गाज़ीपुर। मुख्तार अंसारी के आईएस-191 गैंग से जुड़े शस्त्र लाइसेंसों की जांच शुक्रवार को एक नए मोड़ पर पहुंची। गैंग के सहयोगी मोहम्मद शाहिद के साथ तत्कालीन थाना प्रभारी मुहम्मदाबाद और तत्कालीन क्षेत्रीय लेखपाल के खिलाफ थाना मुहम्मदाबाद में मु.अ.सं. 230/2026 के तहत FIR दर्ज की गई है। जांच में सामने आया कि 2001 में मोहम्मद शाहिद ने अपना वास्तविक पता छिपाकर फर्जी स्थायी पते पर SBBL गन का लाइसेंस संख्या 1383/पी2 हासिल किया था और तत्कालीन अधिकारियों ने भी गलत जांच रिपोर्ट देकर इसमें सहयोग किया।
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फर्जी पते से लिया लाइसेंस
जांच में पता चला कि मोहम्मद शाहिद मूल रूप से वार्ड नंबर 4, अब्दुल हमीद नगर, थाना सैदपुर, गाज़ीपुर का निवासी है। 1999 से 2015 तक वह पुरानी कचहरी, मंगल बाज़ार, यूसुफपुर, थाना मुहम्मदाबाद में किराये के मकान में रह रहा था।
इसी दौरान उसने 28 अप्रैल 2001 को जिला मजिस्ट्रेट गाज़ीपुर के आदेश पर SBBL गन का शस्त्र लाइसेंस हासिल किया। लाइसेंस आवेदन में उसने स्थायी पते और वर्तमान पते दोनों कॉलम में मुहम्मदाबाद का पता दर्ज किया जबकि वह वहां का स्थायी निवासी नहीं था। इस तरह असली पता छिपाकर एक ऐसे क्षेत्र का लाइसेंस हासिल किया गया जहां वह अस्थायी रूप से रह रहा था।
अधिकारियों की मिलीभगत उजागर
जांच में यह तथ्य भी प्रकाश में आया कि तत्कालीन थाना प्रभारी मुहम्मदाबाद और क्षेत्रीय लेखपाल ने शस्त्र आवेदन पर मुहम्मदाबाद को स्थायी निवास मानते हुए लाइसेंस जारी करने की अनुशंसा कर दी। जबकि आवेदक वास्तव में उस क्षेत्र का स्थायी निवासी नहीं था बल्कि किराये पर रह रहा था। इस तरह सत्यापन प्रक्रिया में जानबूझकर चूक की गई।
अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण अतुल कुमार सोनकर ने बताया कि मोहम्मद शाहिद के साथ तत्कालीन थाना प्रभारी और क्षेत्रीय लेखपाल का यह कृत्य संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है। तीनों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर विधिक कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
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51 लाइसेंस जांच के दायरे में
वाराणसी रेंज के DIG के निर्देश पर आईएस-191 गैंग के सदस्यों, सहयोगियों और मुख्तार अंसारी के परिजनों को जारी 51 शस्त्र लाइसेंसों की व्यापक पड़ताल जारी है। अपर पुलिस अधीक्षक नगर और ग्रामीण के नेतृत्व में क्षेत्राधिकारियों और थाना प्रभारियों की अलग-अलग टीमें हर लाइसेंस की बारीकी से जांच कर रही हैं।
51 शस्त्र लाइसेंसों की जांच में कई मामलों में फर्जी पता, कागजात में हेरफेर और नियम विरुद्ध सत्यापन के साक्ष्य मिले हैं। हर लाइसेंस को अलग मामले के रूप में खंगाला जा रहा है और जहां भी अनियमितता साबित होगी वहां लाइसेंस धारक के साथ संबंधित अधिकारी भी कार्रवाई की जद में आएंगे।
अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण अतुल कुमार सोनकर ने बताया कि जहां भी फर्जीवाड़े या नियम उल्लंघन के साक्ष्य मिलेंगे वहां लाइसेंस धारकों के साथ-साथ जांच और संस्तुति देने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जांच अभी जारी है और नए तथ्य सामने आने पर कार्रवाई का दायरा और बढ़ाया जाएगा।


