लखनऊ, 19 अगस्त। आम आदमी पार्टी के उत्तर प्रदेश प्रभारी और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने श्रीराम मंदिर से जुड़े जमीन प्रकरण की जांच को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने एसआईटी की जांच और सुप्रीम कोर्ट की ओर से स्टेटस रिपोर्ट मांगे जाने का जिक्र करते हुए कहा कि मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए। संजय सिंह ने अपने पास मौजूद जमीन से जुड़े दस्तावेजों का हवाला देते हुए उन्हें जांच में शामिल करने की मांग भी की।
एसआईटी पर उठाया सवाल
संजय सिंह ने कहा कि एक ओर चंपत राय और अनिल मिश्रा को एसआईटी से कथित तौर पर क्लीन चिट मिलने की खबर सामने आई है, जबकि दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट की ओर से एसआईटी को जांच जल्द पूरी कर स्टेटस रिपोर्ट देने की बात कही गई है। उन्होंने कहा कि इन दोनों बातों के बीच स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए और यह बताया जाना चाहिए कि जांच किस स्तर पर पहुंची है।
उन्होंने कहा कि वह इस मामले में पहले भी एसआईटी को कई दस्तावेज सौंप चुके हैं। संजय सिंह के मुताबिक, उनके पास अभी 13 और दस्तावेज मौजूद हैं, जिन्हें वह जांच टीम को देना चाहते हैं। उन्होंने एसआईटी से जल्द समय देने और इन दस्तावेजों को जांच में शामिल करने की मांग की।
जमीन सौदों का हवाला
संजय सिंह ने अपने बयान में जमीन की खरीद से जुड़े कई दस्तावेजों का जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि दो करोड़ रुपये की जमीन पांच मिनट बाद 18 करोड़ रुपये में खरीदी गई और इससे जुड़े दस्तावेज में चंपत राय के हस्ताक्षर होने की बात कही। उन्होंने ऐसे ही अन्य जमीन सौदों का भी उल्लेख किया।
उन्होंने दावा किया कि नौ करोड़ रुपये की जमीन 55 करोड़ रुपये और एक करोड़ 73 लाख रुपये की जमीन 24 करोड़ रुपये में खरीदी गई। संजय सिंह ने कहा कि उनके पास इनसे जुड़े दस्तावेज हैं और वह चाहते हैं कि एसआईटी इनकी जांच करे। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि पहले सौंपे गए दस्तावेजों पर अब तक क्या कार्रवाई हुई, इसकी जानकारी भी सामने आनी चाहिए।
जांच में सहयोग की पेशकश
संजय सिंह ने कहा कि वह जांच में पूरा सहयोग देने को तैयार हैं और उनके पास मौजूद दस्तावेजों को भी इसमें शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इन दस्तावेजों के आधार पर जमीन सौदों से जुड़े मामलों की पड़ताल की जानी चाहिए, साथ ही पहले सौंपे गए दस्तावेजों पर अब तक हुई कार्रवाई की जानकारी भी सार्वजनिक होनी चाहिए। आगे कहा कि अगर जांच निष्पक्ष तरीके से आगे नहीं बढ़ी तो वह अपने पास मौजूद सबूतों के साथ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं।

