नई दिल्ली/चेन्नई। तमिलनाडु की राजनीति में मंगलवार को बड़ा भूचाल आया। तमिलनाडु BJP के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व IPS अधिकारी के. अन्नामलाई ने भारतीय जनता पार्टी से इस्तीफा दे दिया। 2 जून 2026 को नई दिल्ली में BJP के शीर्ष नेताओं से मुलाकात के बाद उन्होंने औपचारिक रूप से पार्टी छोड़ने का निर्णय सुनाया। पार्टी नेतृत्व ने उन्हें रोकने की पूरी कोशिश की, यहाँ तक कि राज्यसभा सीट का प्रस्ताव भी दिया — पर अन्नामलाई अपने फैसले पर अडिग रहे। अब वे “मक्कल शक्ति इयक्कम” के नाम से एक नई राजनीतिक पार्टी बनाने की दिशा में आगे बढ़ने वाले हैं।
कब और कैसे छोड़ी BJP
मंगलवार 2 जून 2026 को के. अन्नामलाई ने नई दिल्ली में BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन और संगठन सचिव बी. एल. संतोष से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद उन्होंने पार्टी नेतृत्व को अपना इस्तीफा सौंप दिया। सूत्रों के अनुसार अन्नामलाई ने “सौहार्दपूर्ण अलगाव” की माँग की थी। BJP नेतृत्व ने उन्हें मनाने की हरसंभव कोशिश की और राज्यसभा सीट का प्रस्ताव भी रखा, पर अन्नामलाई ने सभी प्रस्ताव ठुकरा दिए। उनके करीबी सूत्रों के अनुसार उनका मन पहले से बन चुका था और किसी भी offer ने उनका इरादा नहीं बदला।
BJP में अन्नामलाई का सफर
के. अन्नामलाई एक पूर्व IPS अधिकारी हैं जिन्होंने कर्नाटक पुलिस में 2011 से 2019 तक सेवा दी। “सिंघम” के नाम से मशहूर अन्नामलाई 2020 में BJP में शामिल हुए और सिर्फ 11 महीने में जुलाई 2021 में तमिलनाडु BJP के प्रदेश अध्यक्ष बना दिए गए। अपने कार्यकाल (2021-2025) में उन्होंने BJP को तमिलनाडु में एक नई पहचान दिलाई। राज्यव्यापी दौरे, भ्रष्टाचार विरोधी अभियान, आक्रामक भाषण और मजबूत सोशल मीडिया उपस्थिति से वे DMK और AIADMK के वर्चस्व वाले राज्य में BJP का सबसे चर्चित चेहरा बन गए। 2021 के विधानसभा चुनाव में अरवकुरिची से और 2024 के लोकसभा चुनाव में कोयम्बटूर से चुनाव लड़े — दोनों बार हारे, पर पार्टी का वोट शेयर बढ़ाने में सफल रहे।
AIADMK गठबंधन — सबसे बड़ी दरार
अन्नामलाई और BJP केंद्रीय नेतृत्व के बीच असली दरार AIADMK से गठबंधन के मुद्दे पर आई। अन्नामलाई हमेशा से BJP को तमिलनाडु में एक स्वतंत्र ताकत के रूप में खड़ा करने के पक्षधर थे। उनका मानना था कि AIADMK के साथ गठबंधन BJP के दीर्घकालिक हित में नहीं है। इसके अलावा उन्होंने AIADMK के संस्थापक सी. एन. अन्नादुरई और पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता पर की गई टिप्पणियों से AIADMK से संबंध और बिगाड़ लिए थे।
2026 के विधानसभा चुनाव से पहले जब BJP नेतृत्व ने AIADMK के साथ गठबंधन करने का निर्णय लिया, तो अन्नामलाई को अप्रैल 2025 में प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाकर नैनार नागेंद्रन को यह जिम्मेदारी सौंप दी गई। इसके बाद न तो अन्नामलाई ने 2026 के विधानसभा चुनाव में उम्मीदवारी की और न ही BJP के प्रचार अभियान में कोई सक्रिय भूमिका निभाई। यह सब उनके पार्टी से मोहभंग का संकेत था।
CBSE तीन भाषा नीति — आखिरी तिनका
हाल ही में CBSE द्वारा कक्षा 9 के छात्रों के लिए तीन भाषा नीति लागू करने की घोषणा ने भी विवाद खड़ा किया। अन्नामलाई ने इस नीति का खुलकर विरोध किया और केंद्र सरकार से इसे वापस लेने की माँग की। तमिलनाडु में हिंदी भाषा नीति का विरोध एक संवेदनशील राजनीतिक मुद्दा है और इस पर केंद्र का विरोध करना उनके BJP नेतृत्व से टकराव की अंतिम कड़ी बन गई। इसी के बाद दिल्ली दौरे और पार्टी छोड़ने की अटकलें तेज हो गई थीं।
नई पार्टी — “मक्कल शक्ति इयक्कम”
अन्नामलाई के करीबी सूत्रों के अनुसार वे “मक्कल शक्ति इयक्कम” के नाम से एक नया राजनीतिक मंच खड़ा करने की योजना बना रहे हैं। यह आंदोलन शुरुआत में एक स्वयंसेवक-आधारित जन आंदोलन के रूप में शुरू होगा जो बाद में पूर्ण राजनीतिक पार्टी का रूप ले सकता है। इस मंच पर पेशेवर वर्ग, युवा और समाजसेवी लोगों को जोड़ने की योजना है। इसका झुकाव राष्ट्रवादी विचारधारा की ओर बताया जा रहा है।
तमिलनाडु की राजनीति पर असर
अन्नामलाई के BJP छोड़ने से तमिलनाडु की राजनीति में एक नया और जटिल समीकरण बन रहा है — और इसे समझने के लिए राज्य की मौजूदा राजनीतिक स्थिति को समझना ज़रूरी है। 23 अप्रैल 2026 को हुए विधानसभा चुनाव में अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कज़गम (TVK) ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की। TVK ने 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी का दर्जा हासिल किया और कांग्रेस, CPI, CPI(M), VCK तथा IUML के समर्थन से 120 MLA का बहुमत जुटाया। 10 मई 2026 को सी. जोसेफ विजय ने चेन्नई के जवाहरलाल नेहरू इनडोर स्टेडियम में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। यह 1967 के बाद पहली बार हुआ जब तमिलनाडु में कोई गैर-द्रविड़ियन पार्टी की सरकार बनी — यानी DMK और AIADMK के छह दशकों के वर्चस्व का अंत।
चुनाव परिणामों ने तमिलनाडु की राजनीति को पूरी तरह बदल दिया। DMK मात्र 59 सीटों पर सिमट गई तो AIADMK को 47 सीटें मिलीं। BJP-AIADMK का गठबंधन मतदाताओं ने खारिज कर दिया — वही गठबंधन जिसका अन्नामलाई ने शुरू से विरोध किया था और जिसकी वजह से उन्हें प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाया गया। अब जब वे नई पार्टी लेकर मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं, तो सामने एक मज़बूत सत्ताधारी TVK है जिसने युवाओं और बदलाव चाहने वाले मतदाताओं पर पहले ही अपनी पकड़ बना ली है। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि अन्नामलाई के सामने रास्ता कठिन है — उन्हें एक ऐसी जगह बनानी होगी जहाँ पहले से कोई खड़ा है

