लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को पर्यटन विभाग के कार्यों की व्यापक समीक्षा की। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश केवल आस्था का केंद्र नहीं बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना, आध्यात्मिक परंपरा और ज्ञान विरासत का प्रतिनिधि प्रदेश है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि पर्यटन विकास को केवल आधारभूत संरचना तक सीमित न रखते हुए इसे सांस्कृतिक पुनर्जागरण, स्थानीय अर्थव्यवस्था, रोजगार सृजन और वैश्विक पहचान से जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि पर्यटन नीति ऐसी हो जो निवेश आकर्षित करे, रोजगार बढ़ाए और पर्यटकों को विशिष्ट अनुभव प्रदान करे। बैठक में नीम करोली बाबा सर्किट, बुंदेलखंड फोर्ट सर्किट, ‘परंपरा’ विरासत अनुभव केंद्र, कृषि पर्यटन और वाइनयार्ड पर्यटन जैसी नई अवधारणाओं को बढ़ावा देने पर भी विचार हुआ।
ज्ञान भारतम् मिशन — 13.70 लाख पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण
भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण से जुड़े ज्ञान भारतम् मिशन की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की प्राचीन पांडुलिपियाँ हमारी सभ्यता, दर्शन, विज्ञान और सांस्कृतिक चेतना की अमूल्य धरोहर हैं। इनका संरक्षण और डिजिटलीकरण केवल अभिलेखीकरण का कार्य नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ने का माध्यम है। बैठक में बताया गया कि अब तक 13 लाख 70 हजार से अधिक पांडुलिपियों का सर्वेक्षण, डिजिटलीकरण और संरक्षण किया जा चुका है। यह मिशन भारत की बौद्धिक और आध्यात्मिक संपदा को सुरक्षित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक प्रयास है।
नौसेना शौर्य वाटिका और INS गोमती संग्रहालय
लखनऊ में नव लोकार्पित ‘नौसेना शौर्य वाटिका’ और निर्माणाधीन ‘INS गोमती शौर्य संग्रहालय’ की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह परियोजना राष्ट्रभक्ति, सैन्य गौरव और भारत की समुद्री विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगी। INS गोमती — भारतीय नौसेना का वह पोत जिसने देश की समुद्री सुरक्षा में अहम भूमिका निभाई — उसकी स्मृति में बन रहा यह संग्रहालय लखनऊ की धरोहर बनेगा। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि इसका संचालन लखनऊ विकास प्राधिकरण द्वारा किया जाए।
आगरा में छत्रपति शिवाजी महाराज संग्रहालय
आगरा में निर्माणाधीन छत्रपति शिवाजी महाराज संग्रहालय की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रनायकों की प्रेरक गाथाओं को नई पीढ़ी तक पहुँचाना राष्ट्रीय दायित्व है। संग्रहालय में आधुनिक तकनीक के जरिए छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन संघर्ष, स्वराज्य की स्थापना, आगरा प्रवास, औरंगजेब के दरबार में उनकी निडरता, ऐतिहासिक पलायन, राज्याभिषेक और हिंदवी स्वराज की संपूर्ण गाथा को जीवंत रूप में दर्शाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि संग्रहालय में मराठा साम्राज्य और उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक संबंध, काशी विश्वनाथ मंदिर के पुनरुद्धार में अहिल्याबाई होल्कर की भूमिका, ब्रज की संस्कृति और स्वतंत्रता संग्राम के नायकों को भी प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाए।
नैमिषारण्य — वैदिक ज्ञान का जीवंत केंद्र
नैमिषारण्य के समग्र विकास की समीक्षा में मुख्यमंत्री ने कहा कि यह स्थान महज एक तीर्थ नहीं बल्कि भारत की वैदिक ज्ञान परंपरा, आध्यात्मिक साधना और सांस्कृतिक विरासत का सजीव केंद्र है। इसके विकास में धार्मिक आस्था, पर्यावरण संरक्षण और आधुनिक सुविधाओं के बीच संतुलन सुनिश्चित किया जाए। मास्टर प्लान के अंतर्गत वेद विज्ञान केंद्र, वेदारण्यम वेलनेस एवं वैदिक थीम पार्क, राजघाट रिवरफ्रंट, व्यास गद्दी, सूत गद्दी, हनुमानगढ़ी, देवदेवेश्वर एवं रुद्रावत मंदिर परिसर, नैमिष हाट, तीर्थयात्री आवास और आधुनिक पर्यटन सुविधाओं का विकास प्रस्तावित है। इंटरप्रिटेशन सेंटर में वेदों की जन्मस्थली के रूप में नैमिषारण्य की अवधारणा, प्रोजेक्शन मैपिंग, लेजर शो, दशावतार विजुअलाइजेशन और पारंपरिक ग्राम्य जीवन के अनुभव को प्रस्तुत किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि इस कार्ययोजना को मिशन मोड में आगे बढ़ाया जाए।
माँ विंध्यवासिनी धाम और चित्रकूट सोमनाथ मंदिर
मिर्जापुर-विंध्याचल क्षेत्र के इंटीग्रेटेड मास्टर प्लान की समीक्षा में मुख्यमंत्री ने कहा कि माँ विंध्यवासिनी धाम देश के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक है और इसकी विकास योजना वर्ष 2050 तक संभावित श्रद्धालु संख्या को ध्यान में रखकर तैयार की जाए। त्रिकोण परिक्रमा क्षेत्र के विकास पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि शक्तिपीठों के निकट माता सती की पौराणिक कथा का प्रभावी एवं आकर्षक प्रस्तुतीकरण किया जाए और इसके लिए निजी क्षेत्र के सहयोग की संभावनाओं का भी उपयोग किया जाए। चित्रकूट स्थित प्राचीन सोमनाथ मंदिर के संरक्षण की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि संरक्षण में मूल स्वरूप, ऐतिहासिक प्रामाणिकता और स्थापत्य विशेषताओं को अक्षुण्ण रखते हुए आवश्यक सुविधाओं का विकास किया जाए।


