।
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अखिलेश सही साबित हुए
सांसद ने कहा कि जब सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने राम मंदिर चढ़ावे में गड़बड़ी का मुद्दा पहली बार उठाया था, तब उनकी बात को कई लोगों ने स्वीकार नहीं किया था। लेकिन अब जो सच सामने आ रहा है, वह अखिलेश यादव के उस बयान को सही ठहराता है।
उन्होंने कहा कि इतिहास में महमूद गज़नवी का नाम लुटेरे के रूप में दर्ज है जिसने सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण कर वहां का चढ़ावा लूटा था। 1200 साल बाद भी उसे उसी नाम से याद किया जाता है। अंसारी ने कहा कि भगवान राम के मंदिर के चढ़ावे में जो कथित हेराफेरी हुई है, वह उसी मानसिकता का काम लगता है।
सांसद ने यह भी कहा कि श्रद्धालु अपनी आस्था और भावना के साथ दान करते हैं — उनकी यही इच्छा होती है कि उनका अर्पण सीधे भगवान के चरणों तक पहुंचे। जब इसी चढ़ावे में गड़बड़ी की खबरें आती हैं तो यह सिर्फ आर्थिक नुकसान नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की भावनाओं पर सीधी चोट है। उन्होंने कहा कि मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मंदिर में चढ़ावे की राशि में पहले की तुलना में गिरावट आई है।
उन्होंने चंपत राय का नाम लेते हुए कहा कि वह और उनकी पूरी टीम मामले को छिपाने की कोशिश में लगी है। उन्होंने यह भी कहा कि भगवान के दरबार से जुड़ा विषय है और इसका परिणाम बहुत गंभीर होगा — इसमें कोई नहीं बचेगा।
शंकराचार्यों से जांच कराने की मांग
सांसद ने राम मंदिर चढ़ावे की जांच के लिए गठित SIT को नाटक करार दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब FIR ही दर्ज नहीं हुई तो जांच किस आधार पर हो रही है। उनकी मांग थी कि यह मामला चारों शंकराचार्यों को सौंपा जाए। साथ ही उन्होंने कहा कि आदि शंकराचार्य ने सनातन धर्म के लिए जो चार पीठें स्थापित की थीं, उनके शंकराचार्य धर्म के सर्वोच्च और पवित्र पद पर बैठे हैं — वे निष्पक्ष जांच कर सकते हैं और उनकी रिपोर्ट पर देश भरोसा करेगा।
सांसद ने यह भी कहा कि राम मंदिर निर्माण का श्रेय लेने वाले अब इस चोरी की बदनामी से नहीं बच सकते। उनके मुताबिक जो लोग यह सोच रहे हैं कि उनका कोई हिसाब नहीं होगा, वे गलत हैं — इस पाप का हिसाब इसी दुनिया में होगा।
इस मौके पर मौजूद जमानियां विधायक ओमप्रकाश सिंह ने भी सवाल उठाया कि बिना FIR के SIT जांच कैसे वैध हो सकती है।
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न रसीद दी, न हिसाब दिखाया
सांसद ने दावा किया कि कई श्रद्धालुओं ने मंदिर में मणि-जड़ित आभूषण, चरण पादुका और अन्य मूल्यवान वस्तुएं भेंट की थीं। लेकिन न तो उन्हें कोई रसीद दी गई और न ही इन वस्तुओं का कोई सार्वजनिक हिसाब सामने आया। उन्होंने कहा कि यह पारदर्शिता की घोर कमी है।
यह मामला किसी लीपापोती से दबने वाला नहीं है। सांसद ने कहा कि यदि जांच निष्पक्ष हुई तो कई बड़े नाम सामने आ सकते हैं और भगवान के दरबार का हिसाब इसी दुनिया में होगा — जो भी इसमें शामिल हैं, उन्हें परिणाम भुगतना पड़ेगा।



