गाज़ीपुर। मरदह थाना क्षेत्र के करहर बुजुर्ग तिराहे पर बुधवार की सुबह पुलिस और एक वांछित अभियुक्त के बीच मुठभेड़ हो गई। पाक्सो एक्ट समेत कई गंभीर धाराओं में वांछित संतोष यादव (40) ने पुलिस टीम पर जानलेवा फायरिंग की — जवाबी कार्रवाई में उसके दोनों पैरों में गोली लगी और उसे मौके से गिरफ्तार कर लिया गया। घायल अभियुक्त को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मरदह भेजा गया जहाँ उसका उपचार चल रहा है। पूरी कार्रवाई थाना प्रभारी निरीक्षक तारावती यादव के नेतृत्व में अंजाम दी गई।
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मुखबिर की सूचना, पुलिस घेराबंदी
थाना मरदह में दर्ज मुकदमा संख्या 0149/2026 में धारा 137(2), 64(1), 115(2), 351(3) बीएनएस एवं पाक्सो एक्ट 3/4 के तहत संतोष यादव लंबे समय से फरार चल रहा था। मूल रूप से जमानियां कोतवाली के देवरिया गांव का निवासी संतोष यादव हाल में कोतवाली क्षेत्र के वयेपुर देवकली में रह रहा था।
बुधवार की सुबह थाना प्रभारी निरीक्षक तारावती यादव अपनी टीम के साथ करहर बुजुर्ग तिराहे पर नियमित चेकिंग अभियान चला रही थीं। इसी दौरान एक मुखबिर से सूचना मिली कि वांछित संतोष यादव उस समय उसी क्षेत्र में मौजूद है। सूचना की पुष्टि होते ही पुलिस टीम ने तत्काल घेराबंदी शुरू की।
फायरिंग, जवाबी कार्रवाई, गिरफ्तारी
पुलिस को अपने चारों ओर देखकर संतोष यादव घबरा गया। खुद को घिरा महसूस करते ही उसने पुलिस टीम पर जान से मारने की नीयत से फायरिंग कर दी। आत्मरक्षा में पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की — इसमें संतोष के दोनों पैरों में गोली लगी और वह मौके पर ही गिर गया। घायल अवस्था में उसे गिरफ्तार करके तत्काल सीएचसी मरदह रवाना किया गया।
तलाशी में संतोष के पास से 315 बोर का एक तमंचा, एक जिंदा कारतूस, दो खोखा कारतूस, एक अपाचे मोटरसाइकिल और 750 रुपये नकद बरामद हुए। बरामदगी के आधार पर थाना मरदह में मुकदमा संख्या 173/2026 में धारा 109(1) बीएनएस एवं आर्म्स एक्ट 3/25/27 के तहत एक और अभियोग पंजीकृत कर दिया गया।
क्षेत्राधिकारी कासिमाबादअनुभव राजर्षि ने कहा — “जनपद में अपराध एवं अपराधियों के विरुद्ध लगातार प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। पाक्सो एक्ट जैसे गंभीर मामलों में वांछित अभियुक्तों की गिरफ्तारी पुलिस की प्राथमिकता है। जनपद में कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ इसी प्रकार कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।”
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यक्ष एप से पहचान, लंबा आपराधिक इतिहास
इस पूरी कार्रवाई में यक्ष एप की अहम भूमिका रही। पुलिस ने घटनास्थल के आसपास रहने वाले और पूर्व में जेल जा चुके अपराधियों की सूची तैयार की। तकनीकी साधनों और स्थानीय सूचनाओं के आधार पर संतोष यादव की पहचान की गई और उसकी गतिविधियों पर नजर रखी गई — तब जाकर गिरफ्तारी संभव हो पाई।
संतोष यादव का आपराधिक रिकॉर्ड पुराना है। वर्ष 2012 में कोतवाली गाज़ीपुर में लूट और धोखाधड़ी के मामले में उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था। वर्ष 2017 में नंदगंज थाने में लूट का एक और मुकदमा पंजीकृत हुआ। इसी वर्ष मरदह थाने में पाक्सो एक्ट समेत कई गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ जिसमें वह फरार था — और अब बुधवार को मुठभेड़ के बाद आर्म्स एक्ट में एक और मुकदमा जुड़ गया। पुलिस के अनुसार संतोष के विरुद्ध अग्रिम विधिक कार्रवाई जारी है।



