लखनऊ। उत्तर प्रदेश के बिजली विभाग में गुरुवार को बड़ा विवाद खुलकर सामने आया। ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने UPPCL अध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार गोयल को कड़ा पत्र लिखकर कई गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई हैं। विवाद का केंद्र जून 2026 के बिजली बिलों में जोड़ा गया 10 प्रतिशत FPPAS (फ्यूल एंड पावर परचेज एडजस्टमेंट सरचार्ज) है। यह निर्णय मंत्री की किसी भी जानकारी या अनुमति के बिना लागू कर दिया गया, जिसका सीधा असर प्रदेश के करोड़ों उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ा।
मंत्री ने पत्र में स्पष्ट किया कि इस महत्वपूर्ण विषय की जानकारी उन्हें टीवी समाचार चैनलों से मिली — विभाग की ओर से कोई सूचना नहीं दी गई। UPPCL चेयरमैन की कार्यशैली, कर्मचारी प्रबंधन और संकट के वक्त मुख्यालय से अनुपस्थिति पर भी मंत्री ने सीधे सवाल उठाए हैं।
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बिना पूछे लगाया 10% सरचार्ज
29 मई 2026 को UPPCL ने जून माह के बिजली बिलों में 10 प्रतिशत FPPAS सरचार्ज लगाने का निर्देश जारी किया। यह राशि उपभोक्ताओं से सीधे वसूली जानी थी। ऊर्जा मंत्री एके शर्मा को इस फैसले की जानकारी मीडिया के माध्यम से मिली — विभाग ने उन्हें अवगत तक नहीं कराया।
उन्होंने पत्र में लिखा — “इतने महत्वपूर्ण विषय पर विभागीय मंत्री को विश्वास में क्यों नहीं लिया गया? क्या आपको मुझसे पूछना भी उचित नहीं लगा?” उन्होंने स्पष्ट किया कि अब से ऐसे किसी भी निर्णय पर पहले उनसे अनुमति लेना अनिवार्य होगा। उल्लेखनीय है कि FPPAS सरचार्ज का यह मामला पहले उपभोक्ता परिषद के विरोध के कारण विद्युत नियामक आयोग तक पहुंच चुका था और अब मंत्री स्तर पर भी यह विवाद का विषय बन गया है।
आंधी-तूफान में मुख्यालय से बाहर रहे चेयरमैन
मंत्री ने पत्र में UPPCL चेयरमैन की अनुपस्थिति का मुद्दा भी उठाया। 28 और 29 मई 2026 को आंधी-तूफान से प्रदेश की विद्युत व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई। लाखों उपभोक्ता बिजली कटौती से परेशान थे। इसी दौरान 30 मई को समीक्षा बैठक बुलाई गई।
बैठक में पता चला कि इस संकटकाल में चेयरमैन मुख्यालय से बाहर थे और अगले तीन दिन भी बाहर रहने वाले थे। मंत्री के आग्रह पर ऑनलाइन बैठक की गई। मंत्री ने इसे “जनहित के विपरीत और गैर जिम्मेदाराना व्यवहार” बताते हुए भविष्य में मुख्यालय छोड़ने से पहले सूचित करने के निर्देश दिए।
कुशल कर्मचारियों की छंटनी पर सवाल
ऊर्जा मंत्री ने पत्र में कर्मचारी प्रबंधन पर भी गंभीर आपत्ति जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि अनुभवी और कुशल कर्मचारियों को हटाकर मनमाने ढंग से अकुशल लोगों की भर्ती की जा रही है। बार-बार पत्र लिखने और मना करने के बाद भी यह सिलसिला जारी है।
मंत्री ने सहारनपुर का एक विशिष्ट उदाहरण दिया। 1 मई 2026 को सहारनपुर मंडल के उपाध्यक्ष अंकुर सैनी ने बताया था कि 15 साल से कार्यरत लाइनमैन सुंदर सैनी को हटाकर नए लाइनमैन को रख लिया गया। मंत्री ने इसकी जांच कराकर उचित कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि इस तरह की मनमानी से बिजली व्यवस्था तकनीकी और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर कमजोर हो रही है।
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सरकार की छवि खराब करने वालों पर कार्रवाई के निर्देश
ऊर्जा मंत्री ने पत्र में यह भी कहा कि गर्मी के कठिन समय में अधिकांश विद्युत कर्मियों ने निष्ठापूर्वक काम किया। लेकिन कुछ कर्मचारियों ने जानबूझकर या लापरवाही से काम करते हुए सरकार की छवि को नुकसान पहुंचाया। ऐसे कर्मियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए और मौजूदा ट्रांसफर सीजन में उनका यथायोग्य तबादला किया जाए।
UPPCL अध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार गोयल ने इस पूरे मामले पर बेहद संक्षिप्त प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा — “मंत्री जी का पत्र मिला है। फिलहाल इस विषय पर कुछ कहना उचित नहीं समझता। हमारी प्राथमिकता हमेशा उपभोक्ताओं का हित रही है और रहेगी।” मंत्री और UPPCL प्रमुख के बीच का यह खुला टकराव अब उत्तर प्रदेश के राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का बड़ा विषय बन गया है।

