मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को मौद्रिक नीति समिति (MPC) के फैसलों का ऐलान किया। बुधवार से शुरू हुई तीन दिवसीय बैठक में सर्वसम्मति से रेपो रेट 5.25% पर यथावत रखने का निर्णय लिया गया। पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक तनाव और महंगाई के जोखिमों के बीच पूरे बाजार की नजरें इस फैसले पर टिकी थीं।
रेपो रेट 5.25% पर बरकरार
मौद्रिक नीति समिति ने सर्वसम्मति से ब्याज दरों में यथास्थिति बनाए रखने और ‘तटस्थ’ रुख अपनाने का निर्णय लिया। गवर्नर मल्होत्रा ने कहा कि भारत की घरेलू आर्थिक गतिविधियां काफी हद तक स्थिर बनी हुई हैं — जो मौजूदा वैश्विक माहौल में अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत है। स्थायी जमा सुविधा (SDF) दर 5% और सीमांत स्थायी सुविधा (MSF) दर 5.5% पर अपरिवर्तित रहीं।
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सकल घरेलू उत्पाद अनुमान घटाया — 6.9% से 6.6%
गवर्नर ने आर्थिक विकास को लेकर चिंताएं जाहिर कीं। ऊर्जा की बढ़ती कीमतों और आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं का सीधा असर आर्थिक गतिविधियों पर पड़ने की आशंका है। उत्पादन लागत बढ़ने का दबाव अब अर्थव्यवस्था में साफ दिखाई देने लगा है। वैश्विक कमजोर मांग और उच्च लॉजिस्टिक लागत के कारण भारत के वस्तु निर्यात के सामने बड़ी चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। इन तमाम विपरीत परिस्थितियों का आकलन करते हुए RBI ने चालू वित्त वर्ष के लिए सकल घरेलू उत्पाद (GDP) ग्रोथ अनुमान 6.9% से घटाकर 6.6% कर दिया है।
महंगाई अनुमान बढ़ाया — 4.6% से 5.1%
पश्चिम एशिया के तनाव और वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए RBI ने वित्त वर्ष 2027 के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) महंगाई अनुमान 4.6% से बढ़ाकर 5.1% कर दिया है। चालू वित्त वर्ष के लिए कोर महंगाई दर 4.7% रहने का अनुमान है। गवर्नर ने कहा कि CPI महंगाई अभी लक्ष्य से नीचे है पर ऊपर जाने का रुझान बना हुआ है। साथ ही चालू खाते के घाटे (CAD) पर भी दबाव बढ़ने का खतरा बना हुआ है। हालांकि गवर्नर ने आश्वस्त किया कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी बाहरी झटके से निपटने के लिए पर्याप्त है और केंद्रीय बैंक इन चुनौतियों का सामना करने के लिए पूरी तरह सतर्क है।
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विदेशी निवेश नियमों में ढील
RBI ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) के लिए सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश नियम आसान किए हैं। अनिवासी भारतीयों (NRI) और भारत के विदेशी नागरिकों (OCI) के लिए इक्विटी में निवेश की सीमा बढ़ाई गई है। रुपये की विनिमय दर पर पुरानी नीति अपरिवर्तित रखी गई है — इसका स्पष्ट अर्थ है कि केंद्रीय बैंक रुपये के लिए किसी विशेष दर या बैंड का लक्ष्य लेकर नहीं चल रहा। RBI ने यह भी कहा कि अर्थव्यवस्था की उत्पादक जरूरतों को पूरा करने के लिए बैंकिंग सिस्टम में पर्याप्त नकदी बनाए रखना सुनिश्चित किया जाएगा।
आम आदमी पर क्या असर
रेपो रेट अपरिवर्तित रहने से होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की मासिक किस्त (EMI) नहीं बढ़ेगी — यह करोड़ों कर्जदारों के लिए राहत की खबर है। सावधि जमा (FD) निवेशकों के लिए भी फिलहाल ब्याज दरें अपरिवर्तित रहेंगी। हालांकि महंगाई अनुमान बढ़ने से आने वाले महीनों में ब्याज दर वृद्धि की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। गवर्नर मल्होत्रा ने स्पष्ट किया कि मौद्रिक नीति समिति आगे की नीति के लिए पूरी तरह आंकड़ों पर निर्भर रहेगी और आपूर्ति पक्ष के दबावों सहित सभी विकासों पर करीब से नजर रखेगी।


