नई दिल्ली। देश के लाखों बेरोज़गार और निराश युवाओं की आवाज़ बनकर उभरी कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने शनिवार को दिल्ली के जंतर मंतर पर एक ऐतिहासिक प्रदर्शन किया। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर आयोजित इस रैली में सैकड़ों युवा, छात्र और पेशेवर एकजुट हुए। कई लोग कॉकरोच मास्क पहनकर और हाथों में फूल तथा तिरंगा लेकर पहुंचे। सीजेपी संस्थापक अभिजीत दीपके अमेरिका से वापस लौटे और जंतर मंतर पहुंचते ही उन्होंने एलान किया — “यह देश का छात्र और युवा बिका नहीं है।” प्रदर्शन के बाद पुलिस ने 6 लोगों को हिरासत में लिया और प्राथमिकी भी दर्ज की गई। साथ ही सीजेपी ने 13 जून को जंतर मंतर पर अगले बड़े प्रदर्शन का एलान भी कर दिया।
सीजेपी क्या है — कैसे हुई शुरुआत?
15 मई 2026 को सर्वोच्च न्यायालय में एक सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने बेरोज़गार युवाओं को लेकर एक ऐसा बयान दिया जिसने पूरे देश में हलचल मचा दी। उन्होंने कहा कि जिन युवाओं को न काम मिलता है, न कोई जगह — वे मीडिया, सोशल मीडिया और सूचना के अधिकार जैसे हथियारों का सहारा लेकर हर किसी पर हमला करते हैं, और उनकी तुलना उन्होंने “कॉकरोच तथा समाज के परजीवी” से की। यह बयान करोड़ों युवाओं के लिए एक गहरी चोट की तरह था — और इसी चोट से एक आंदोलन का जन्म हुआ।
अगले ही दिन 16 मई 2026 को अभिजीत दीपके ने एक्स पर ऐलान किया कि वो “तमाम कॉकरोचों के लिए एक मंच” बना रहे हैं। यह व्यंग्यात्मक आंदोलन देखते ही देखते सोशल मीडिया पर तूफान बन गया। 78 घंटों में इंस्टाग्राम पर 30 लाख अनुयायी, और 5 दिनों में 1 करोड़ से ज़्यादा — सरकारी खातों को भी पीछे छोड़ते हुए। पार्टी का संदेश — इस आंदोलन को कोई मिटा नहीं सकता।
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छावनी बना जंतर मंतर — दिल्ली सीमा से लेकर आईटीओ तक सुरक्षा
प्रदर्शन से पहले ही दिल्ली पुलिस ने 1,000 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात कर दिए थे। एनडीएमसी इलाका छावनी में तब्दील हो गया था। बदरपुर, आश्रम, न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी से लेकर जंतर मंतर से जुड़ने वाली हर सड़क पर बैरिकेड और पुलिस तैनाती की गई। आईटीओ पर नाकाबंदी हुई, गाड़ियों की तलाशी ली गई और दिल्ली सीमा पर टीमें तैनात कर युवाओं को रोकने की कोशिश की गई। गुरुग्राम से भी सैकड़ों युवाओं के आने की आशंका से वहाँ की खुफिया शाखा अलर्ट पर थी।
अभिजीत दीपके का बयान — “पोस्ट हटा सकते हैं, हमें नहीं”
सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके मूलतः महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर के रहने वाले हैं। 30 वर्षीय दीपके ने पुणे से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी करने के बाद उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका का रुख किया और बोस्टन विश्वविद्यालय से जनसंपर्क में परास्नातक की डिग्री हासिल की। प्रदर्शन के दिन वे बोस्टन से लंदन होते हुए ब्रिटिश एयरवेज़ की उड़ान बीए-257 से दिल्ली पहुंचे।
जंतर मंतर पर भीड़ को संबोधित करते हुए दीपके ने कहा कि एक महीने से शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की जा रही है, पर सरकार जवाब देने के बजाय खाते हैक कराने और सोशल मीडिया पोस्ट हटाने में लगी है। उन्होंने जोर देकर कहा — “पोस्ट हटाई जा सकती हैं, पर हमें खत्म नहीं किया जा सकता।” दीपके ने भीड़ के सामने यह भी स्वीकार किया कि उड़ान के दिल्ली उतरने से पहले उन्हें यह नहीं पता था कि वे गिरफ्तार होंगे या नहीं — पर उन्होंने इसकी परवाह किए बिना वापस लौटने का फैसला किया और कहा कि इस मकसद के लिए आज़ादी कुर्बान करने को भी तैयार थे।
इसके साथ ही दीपके ने आंदोलन को किसी भी तरह की सांप्रदायिक राजनीति से दूर रखने की अपील की और साफ कहा कि इस संघर्ष को हिंदू-मुसलमान की लड़ाई बनाने की कोशिशें हो रही हैं, जिन्हें कामयाब नहीं होने दिया जाएगा।
सोनम वांगचुक भी पहुँचे — 6 हफ्ते का उपवास
प्रदर्शन के दौरान सबसे बड़ा पल तब आया जब लद्दाख के प्रसिद्ध शिक्षा सुधारक और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक जंतर मंतर पहुंचे और भीड़ को संबोधित किया। वांगचुक ने कहा कि 4 दशकों तक वे दूर-दराज़ के सरकारी स्कूलों में शिक्षा मज़बूत करने का प्रयास करते रहे, पर कोई सार्थक बदलाव नहीं दिखा। उन्होंने एक बड़ी घोषणा भी की — “यदि अभिजीत दीपके को गिरफ्तार किया गया तो वे 6 हफ्ते का उपवास करेंगे।” वांगचुक ने संकेत दिया कि आज का जंतर मंतर प्रदर्शन एक बड़े अभियान की शुरुआत भर है।
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मांगें क्या हैं — नीट से एसएससी तक सब पर सवाल
सीजेपी की प्रमुख मांग है शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा। इसके पीछे हैं — नीट प्रश्नपत्र लीक, सीबीएसई की ऑनलाइन अंकन प्रणाली में कथित अनियमितताएं, सीयूईटी और एसएससी परीक्षाओं में गड़बड़ियां तथा परीक्षा संबंधित दबाव से छात्रों की आत्महत्याएं। प्रदर्शनकारियों के बैनर पर लिखा था — “कॉकरोच आ रहे हैं, धर्मेंद्र प्रधान जा रहे हैं।” आंदोलन का साफ संदेश है कि जब तक शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय नहीं होती और पेपर लीक की संस्कृति खत्म नहीं होती, तब तक यह लड़ाई जारी रहेगी — और सरकार की चुप्पी इस मांग को और मजबूत ही करती है।
बॉलीवुड का समर्थन, युवा पीढ़ी को बुजुर्गों का भी साथ
सीजेपी के इस आंदोलन को बॉलीवुड जगत से भी व्यापक समर्थन मिला। अभिनेत्री ऋचा चड्ढा उस वक्त ऑकलैंड में थीं, लेकिन उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा — “डायनासोर मिट गए, पर कॉकरोच जिंदा हैं” — और देश के युवाओं को अपना प्यार भेजा। अभिनेता प्रकाश राज ने भी कहा कि वे इस प्रदर्शन में शामिल होने की कोशिश करेंगे और युवाओं से बड़ी संख्या में जुटने की अपील की। अतुल कुलकर्णी ने युवा नागरिकों को लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज़ उठाने का संदेश दिया।
कुनिका सदानंद ने भी आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि जब लोगों की आवाज़ नहीं सुनी जाती तो उन्हें ऐसे रास्ते अपनाने पड़ते हैं। इसके अलावा शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे ने भी सीजेपी की मांगों का समर्थन करते हुए शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की। जंतर मंतर पर सिर्फ युवा ही नहीं, बुजुर्ग भी युवा पीढ़ी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े दिखे — यह दृश्य आंदोलन की व्यापक सामाजिक स्वीकार्यता का प्रमाण था।
प्रदर्शन के बाद प्राथमिकी, 6 हिरासत में
शनिवार को प्रदर्शन समाप्त होने के बाद दिल्ली पुलिस ने 6 लोगों को हिरासत में लिया। सोशल मीडिया पर प्राथमिकी दर्ज होने की खबरें वायरल हुईं, जिस पर दिल्ली पुलिस ने आधिकारिक रूप से स्पष्ट किया कि ऐसी कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है। इस बीच सीजेपी ने जंतर मंतर से ही 13 जून को अगले बड़े प्रदर्शन का एलान कर दिया। दीपके ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन एक दिन की घटना नहीं है — लड़ाई लंबी है और पीछे हटने का कोई सवाल नहीं। आज के प्रदर्शन ने यह भी साबित कर दिया कि जो आंदोलन इंस्टाग्राम और एक्स पर शुरू हुआ था, वह केवल स्क्रीन तक सीमित नहीं रहा — जंतर मंतर पर उमड़ी भीड़ इस बात का प्रमाण है कि युवा पीढ़ी अपनी बात कहने के लिए सड़क पर उतरने से भी नहीं हिचकती।

