गाज़ीपुर। उत्तर प्रदेश शासन की महत्वाकांक्षी योजना ‘मिशन शक्ति’ के अंतर्गत पुलिस अधीक्षक गाज़ीपुर ईरज राजा के निर्देश पर जनपद के समस्त थानों में ‘बहू-बेटी सम्मेलन’ का आयोजन किया जाएगा। मुख्यालय महिला एवं बाल सुरक्षा संगठन के निर्देशों के तहत अगस्त माह का विस्तृत थानावार और तिथिवार कैलेंडर जारी किया जा रहा है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं में अवसाद और आत्महत्या की प्रवृत्ति को रोकना तथा दहेज उत्पीड़न जैसी घटनाओं में कमी लाना है।
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महिला पुलिसकर्मी करेंगी संचालन
इस सम्मेलन की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसका संचालन पूर्णतः मिशन शक्ति केंद्र की महिला पुलिसकर्मियों द्वारा किया जाएगा। किसी भी पुरुष कर्मी की इसमें भागीदारी नहीं होगी। स्थानीय आशा बहू, आंगनबाड़ी कार्यकर्ती, NHM और स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को भी इस कार्यक्रम में शामिल किया जाएगा।
महिला पुलिसकर्मियों को निर्देशित किया गया है कि महिलाओं की समस्याओं को पूरी गंभीरता और धैर्य से सुनें। गोपनीयता का विशेष ध्यान रखा जाए। प्रत्येक कार्यक्रम की अवधि कम से कम एक घंटा निर्धारित की गई है ताकि महिलाएं खुलकर बात कर सकें।
लोक संगीत से होगा कार्यक्रम
सम्मेलन में महिलाओं को स्वास्थ्य, स्वच्छता, कानूनी अधिकार, साइबर सुरक्षा और विभिन्न हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी दी जाएगी। महिलाओं की रुचि बनाए रखने के लिए ग्राम प्रधान के सहयोग से स्थानीय लोक संगीत और गायन कार्यक्रम भी आयोजित किए जा सकते हैं।
अविवाहित छात्राओं और युवतियों से संवाद कर उन्हें जिंदगी के प्रति जवाबदेही लेने के लिए जागरूक किया जाएगा तथा निर्णयों के खतरों के प्रति भी सचेत किया जाएगा।
रोस्टर के अनुसार जिन थाना क्षेत्रों में 25 या उससे कम ग्राम सभाएं हैं वहां 01 ग्राम सभा में रविवार के दिन यह कार्यक्रम आयोजित होगा। जहां 25 से अधिक ग्राम सभाएं हैं वहां 02 ग्राम सभाओं में रविवार को कार्यक्रम होगा। थानों द्वारा इसका प्रचार-प्रसार ग्राम सभा की चौकीदारों के माध्यम से भी कराया जाएगा।
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सफलता का मूल्यांकन इन पैमानों पर
इस महत्वपूर्ण अभियान की सफलता का मूल्यांकन जनपद और जोन स्तर पर कड़े मानदंडों के आधार पर किया जाएगा। इनमें पारिवारिक विवादों का त्वरित निस्तारण, छेड़खानी की घटनाओं में कमी और थानों पर ग्राम महिला शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई शामिल है।
पुलिस अधीक्षक गाज़ीपुर के इस अभियान से जनपद की ग्रामीण महिलाओं में आत्मविश्वास और जागरूकता बढ़ाने में मदद मिलेगी। दहेज उत्पीड़न, घरेलू हिंसा और साइबर अपराध जैसी समस्याओं से निपटने के लिए महिलाओं को कानूनी और प्रशासनिक सहयोग का भरोसा दिलाया जाएगा।

