लखनऊ। सोमवार की दोपहर राजधानी के अलीगंज इलाके में एक व्यावसायिक इमारत में लगी आग ने 15 जिंदगियां निगल लीं। इनमें कोचिंग पढ़ने और एनिमेशन कोर्स करने वाले युवा शामिल थे। धुएं और लपटों के बीच फंसे कई बच्चों ने ऊपरी मंजिल से छलांग लगाई — एक बच्चे की छलांग इतनी दर्दनाक रही कि नीचे लगी ग्रिल की सरिया उसके पेट में धंस गई। इमारत अवैध थी, निकलने का दूसरा रास्ता नहीं था और दमकल 40 मिनट देरी से पहुंची — यही तीन कारण मिलकर इस हादसे को और भीषण बना गए।
वेयरहाउस से उठी आग, पूरी बिल्डिंग चपेट में
पुलिस के मुताबिक दोपहर करीब ढाई बजे पुरनिया इलाके की इस तीन मंजिला इमारत की पहली मंजिल पर बने वेयरहाउस में आग भड़की। ग्राउंड फ्लोर पर पेट शॉप थी और उसी मालिक ने पहली मंजिल पर वेयरहाउस बना रखा था। दूसरी मंजिल पर 3D एनिमेशन कोर्स और 12वीं तक की कोचिंग चलती थी। आग ने चंद मिनटों में पूरी इमारत को अपनी लपेट में ले लिया।
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ऊपरी मंजिलों पर बैठे बच्चों को बाहर निकलने का मौका नहीं मिला। इमारत के तीनों तरफ दूसरी इमारतें थीं — न आपातकालीन निकास था, न कोई वैकल्पिक रास्ता। यह इमारत अवैध थी और इसी वजह से वहां फंसे लोगों के लिए बाहर निकलना लगभग नामुमकिन हो गया। पांच-छह लोग किसी तरह खिड़की का शीशा तोड़कर बाहर निकले। बाकी भीतर ही घिरते गए।
बाहर खड़े लोग बेबस थे। ऊपर से बच्चों की चीख-पुकार सुनाई दे रही थी लेकिन घना धुआं किसी को अंदर जाने नहीं दे रहा था। इस बीच एक के बाद एक चार-पांच बच्चों ने छलांग लगाई। एक बच्चा नीचे लगी ग्रिल पर जा गिरा और उसकी सरिया पेट में धंस गई। सभी घायलों को ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया।
करीब दो घंटे चले रेस्क्यू अभियान में पुलिस, दमकल और SDRF की टीमों ने मिलकर 15 शव बाहर निकाले। आसपास के लोगों में आक्रोश था कि हादसे के करीब 40 मिनट बाद दमकल पहुंची। तब तक आग पूरी इमारत को खाक कर चुकी थी। राजधानी में दमकल के इतनी देरी से पहुंचने पर सवाल उठने लगे हैं।
CM योगी लौटे, बड़े अधिकारी मौके पर
हादसे के वक्त मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अलीगढ़ में जनसभा को संबोधित कर रहे थे। सूचना मिलते ही उन्होंने कार्यक्रम बीच में छोड़ा और सीधे लखनऊ लौट आए। उनके निर्देश पर प्रमुख सचिव (गृह) संजय प्रसाद, पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण, डीजी फायर सुजीत पांडेय और पुलिस कमिश्नर अमरेंद्र सेंगर समेत तमाम वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। देर शाम तक राहत-बचाव कार्य जारी रहा।
उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक भी घटनास्थल पर पहुंचे और भावुक हो गए। उन्होंने बताया कि घायलों में कुछ की उम्र महज 16-17 साल है और सभी को बेहतर उपचार दिया जा रहा है। रक्षा मंत्री एवं लखनऊ सांसद राजनाथ सिंह भी घटनास्थल का जायजा लेने के लिए रवाना हुए।
CM योगी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह अग्नि दुर्घटना अत्यंत दुखद और हृदयविदारक है। उनकी संवेदनाएं शोकाकुल परिजनों के साथ हैं और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
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PM से राष्ट्रपति तक ने जताया शोक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हादसे पर गहरा दुख जताया और प्रधानमंत्री राहत कोष से मृतकों के परिजनों को ₹2 लाख तथा घायलों को ₹50,000 की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना जताई और घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की। उत्तर प्रदेश सरकार ने भी मृतकों के परिजनों को ₹5 लाख और घायलों को ₹50,000 की अलग से आर्थिक सहायता देने की घोषणा की।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने मृतकों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि घटना के कारणों की ईमानदारी से जांच होनी चाहिए। उनके मुताबिक बच्चे किसी के भी घर के हो सकते थे और ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सभी को मिलकर काम करना होगा। KGMU के डॉक्टरों के मुताबिक अधिकांश मौतें धुएं से दम घुटने के कारण हुईं। CM योगी ने घटनास्थल और KGMU से लौटकर हाई लेवल मीटिंग बुलाई और स्पष्ट किया कि जिम्मेदारी तय की जाएगी। घटना की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए जा चुके हैं।

