नई दिल्ली। लोकसभा में पेपर लीक संशोधन विधेयक पर हुई चर्चा और राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद भाजपा ने भी देर रात मीडिया के सामने अपना पक्ष रखा। भाजपा सांसद संबित पात्रा ने कहा कि राहुल गांधी के बयानों का जवाब संसद में दिया जाना चाहिए था लेकिन उनके व्यवहार की वजह से यह संभव नहीं हो सका और इसलिए बाहर आकर स्थिति स्पष्ट करनी पड़ रही है।
राहुल को मौका मिला, नियम तोड़े
संबित पात्रा ने कहा कि राहुल गांधी का यह दावा पूरी तरह गलत है कि उन्हें सदन में बोलने का मौका नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि जब 45 से अधिक सांसद बोल सके और प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी अपनी बात रखी तो राहुल गांधी को क्यों रोका जाता। उन्हें पूरा समय दिया गया लेकिन वे संसदीय नियमों के अनुसार अपनी बात नहीं रख सके। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने केवल ‘इडियट’ शब्द पर आपत्ति जताई थी जो संसद के नियमों के विरुद्ध था। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने स्वयं खड़े होकर सदस्यों से अपील की कि राहुल गांधी को ध्यान से सुना जाए। पात्रा ने कहा कि इससे बड़ी लोकतांत्रिक परंपरा और क्या हो सकती है।
छात्रों पर गोली का दावा खारिज
राहुल गांधी ने लोकसभा में कहा था कि NEET आंदोलन के दौरान दिल्ली में छात्रों पर गोली चलाई गई और इसका आदेश गृह मंत्री अमित शाह ने दिया था। पात्रा ने इसे पूरी तरह निराधार बताया। उन्होंने पूछा कि यदि गोली चली थी तो कारतूस, बैलिस्टिक रिपोर्ट या कोई ठोस सबूत क्यों नहीं दिखाया गया। उन्होंने कहा कि जब यह दावा टिक नहीं पाया तो राहुल गांधी ने अपने बयान का स्वर बदल दिया।
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पात्रा ने स्पष्ट किया कि किसी भी कानून-व्यवस्था की स्थिति में मौके पर मौजूद मजिस्ट्रेट यह तय करते हैं कि कितने बल का उपयोग करना है। केवल इस आधार पर कि दिल्ली पुलिस गृह मंत्रालय के अधीन है, यह कहना उचित नहीं है कि हर कार्रवाई का आदेश गृह मंत्री सीधे देते हैं। राहुल गांधी के इस दावे को भी उन्होंने खारिज किया कि उन्होंने खुद अमित शाह को फोन पर अधिकारियों से बात करते देखा। उन्होंने कहा कि पहले भी राफेल मामले में तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर और पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को लेकर ऐसे ही दावे किए गए थे जो सही साबित नहीं हुए। बिना सबूत के गंभीर आरोप लगाना राहुल गांधी की पुरानी राजनीतिक शैली रही है।
माफी मांगना पुरानी आदत
राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि वे भाजपा या RSS से कभी माफी नहीं मांगेंगे। पात्रा ने इस दावे को भी गलत बताया। उन्होंने कहा कि हाल ही में राहुल गांधी ने शिवराज सिंह चौहान से अदालत में लिखित रूप से माफी मांगी थी। इसके अलावा ‘चौकीदार चोर है’ टिप्पणी के मामले में भी उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर माफी मांगी थी। पात्रा ने कहा कि राहुल गांधी कैमरे के सामने भले माफी न मांगें लेकिन अदालत में शपथपत्र देकर माफी मांगते रहे हैं। अंत में उन्होंने फिर दोहराया कि भाजपा की ओर से राहुल गांधी से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की जाती है।
आंदोलन का श्रेय लेने की कोशिश
पात्रा ने कहा कि छात्र आंदोलन के दौरान सरकार और संबंधित पक्षों के बीच बातचीत से समाधान निकला लेकिन राहुल गांधी अब उसका राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परीक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए शिक्षा, तकनीक, पुलिस और खुफिया एजेंसियों के अनुभवी लोगों की टास्क फोर्स बनाई। साथ ही पेपर लीक रोकने का नया कानून भी बनाया गया। उन्होंने कहा कि केवल राजनीति करने से व्यवस्था नहीं सुधरेगी बल्कि ठोस काम करने से बदलाव आएगा।

