नई दिल्ली। संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026 एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। अप्रैल 2026 में यह विधेयक 54 मतों से पारित नहीं हो सका था। तब से सियासी समीकरण बदले हैं — तृणमूल कांग्रेस (TMC) में बगावत हुई है और DMK ने INDIA गठबंधन छोड़ दिया है। इन बदलावों के बाद सवाल यह है कि क्या मोदी सरकार इस बार बिल पास कराने के लिए जरूरी 360 वोट जुटा पाएगी।
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परिसीमन बिल में क्या है
यह विधेयक लोकसभा की सीटें मौजूदा 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव रखता है। 2011 की जनगणना के आधार पर नए निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन किया जाएगा। साथ ही नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करना भी इसका हिस्सा है।
संविधान में बदलाव से जुड़ा होने के कारण इसे पारित कराने के लिए अनुच्छेद 368 के तहत विशेष बहुमत जरूरी है। इसके लिए दो शर्तें पूरी होनी चाहिए — सदन के कुल सदस्यों का बहुमत और मतदान करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई बहुमत। लोकसभा में तीन सीटें रिक्त होने से प्रभावी संख्या 540 है, जिससे दो-तिहाई बहुमत के लिए 360 वोट चाहिए।
लोकसभा में नंबरों का गणित
फिलहाल NDA के पास लोकसभा में 293 सांसद हैं। इनमें BJP के 240, TDP के 16, JDU के 12 और अन्य सहयोगी दलों के सांसद शामिल हैं। 360 के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए NDA को अभी 67 और वोट चाहिए। TMC में बगावत के बाद सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने दावा किया है कि पार्टी के 29 में से करीब 20 सांसद उनके साथ हैं। अगर ये 20 सांसद NDA का समर्थन करते हैं तो आंकड़ा 313 तक पहुंचेगा। इसमें अप्रैल में NDA का साथ देने वाले 5 अतिरिक्त सांसद जोड़ने पर यह 318 हो जाएगा। यानी सरकार अधिकतम 348 के करीब पहुंच सकती है — लेकिन 360 से 12 वोट दूर रहेगी।
TMC बगावत और DMK का रुख
TMC के बागी सांसदों ने अभी तक केवल लोकसभा अध्यक्ष से अलग बैठने की व्यवस्था का अनुरोध किया है। उन्होंने औपचारिक रूप से NDA को समर्थन देने की घोषणा नहीं की है। ऐसे में इनका वोट पक्का मानना जल्दबाजी होगी। DMK गठबंधन से बाहर जरूर आ गई है, लेकिन पार्टी ने स्पष्ट किया है कि वह मौजूदा स्वरूप में परिसीमन बिल का “सिद्धांत रूप में” विरोध करती है। केरल, तेलंगाना और कर्नाटक जैसे दक्षिणी राज्यों की चिंता यह है कि जनसंख्या के आधार पर परिसीमन से उनकी सीटें घट जाएंगी क्योंकि इन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन किया है।
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राज्यसभा और आगे की राह
राज्यसभा में कुल 245 सदस्य हैं और दो-तिहाई बहुमत के लिए 164 वोट चाहिए। अभी NDA के पास राज्यसभा में 149 सांसद हैं — यानी 15 वोटों की कमी है। 18 जून 2026 को 10 राज्यों में राज्यसभा की 25 सीटों पर चुनाव होने हैं। इन चुनावों के बाद NDA की संख्या बढ़ने की उम्मीद है, लेकिन पूर्ण बहुमत मिलना आसान नहीं होगा।
सरकारी सूत्रों के अनुसार जैसे ही लोकसभा और राज्यसभा दोनों में जरूरी बहुमत पूरा होने के संकेत मिलेंगे, मानसून सत्र से पहले एक विशेष सत्र बुलाया जा सकता है। मानसून सत्र जुलाई के दूसरे सप्ताह से शुरू होने की संभावना है। हालांकि, शिवसेना (UBT) के समर्थन के कोई संकेत नहीं हैं और अन्य क्षेत्रीय दलों का रुख भी सरकार के पक्ष में नहीं है।


