नई दिल्ली। दिल्ली के मालवीय नगर होटल अग्निकांड में एक बड़ा मोड़ आया। 3 जून को 21 लोगों की जान लेने वाले इस हादसे के मुख्य आरोपी फ्लोरिश स्टे होटल के मालिक लवकेश बजाज को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। हादसे के बाद वह साकेत स्थित अपने आवास D-140 से परिवार सहित फरार हो गया था। पुलिस टीम दोपहर में घर पहुँची तो घर की ज्यादातर मंजिलें बंद मिलीं — केवल ऊपरी मंजिल पर एक महिला मौजूद थी जिसने बताया कि परिवार के बाकी सदस्य जा चुके हैं। पुलिस ने उसके और उसकी पत्नी के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर (LOC) जारी किया। बुधवार रात पुलिस ने साकेत के D-ब्लॉक से उसे दबोच लिया। पकड़े जाने के बाद पूछताछ में लवकेश बजाज के कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं।
“दिल्ली में सब चलता है”
पुलिस पूछताछ में लवकेश बजाज ने कहा कि वह होटल का सीधे प्रबंधन नहीं करते थे। उन्होंने दैनिक कामकाज, बिलिंग, अकाउंट्स और पूरी व्यवस्था एक अन्य व्यक्ति को सौंप रखी थी। बजाज ने बताया कि होटल में कमरों की संख्या और आकार बढ़ाने का सुझाव भी उसी व्यक्ति ने दिया था। उस व्यक्ति ने बजाज को यह कहकर भरोसा दिलाया था कि “दिल्ली में ऐसा सब कुछ चलता रहता है।” बजाज ने यह भी स्वीकार किया कि होटल परिसर के पास फायर NOC नहीं थी। पुलिस अब होटल मैनेजर की तलाश में कई ठिकानों पर छापेमारी कर रही है। साथ ही लवकेश बजाज की अन्य संपत्तियों की भी जाँच की जा रही है।
मृतकों में 11 विदेशी, 10 भारतीय
पुलिस जाँच में अब मृतकों की पहचान का खुलासा हुआ है। 21 मृतकों में 11 विदेशी नागरिक हैं जिनमें लाइबेरिया, मोजाम्बिक, नाइजीरिया और कांगो के नागरिक शामिल हैं। 10 भारतीय मृतकों में से 8 राजस्थान और हरियाणा के निवासी थे। अभी भी 19 घायलों की हालत गंभीर बनी हुई है।
CM रेखा गुप्ता ने किया अस्पताल दौरा
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता हादसे के 26 घंटे बाद अस्पताल पहुँचीं और पीड़ितों से मुलाकात की। उन्होंने मृतकों के परिजनों को ₹10 लाख मुआवजे का ऐलान किया। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने PMNRF से ₹2 लाख और घायलों को ₹50,000 मुआवजे की घोषणा की थी।
न्यायिक जाँच के आदेश
LG तरनजीत सिंह संधू द्वारा बुलाई गई उच्चस्तरीय बैठक में हादसे की मजिस्ट्रेट जाँच के आदेश दिए गए हैं। संबंधित जिला मजिस्ट्रेट (DM) के अधीन यह जाँच होगी। 4 जून से पूरी दिल्ली में एक महीने का सघन प्रवर्तन अभियान शुरू हो गया है — होटलों, रेस्टोरेंट, कोचिंग संस्थानों और नर्सिंग होम में फायर सेफ्टी की जाँच की जाएगी। सभी व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को फायर सेफ्टी उपकरण दुरुस्त करने के लिए 15 दिन का अल्टीमेटम दिया गया है। नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों को तुरंत सील किया जाएगा। फायर विभाग एक सप्ताह में हेल्पलाइन और ईमेल आईडी भी जारी करेगा — जिससे नागरिक अपने आसपास के असुरक्षित भवनों की शिकायत कर सकेंगे।
बार-बार हादसे, बार-बार सवाल
यह पहली बार नहीं है। 1997 के उपहार सिनेमा अग्निकांड से लेकर अब तक दिल्ली में दर्जनों ऐसे हादसे हो चुके हैं। हर बार जाँच के आदेश दिए गए, हर बार मुआवजा दिया गया — पर फायर सेफ्टी नियमों का उल्लंघन रुका नहीं। मालवीय नगर अग्निकांड एक बार फिर अवैध निर्माण, फायर NOC की अनदेखी और सुरक्षा मानकों की उपेक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करता है।



