गाज़ीपुर। आईएस-191 गैंग के शस्त्र लाइसेंस मामले में FIR दर्ज होने के बाद सपा सांसद अफज़ाल अंसारी ने पुलिस की कार्रवाई को निराधार और राजनीतिक साजिश बताया है। उन्होंने कहा कि जांच में पूरा सहयोग करेंगे। वहीं दूसरी तरफ पुलिस अधीक्षक डॉ. ईरज राजा ने बताया कि 145 हथियार ट्रेस न हो सकें इसीलिए प्रभाव का इस्तेमाल कर पत्रावलियां अभिलेखागार से गायब कराई गईं और यह मामला तीन दशक पुरानी जांच से भी जुड़ा है।
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1983 का लाइसेंस — अफज़ाल का दावा
सांसद अफज़ाल अंसारी ने कहा कि जिस शस्त्र लाइसेंस की बात हो रही है वह 1983 का है। इस लाइसेंस पर 24 नवंबर 1990 को हथियार खरीदा गया था जो अब भी उनके पास है। उन्होंने कहा कि 36 साल में इस लाइसेंस का 12 बार नवीनीकरण कराया गया है और दिसंबर 2026 तक लाइसेंस वैध था।
अफज़ाल अंसारी ने बताया कि 29 अप्रैल 2023 को गाज़ीपुर की एक अदालत ने उन्हें चार साल की सजा सुनाई थी। इसके तीन दिन बाद 2 मई 2023 को उनका शस्त्र लाइसेंस निरस्त कर दिया गया। उन्होंने उच्च न्यायालय में इसे चुनौती दी और सजा का आदेश निलंबित हो गया। जब हाईकोर्ट ने सजा का आदेश और लाइसेंस निरस्तीकरण का आदेश खारिज कर दिया तब भी शस्त्र लाइसेंस बहाल नहीं किया गया। इस पर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल है।
सांसद ने बताया कि उनके खिलाफ कुल दस मुकदमे दर्ज हुए जिनमें सात न्यायालय में टिक नहीं सके और खारिज हो गए। फिलहाल चुनाव आचार संहिता उल्लंघन के तीन मामले चल रहे हैं। उनका कहना है कि राजनीतिक मंशा से दर्ज मुकदमे अदालत में कमजोर साबित होते हैं और यही मामला भी उसी श्रेणी का है।
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30 साल पहले भी हुई थी जांच
पुलिस अधीक्षक डॉ. ईरज राजा ने बताया कि 30 साल पहले भी अलग-अलग जांच एजेंसियों ने इस मामले में कार्रवाई की थी। मऊ, आजमगढ़ और गाज़ीपुर से फर्जी लाइसेंस जारी किए गए थे। जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। पता चला कि आरोपी और संबंधित लोग अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर कार्रवाई से बचते रहे।
पुलिस अधीक्षक ने बताया कि आईएस-191 गैंग और उसके सहयोगियों के नाम पर समय-समय पर शस्त्र लाइसेंस दिए गए थे। इन पर 145 हथियार खरीदे गए। हथियार पकड़े न जाएं इसीलिए प्रभाव का इस्तेमाल कर पत्रावलियां अभिलेखागार से गायब कराई गईं।


