लखनऊ। राजधानी के अलीगंज क्षेत्र में सोमवार दोपहर एक व्यावसायिक इमारत में लगी आग ने 15 छात्रों की जान ले ली। इनमें से कुछ कोचिंग में पढ़ने आए थे, बाकी एनिमेशन और कंप्यूटर कोर्स कर रहे थे। 9 अन्य छात्रों ने जान बचाने की कोशिश में ऊपरी मंजिल से छलांग लगाई और गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद मुख्यमंत्री स्तर पर तत्काल कार्रवाई हुई — SIT गठित हुई, चार अधिकारी निलंबित किए गए और चार आरोपियों को रात में ही गिरफ्तार कर लिया गया। मंगलवार को फोरेंसिक टीम ने पूरी इमारत सील करके साक्ष्य जुटाने का काम शुरू किया।
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गोदाम से उठी आग, फंसे छात्र
पुरनिया चौकी क्षेत्र में स्थित इस बहुमंजिला इमारत में हर मंजिल का अलग-अलग उपयोग था। भूतल पर पालतू जानवरों की दुकान थी, जबकि पहली मंजिल पर उसी दुकान मालिक का गोदाम था। दूसरी और ऊपरी मंजिलों पर थ्री-डी एनिमेशन ट्रेनिंग सेंटर, गेमिंग जोन और बारहवीं तक के छात्रों की कोचिंग संचालित होती थी।
सोमवार दोपहर करीब ढाई बजे अचानक गोदाम में आग भड़की। प्रारंभिक जांच में एसी के कंप्रेसर में विस्फोट और शॉर्ट सर्किट को संभावित कारण बताया जा रहा है, लेकिन अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है — फोरेंसिक जांच पूरी होने पर ही असल कारण स्पष्ट होगा। मिनटों में आग ऊपरी मंजिलों तक पहुंच गई और धुएं तथा लपटों के बीच छात्र चारों तरफ से घिर गए। इमारत में आपातकालीन निकास की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी, जिससे बाहर निकलने का रास्ता बंद हो गया।
दमकल, पुलिस और एसडीआरएफ की टीमें घटनास्थल पर पहुंचीं, लेकिन आग की भीषणता के कारण भवन के भीतर पहुंचना बेहद मुश्किल था। करीब दो घंटे के बचाव अभियान में 15 शव बाहर निकाले गए। झुलसे कई छात्र विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं और उनमें से कुछ की हालत अभी भी नाजुक है।
SIT गठित, चार गिरफ्तार
घटना की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अलीगढ़ में जारी एक जनसभा अधूरी छोड़कर लखनऊ लौटे और घटनास्थल का खुद मुआयना किया। उनके निर्देश पर उसी रात उच्चस्तरीय बैठक हुई जिसमें दोषियों की शिनाख्त के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित करने का आदेश दिया गया। SIT में संस्कृति विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात और लखनऊ के एडीजी जोन प्रवीण कुमार को शामिल किया गया है। यह दल सात दिन के भीतर रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपेगा।
रक्षामंत्री और लखनऊ के सांसद राजनाथ सिंह भी घटनास्थल पहुंचे। अलीगंज थाने में छह लोगों के खिलाफ नामजद FIR दर्ज की गई है — BNS की विभिन्न धाराओं के साथ उत्तर प्रदेश अग्निशमन सेवा अधिनियम की धारा 6/10 के तहत। सोमवार रात चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया — इमारत मालिक वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला (मदेयगंज), पालतू जानवरों की दुकान के मालिक रामकृष्ण उपाध्याय (अलीगंज), एनिमेशन सेंटर संचालक तूशॉक कृष्णा जायसवाल (बालागंज) और किरायेदार सुरेश कुमार शाहू (केशवनगर, मड़ियांव)। FIR में नामजद धीरेंद्र शुक्ला और सुरेंद्र शुक्ला अभी फरार हैं, उनकी तलाश जारी है।
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निलंबन और फोरेंसिक जांच
निर्माण अनुमति, बिजली निरीक्षण और अग्नि सुरक्षा जांच — तीनों स्तरों पर हुई चूक की जिम्मेदारी तय करते हुए चार सरकारी अधिकारियों को तत्काल निलंबित किया गया। इनमें जानकीपुरम बिजली विभाग के एक्सईएन गौरव कुमार, इंदिरा नगर अग्निशमन विभाग के एफएसएसओ कमलेंद्र कुमार सिंह, लखनऊ विकास प्राधिकरण के सहायक अभियंता अनिल कुमार और अवर अभियंता प्रमोद पांडे शामिल हैं। लखनऊ विकास प्राधिकरण ने आंतरिक जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति गठित की है — इसकी रिपोर्ट आने के बाद अन्य अधिकारियों पर भी कार्रवाई हो सकती है।
SIT और फोरेंसिक टीम ने मिलकर जांच में यह तय करने का काम शुरू किया कि इमारत को कितनी मंजिलों तक निर्माण की अनुमति थी, अग्नि सुरक्षा एनओसी लिया गया था या नहीं और बिजली भार के निरीक्षण में कहां चूक हुई। यह हादसा उस लापरवाही का नतीजा है जो नियमों की अनदेखी के साथ बरसों से पलती रही — सात दिन में आने वाली SIT रिपोर्ट में पूरी जिम्मेदारी तय होगी।


