गाज़ीपुर। छात्र नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और अधिवक्ताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला से मुलाकात की। छात्र नेता डॉ. शम्मी सिंह के नेतृत्व में पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर दो मांगें रखीं — शहर के दो होटलों देव इंटरनेशनल और द सिटी रूम्स की निष्पक्ष जांच और छात्र नेताओं पर दर्ज कथित फर्जी मुकदमों को वापस लिया जाए। जिलाधिकारी ने मामले में निष्पक्ष जांच और तथ्यों के आधार पर कार्रवाई का आश्वासन दिया।
प्रतिनिधिमंडल में शशांक उपाध्याय, दीपक उपाध्याय ‘कान्हा’, अभिषेक राय, संदीप राय समेत अंकित राय (पूर्व छात्रसंघ उपाध्यक्ष), प्रवीण दुबे, अमरनाथ राय, देवेश राय, ओजस्व साहू और अन्य सदस्य शामिल रहे।
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2023 के मामले से जुड़ा है विवाद
प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी को बताया कि वर्ष 2023 में दिल्ली की एक नाबालिग युवती के साथ कथित गैंगरेप की घटना को लेकर होटल देव इंटरनेशनल और द सिटी रूम्स का नाम सामने आया था। उस समय छात्र नेताओं ने तत्कालीन पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन देकर कार्रवाई की मांग की थी। पुलिस जांच के बाद उस मामले में FIR दर्ज हुई और प्रकरण वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन है।
प्रतिनिधिमंडल के अनुसार होटल देव इंटरनेशनल के संचालक पंकज दुबे के खिलाफ धारा 307 और गैंगस्टर एक्ट के तहत पहले से मुकदमे दर्ज हैं। ज्ञापन में होटल संचालन में नक्शे संबंधी अनियमितताओं का भी उल्लेख किया गया। प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि दोनों होटलों के लाइसेंस, अग्निशमन व्यवस्था, पार्किंग और अन्य कानूनी औपचारिकताओं की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
छात्र नेताओं पर रंगदारी का मुकदमा
प्रतिनिधिमंडल का आरोप है कि सामाजिक सरोकारों के तहत आवाज उठाने वाले छात्र नेताओं को दबाने के लिए होटल संचालकों ने 10 जून 2026 को कोतवाली गाज़ीपुर में छात्र नेताओं शशांक उपाध्याय, दीपक उपाध्याय, अभिषेक राय और संदीप राय के खिलाफ रंगदारी मांगने का मुकदमा दर्ज कराया। प्रतिनिधिमंडल ने इसे पूरी तरह निराधार बताया।
प्रतिनिधिमंडल का कहना था कि आरोपित छात्र नेताओं का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है और दर्ज प्राथमिकी में पर्याप्त साक्ष्यों का अभाव है। उन्होंने जिलाधिकारी से मांग की कि इन मुकदमों की निष्पक्ष समीक्षा कर उन्हें वापस लिया जाए। प्रतिनिधिमंडल ने यह भी कहा कि यदि निर्दोष लोगों पर कार्रवाई होती रही और अवैध गतिविधियों पर अंकुश नहीं लगा तो लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने को बाध्य होना पड़ेगा।
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DM ने दिया निष्पक्ष जांच का आश्वासन
जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला ने प्रतिनिधिमंडल की बात ध्यान से सुनी और मामले में न्यायोचित एवं विधिसम्मत कार्रवाई का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि तथ्यों के आधार पर उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
चूंकि यह मामला न्यायालय और पुलिस जांच से भी जुड़ा है, ऐसे में सभी की निगाहें प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि आरोपों में तथ्य पाए जाते हैं तो संबंधित पक्षों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। दूसरी ओर छात्र नेताओं पर दर्ज मुकदमों की निष्पक्ष जांच की मांग भी तेज हो गई है।



