नई दिल्ली। लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक 2026 बुधवार को लोकसभा में ध्वनि मत से पास हो गया। मंगलवार को इस विधेयक पर 9 घंटे चर्चा हुई और 45 से अधिक सांसदों ने हिस्सा लिया। बुधवार को विपक्ष के हंगामे के बीच यह पारित हुआ। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने यह विधेयक सदन में पेश किया। बिल पास होने के बाद स्पीकर ओम बिरला ने लोकसभा की कार्यवाही 30 जुलाई सुबह 11 बजे तक स्थगित कर दी।
2024 का मूल कानून क्या था
फरवरी 2024 में संसद ने लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम 2024 पास किया था जिसे 21 जून 2024 से लागू किया गया था। यह कानून UPSC, SSC, NEET, CUET और राज्य लोक सेवा आयोगों सहित सभी प्रमुख सरकारी परीक्षाओं में पेपर लीक, नकल और संगठित अनियमितताओं पर अंकुश लगाने के लिए लाया गया था। मूल कानून में पेपर लीक पर 3 से 5 साल की जेल और ₹10 लाख तक के जुर्माने का प्रावधान था। संगठित अपराध के लिए 5 से 10 साल जेल और ₹1 करोड़ जुर्माना था। हालांकि जांच और मुकदमे के लिए कोई तय समय-सीमा नहीं थी और फास्ट ट्रैक कोर्ट का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं था।
नए संशोधन में क्या बदला
2026 के संशोधन में सजा और प्रक्रिया दोनों को कड़ा किया गया है। पेपर लीक और अनुचित साधनों के लिए अब कम से कम 5 साल और अधिकतम 10 साल की जेल तथा ₹50 लाख तक के जुर्माने का प्रावधान है। संगठित अपराध में कम से कम 7 साल की जेल और ₹10 करोड़ तक का जुर्माना होगा। सभी जांचें 2 महीने के भीतर पूरी करनी होंगी। चार्जशीट दाखिल होने के 3 महीने के भीतर रोजाना सुनवाई कर ट्रायल पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। राज्य सरकारें और केंद्र शासित प्रदेश विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट बना सकेंगे। जरूरत पड़ने पर केंद्र सरकार विशेष STF बनाकर जांच करा सकेगी।
15 तरह के अपराध स्पष्ट
नए संशोधन में 15 तरह के अपराध स्पष्ट किए गए हैं जैसे पेपर लीक, OMR शीट से छेड़छाड़, फर्जी वेबसाइट, फर्जी एडमिट कार्ड आदि। परीक्षा सुरक्षा के लिए बायोमेट्रिक रजिस्ट्रेशन, परीक्षा केंद्रों का प्री-ऑडिट, स्क्रीनिंग, सीट आवंटन, प्रश्नपत्र सुरक्षा, इनविजिलेशन और परीक्षा के बाद की प्रक्रिया के लिए विस्तृत मानक तय किए जाएंगे।
NEET विवाद की पृष्ठभूमि
यह संशोधन NEET पेपर लीक विवाद के बाद लाया गया है। गड़बड़ी की सूचना मिलते ही सरकार ने 3 दिन के भीतर री-एग्जामिनेशन का फैसला लिया था। 40 हजार से अधिक केंद्रों पर 13 भाषाओं में परीक्षा कराई गई और 45 दिनों के भीतर परिणाम घोषित किया गया। NEET मामले में शामिल 13 आरोपी गिरफ्तार होकर फास्ट ट्रैक कोर्ट में हैं। नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में हाई पावर टास्क फोर्स गठित कर परीक्षा प्रणाली में सुधार का काम शुरू किया जा चुका है। तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए इस्तीफा दिया था।
लोकसभा में चर्चा के दौरान विपक्ष ने आरोप लगाया था कि NEET आंदोलन के दौरान दिल्ली में छात्रों पर गोली चलाई गई और इसका आदेश गृह मंत्री अमित शाह ने दिया था। इस पर केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि छात्रों पर गोली नहीं चली, केवल आंसू गैस का इस्तेमाल हुआ और ऐसा कोई आदेश देने का अधिकार मंत्री के पास नहीं बल्कि मजिस्ट्रेट के पास होता है।
वंदे मातरम् को कानूनी संरक्षण
राज्यसभा में पारित राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण संशोधन विधेयक 2026 के तहत 1971 के मूल अधिनियम में संशोधन किया गया है। वंदे मातरम् को अब जन-गण-मन की तरह कानूनी संरक्षण मिलेगा। 1882 में बंकिम चन्द्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित यह गीत 1896 में रवींद्रनाथ टैगोर ने कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में पहली बार गाया था और 1950 में इसे राष्ट्रगीत का दर्जा दिया गया था। अब इसका अपमान, अनादर और गायन में बाधा डालना दंडनीय अपराध होगा जिस पर 3 साल तक की जेल या जुर्माना या दोनों का प्रावधान है।

