गाज़ीपुर। जनपद के कलेक्ट्रेट सभागार में अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) वेद सिंह चौहान की अध्यक्षता में अभियोजन कार्यों की समीक्षा बैठक आयोजित हुई। बैठक में मई 2026 के न्यायिक आंकड़े सामने रखे गए। एक ओर 13 मामलों में दोषियों को सजा मिली, तो दूसरी ओर 16 आरोपी दोषमुक्त होकर रिहा हो गए। एडीएम ने दोनों पहलुओं की गहन समीक्षा करते हुए अभियोजन अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए। बैठक में स्पष्ट किया गया कि यदि पुलिस विवेचना में खामियां रहेंगी या गवाह पक्षद्रोही होंगे तो अपराधियों को सजा दिलाना कठिन हो जाएगा। इस समस्या के समाधान के लिए ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए गए।
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हत्या, POCSO और NDPS — कड़ी सजाएं
बैठक में बताया गया कि मुहम्मदाबाद थाना क्षेत्र के एक हत्या मामले में अभियुक्त अशरफ को न्यायालय ने आजीवन कारावास और ₹25,000 अर्थदंड की सजा सुनाई। एडीजीसी अखिलेश सिंह ने इस मामले में प्रभावी पैरवी की। खानपुर थाना क्षेत्र के POCSO मामले में अभियुक्त शशिपाल को 14 वर्ष का कठोर कारावास सुनाया गया और इस मुकदमे की पैरवी विशेष लोक अभियोजक रविकांत पांडेय ने की।
रेवतीपुर थाना क्षेत्र के NDPS मामले में अभियुक्त सरल राजभर को तीन वर्ष की सजा और ₹25,000 जुर्माना लगाया गया। दिलदारनगर के एक पुराने NDPS मामले में अभियुक्त सलीम को 20 दिन के साधारण कारावास और ₹1,000 अर्थदंड की सजा मिली। भारतीय दंड संहिता के 37 मामलों का निस्तारण हुआ जिनमें 9 में दोषसिद्धि हुई। अन्य अधिनियमों के 4 मामलों में भी सजाएं सुनाई गईं — इस प्रकार कुल 13 अभियुक्तों को दंडित किया गया।
16 बरी — नए सिरे से होगी समीक्षा
बैठक में यह भी सामने आया कि मई माह में 16 मामलों में आरोपी दोषमुक्त होकर रिहा हो गए। इस पर एडीएम ने नाराजगी जताई और निर्देश दिया कि सभी मामलों की दोबारा विधिक समीक्षा की जाए। जहां शासकीय हित प्रभावित हो रहा हो वहां उच्च न्यायालय में अपील का प्रस्ताव तत्काल तैयार किया जाए।
अपर जिलाधिकारी वेद सिंह चौहान ने कहा कि जो गवाह जानबूझकर पक्षद्रोही बनकर न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं, उनके खिलाफ नियमानुसार मुकदमा दर्ज किया जाए। अभियोजकों को यह भी निर्देश दिया गया कि प्रत्येक माह कम से कम एक मुकदमे की केस डायरी का गहन अध्ययन कर पुलिस विवेचना की कमियां चिन्हित की जाएं।
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वारंट, गवाह और जमानत का लेखा-जोखा
मई माह में अभियोजन संवर्ग के तहत 354 वारंट जारी किए गए, जिनमें से 275 की तामील कराई गई। इसी अवधि में 225 गवाह न्यायालय पहुंचे जिनमें 217 के बयान दर्ज किए गए। शेष 8 गवाह पीठासीन अधिकारी के अवकाश और अधिवक्ताओं की हड़ताल के कारण परीक्षित नहीं हो सके। सत्र न्यायालयों में 399 सम्मन जारी हुए जिनमें 325 तामिल हुए। 299 गवाह उपस्थित हुए लेकिन 28 गवाहों का परीक्षण नहीं हो सका। 64 जमानत प्रार्थना पत्रों में से 9 मंजूर और 55 खारिज किए गए।

