नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को हैदराबाद हाउस में वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज़ से द्विपक्षीय वार्ता की। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब होर्मुज संकट के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बाधित है और भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए नए तेल स्रोत तलाश रहा है। बैठक में ऊर्जा सहयोग, व्यापार, निवेश, दवा उद्योग, स्वास्थ्य, परिवहन और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों पर विस्तृत चर्चा हुई।
वेनेजुएला — भारत का नया तेल साझेदार
विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी रुद्रेंद्र टंडन ने बताया कि हाल के हफ्तों में वेनेजुएला भारत का तीसरा सबसे बड़ा कच्चे तेल का आपूर्तिकर्ता बन गया है। उन्होंने कहा कि भारत “ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए आक्रामक रूप से नए कच्चे तेल और ऊर्जा स्रोत तलाश रहा है” और वेनेजुएला इस दिशा में एक महत्वपूर्ण अवसर है। गौरतलब है कि भारत अपनी जरूरत का लगभग 90% तेल आयात करता है। इनमें से आधी आपूर्ति होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर आती थी जो अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण प्रभावित हुई है। इस स्थिति में वेनेजुएला जैसे वैकल्पिक स्रोत भारत के लिए रणनीतिक रूप से अहम हो गए हैं।
जयशंकर ने भी की मुलाकात
बैठक से पहले विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी डेल्सी रोड्रिगेज़ से अलग मुलाकात की। जयशंकर ने भारत-वेनेजुएला संबंधों को मजबूत करने के प्रति रोड्रिगेज़ की निरंतर प्रतिबद्धता की सराहना की।उन्होंने उम्मीद जताई कि PM मोदी के साथ यह बैठक दोनों देशों के आपसी सहयोग को नई ऊँचाई देगी। रोड्रिगेज़ की यात्रा के दौरान पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी से भी मुलाकात होनी है। इसके अलावा वह भारत के ऊर्जा, दवा और ऑटोमोबाइल क्षेत्र की प्रमुख सुविधाओं का दौरा भी करेंगी।
वेनेजुएला की स्थिति — एक नज़र
वेनेजुएला दक्षिण अमेरिका का एक तेल समृद्ध देश है जिसके पास दुनिया के कुल कच्चे तेल भंडार का लगभग 17% हिस्सा है। हालाँकि अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण वेनेजुएला का तेल उत्पादन वर्षों तक प्रभावित रहा। जनवरी 2026 में अमेरिकी सेना ने राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ लिया — तब से डेल्सी रोड्रिगेज़ देश की बागडोर संभाल रही हैं। होर्मुज संकट के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में बदलाव आया है और भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश अब वेनेजुएला की तरफ रुख कर रहे हैं। रोड्रिगेज़ पाँच दिवसीय यात्रा पर भारत आई हैं — वह भारतीय संत सत्य साईं बाबा की अनुयायी भी हैं और आंध्र प्रदेश के पुट्टपर्थी में उनके जन्मस्थल का दौरा भी करेंगी।
भारत-वेनेजुएला संबंध — पृष्ठभूमि
भारत और वेनेजुएला के बीच संबंध लंबे समय से ऊर्जा और व्यापार पर केंद्रित रहे हैं। जनवरी 2026 में PM मोदी और रोड्रिगेज़ के बीच फोन पर बातचीत हुई थी जिसमें दोनों देशों ने व्यापार, ऊर्जा, डिजिटल प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य और कृषि में साझेदारी गहरी करने पर सहमति जताई थी। अगस्त 2023 में रोड्रिगेज़ ने उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ से भी मुलाकात की थी। इस बार की यात्रा उस कड़ी को और मजबूत करती है। भारत के लिए यह साझेदारी Global South के साथ सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
भारतीय कंपनियों के लिए निवेश के अवसर
बैठक में दोनों नेताओं ने भारतीय कंपनियों के लिए वेनेजुएला के खनन, महत्वपूर्ण खनिज, दवा और ऑटोमोबाइल क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं पर भी चर्चा की। होर्मुज संकट के बाद भारत की ऊर्जा नीति में बड़ा बदलाव आया है। अब भारत सिर्फ मध्य-पूर्व पर निर्भर नहीं रहना चाहता — वेनेजुएला, रूस और अफ्रीकी देशों को साथ जोड़कर ऊर्जा स्रोतों का विविधीकरण किया जा रहा है। यह बैठक उसी दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है। भारतीय सरकारी कंपनी ONGC Videsh का वेनेजुएला के तेल क्षेत्र में 2008 से निवेश है — ओरिनोको ऑयल बेल्ट में Carabobo-1 परियोजना में भारतीय consortium की हिस्सेदारी है।



