लखनऊ। अलीगंज अग्निकांड में 15 छात्रों और कामकाजी लोगों की मौत के बाद समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गहरा दुख जताया और शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। वहीं लखनऊ के संयुक्त पुलिस आयुक्त बबलू कुमार ने बताया कि इमारत मालिक और प्रतिष्ठान संचालकों समेत चारों गिरफ्तार आरोपियों को जेल भेजा जा रहा है और जांच में दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
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बच्चे को खोना सबसे बड़ा दुख
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इस हादसे को दिल तोड़ने वाली घटना बताया। उन्होंने कहा कि कोचिंग पढ़ने, नौकरी करने और काम के सिलसिले में उस इमारत में गए इतने लोगों की जान इस तरह जाना बेहद पीड़ादायक है। उनके मुताबिक आग लगने के बाद छात्र अपने माता-पिता और परिजनों को फोन कर रहे थे — कुछ दमकल को बुलाने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन समय पर मदद नहीं पहुंच सकी।
“सभी दुखों में शायद सबसे बड़ा दुख अपने बच्चे को खोना है” — अखिलेश यादव ने पीड़ित परिवारों के दर्द को शब्दों में बयां करना मुश्किल बताया। जो माता-पिता अपने बच्चों को पढ़ने और आगे बढ़ने के लिए उस इमारत में भेज रहे थे, उन्हें इस खबर ने तोड़ दिया। उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना जताई।
पूछताछ के बाद जेल रवाना
संयुक्त पुलिस आयुक्त बबलू कुमार ने बताया कि इस अग्निकांड में 15 लोगों की मौत हुई है। घटना की गंभीरता को देखते हुए इमारत मालिक और उसमें संचालित प्रतिष्ठानों के मालिकों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर पूछताछ की गई और अब उन्हें जेल भेजा जा रहा है।
बबलू कुमार ने स्पष्ट किया कि जांच में हर पक्ष की बारीकी से पड़ताल की जा रही है। तथ्य एकत्र किए जा रहे हैं और जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा उस पर कठोर कानूनी कार्रवाई होगी — चाहे उसकी भूमिका कितनी भी छोटी क्यों न हो।
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जांच जारी, कारण अभी अस्पष्ट
बबलू कुमार के मुताबिक आग लगने के सटीक कारणों की जांच अभी जारी है। पुलिस टीम घटना के हर पहलू की विवेचना कर रही है और साक्ष्य एकत्र किए जा रहे हैं। आधिकारिक तौर पर अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि आग की शुरुआत किस वजह से हुई — जांच पूरी होने के बाद ही सटीक कारण सामने आएगा। विवेचना में जो भी तथ्य उभरेंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
यह हादसा केवल एक इमारत में लगी आग नहीं है — यह उन परिवारों की अधूरी उम्मीदों का दर्द है जिन्होंने अपने बच्चों को पढ़ने और आगे बढ़ने के सपने के साथ वहां भेजा था। अब जवाबदेही तय करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।


