चेन्नई। तमिलनाडु भाजपा में लंबे समय से चल रही अंदरूनी खींचतान आखिरकार खुलकर सामने आ गई। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देकर नई राजनीतिक पार्टी बनाने का एलान कर दिया। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। अन्नामलाई के इस फैसले के बाद तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है — क्या वे द्रविड़ दलों और भाजपा दोनों के सामने एक साथ टिक पाएंगे?
कौन हैं के. अन्नामलाई
पूर्व आईपीएस अधिकारी अन्नामलाई को उनके समर्थक “सिंघम” के नाम से जानते हैं। उन्होंने अगस्त 2020 में भाजपा की सदस्यता ली थी। इसके महज एक वर्ष बाद उन्हें तमिलनाडु भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। अपने कार्यकाल में वे DMK और AIADMK दोनों पर खुलकर हमला बोलते रहे। जयललिता को लेकर उनकी टिप्पणी से दोनों दलों के साथ रिश्ते तनावपूर्ण हो गए थे। उनकी आक्रामक राजनीतिक शैली ने उन्हें तमिलनाडु में एक अलग पहचान दिलाई — पर यही शैली बाद में पार्टी नेतृत्व से उनके मतभेद की वजह भी बनी।
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18 महीनों से बढ़ रहे थे मतभेद
अन्नामलाई के इस कदम के पीछे किसी एक दिन या एक फैसले का हाथ नहीं था। खुद अन्नामलाई और पार्टी सूत्रों के अनुसार पिछले करीब 18 महीनों से भाजपा नेतृत्व के साथ उनके मतभेद लगातार गहरे होते रहे। उन्होंने बताया कि 4 दिसंबर 2025 को ही वे पार्टी नेतृत्व को इस्तीफे की अपनी इच्छा बता चुके थे — पर उनसे विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया पूरी होने तक रुकने को कहा गया। भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन को 2 जून को लिखे पत्र में उन्होंने स्पष्ट किया कि तमिलनाडु की पहचान और सांस्कृतिक मूल्यों पर आधारित अपनी राजनीति को लेकर वे पार्टी नेतृत्व पर बोझ नहीं बनना चाहते।
AIADMK गठबंधन — ताबूत की आखिरी कील
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि AIADMK के साथ भाजपा का दोबारा गठबंधन इस पूरे विवाद में ताबूत की आखिरी कील साबित हुआ। सितंबर 2023 में AIADMK ने भाजपा से गठबंधन तोड़ दिया था। पर 2026 तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले जब दोनों दल फिर साथ आए तो इसे अन्नामलाई की राजनीतिक लाइन के खिलाफ माना गया। इसके बाद अप्रैल 2025 में नैनार नागेंद्रन को तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष बनाया गया और अन्नामलाई संगठन के शीर्ष पद से बाहर हो गए। अन्नामलाई का मानना था कि तमिलनाडु में भाजपा को स्वतंत्र ताकत के रूप में आगे बढ़ना चाहिए — पर पार्टी नेतृत्व की रणनीति अलग रही।
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अमित शाह से मुलाकात — फिर इस्तीफा
इस्तीफे से ठीक पहले 2 जून को अन्नामलाई ने नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। इसके बाद चेन्नई और कोयंबटूर समेत कई प्रमुख स्थानों पर उनके समर्थकों ने पोस्टर लगाए जिनमें उन्हें “थलाइवर” (नेता) और “निडर सोच वाला नेता” बताया गया। गुरुवार को सोशल मीडिया पर उन्होंने कहा था कि शुक्रवार को वे अपने विचार साझा करेंगे। और शुक्रवार को दोपहर 12 बजे सोशल मीडिया पर समर्थकों और जनता से संवाद करते हुए उन्होंने अपने इस्तीफे और नई पार्टी बनाने की औपचारिक घोषणा की।
अन्नामलाई ने क्या कहा
सोशल मीडिया मंच X के जरिए जनता को संबोधित करते हुए अन्नामलाई ने कहा — “आज से एक नया रास्ता, एक नया आंदोलन और एक नई राजनीतिक यात्रा शुरू हो रही है।” उन्होंने कहा कि अब उनके सामने बड़े राजनीतिक लक्ष्य हैं और उन्हें ज्यादा से ज्यादा लोगों को अपने साथ जोड़कर आगे बढ़ना है। अन्नामलाई ने दावा किया कि भाजपा में रहते हुए उन्होंने तमिलनाडु की अस्मिता, संस्कृति और जल अधिकारों के मुद्दे पर कभी कोई समझौता नहीं किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति सम्मान जताया — पर साथ ही यह भी साफ किया कि उनका राजनीतिक रास्ता अब अलग होगा। उन्होंने कहा — “मेरे सामने हमेशा यह द्वंद्व रहा कि मैं पहले भाजपा का कार्यकर्ता हूं या तमिलनाडु का बेटा। आखिरकार मैंने अपने रास्ते पर आगे बढ़ने का फैसला किया।“ अन्नामलाई ने यह भी घोषणा की कि उनकी नई पार्टी आगामी तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में हिस्सा लेगी।
समर्थकों में उत्साह
इस्तीफे के बाद अन्नामलाई के समर्थकों ने पटाखे फोड़े और मिठाइयां बांटीं। इससे साफ संकेत मिला कि अन्नामलाई अपनी अलग राजनीतिक जमीन तैयार करने में जुट चुके हैं। उनके समर्थकों को भरोसा है कि वे तमिलनाडु में DMK और AIADMK दोनों से अलग एक नई राजनीतिक ताकत के रूप में खुद को स्थापित कर सकते हैं।
भाजपा और दूसरे दलों की प्रतिक्रिया
तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन ने कहा कि अन्नामलाई के जाने से भाजपा को कोई नुकसान नहीं होगा — “भाजपा दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी है और उसकी राजनीति किसी एक व्यक्ति पर निर्भर नहीं करती।” DMK नेताओं ने दावा किया कि अन्नामलाई भविष्य में भी भाजपा की विचारधारा के करीब रहेंगे। MDMK नेता दुरई वाइको ने अन्नामलाई के फैसले का स्वागत किया।
तमिलनाडु: नई पार्टी, नई चुनौती
अब तमिलनाडु की राजनीति में सबसे बड़ा सवाल यही है — क्या अन्नामलाई अपनी नई पार्टी के जरिए भाजपा और द्रविड़ दलों दोनों को एक साथ चुनौती दे पाएंगे? DMK और AIADMK के बीच दशकों से चली आ रही राजनीति में तीसरी ताकत का उभरना आसान नहीं होगा। पर अन्नामलाई की आक्रामक छवि, IPS की पृष्ठभूमि और युवाओं में लोकप्रियता उन्हें एक अलग पहचान देती है। 2026 तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले उनका यह कदम तमिलनाडु की राजनीति को एक नई दिशा दे सकता है।


