गाज़ीपुर। गाज़ीपुर से समाजवादी पार्टी के सांसद अफजाल अंसारी ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में सपा-कांग्रेस गठबंधन को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि दोनों दलों के बीच चुनाव से पहले नहीं तो चुनाव के बाद भी तालमेल बन सकता है। इसके साथ ही बिहार में हुए एनकाउंटर विवाद पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि एनकाउंटर के नाम पर कानून को ताक पर नहीं रखा जा सकता।
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सपा-कांग्रेस: चुनाव बाद भी गठबंधन संभव
अफजाल अंसारी ने कहा कि कांग्रेस एक राष्ट्रीय पार्टी है और अगर वह उत्तर प्रदेश की सभी 403 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी में है तो यह उसका अधिकार है। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी भी सभी 403 सीटों पर मैदान में उतरेगी और पार्टी का मुख्यमंत्री चेहरा पहले से तय है।
सांसद ने यह भी स्पष्ट किया कि गठबंधन सिर्फ चुनाव से पहले नहीं, बल्कि चुनाव के नतीजों के बाद भी बन सकता है। उनके मुताबिक अगर कांग्रेस 150 सीटें भी जीत लेती है तो सरकार बनाने के लिए उसे किसी न किसी का साथ चाहिए होगा। ऐसे में समाजवादी पार्टी चुनाव बाद के गठबंधन के जरिए उसे समर्थन दे सकती है। इसी तरह अगर सपा को बहुमत के लिए कुछ सीटें कम पड़ें तो कांग्रेस का सहयोग लिया जा सकता है।
दोनों दलों के रिश्तों पर सांसद ने कहा कि उनके बीच दोस्ती बरकरार है और सीटों को लेकर कोई टकराव नहीं है।
बिहार एनकाउंटर पर उठाए सवाल
बिहार में हुए एनकाउंटर मामले पर अफजाल अंसारी ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि अगर किसी आरोपी ने हथियार डाल दिए हैं और आत्मसमर्पण कर दिया है तो उसके बाद उसे मारना कानूनी रूप से बिल्कुल गलत है। उनके मुताबिक हथियार डालने के बाद की गई कोई भी हत्या न्यायसंगत नहीं मानी जा सकती।
सांसद ने यह भी कहा कि किसी व्यक्ति को सजा देने का अधिकार न पुलिस को है, न किसी सरकारी एजेंसी को — यह काम सिर्फ और सिर्फ न्यायपालिका का है। उन्होंने कहा कि जब तक अदालत किसी को दोषी नहीं ठहरा देती, तब तक किसी भी तरीके से उसे दंडित करना संविधान की मूल भावना के खिलाफ है।
साथ ही उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देश में कानून का राज होना चाहिए। उनके मुताबिक एनकाउंटर जैसे मामलों में जवाबदेही तय होनी चाहिए और अगर किसी ने कानून की सीमा तोड़ी है तो उस पर भी कार्रवाई होनी चाहिए।
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सभी को संविधान के अनुसार चलना होगा
अफजाल अंसारी ने इस मौके पर संविधान की सर्वोच्चता पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि संविधान किसी भी धार्मिक ग्रंथ या मान्यता से ऊपर है और यह सभी धर्मों, जातियों और वर्गों के लोगों के लिए एक समान व्यवस्था देता है। उनके मुताबिक देश में रहने वाले हर नागरिक को संविधान के दायरे में रहकर ही काम करना होगा।
सांसद ने कहा कि जब संविधान की बात आती है तो कोई भी धार्मिक या वैचारिक मान्यता उसकी जगह नहीं ले सकती। उन्होंने इस बात को एनकाउंटर विवाद से जोड़ते हुए कहा कि चाहे कोई कितना भी बड़ा अपराधी क्यों न हो, उसके साथ भी संवैधानिक प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है।
उनका यह बयान ऐसे वक्त में आया है जब उत्तर प्रदेश में विपक्षी दल 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटे हैं और बिहार एनकाउंटर मामला राजनीतिक रूप से गर्म बना हुआ है।


