बलिया/कोलकाता। पश्चिम बंगाल के नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक चंद्रनाथ रथ की हत्या के मामले में एक बड़ा और चौंकाने वाला मोड़ आया है। बंगाल पुलिस की विशेष जांच टीम (STF) ने जिस राज सिंह को गिरफ्तार किया था, वह बेकसूर निकला। CBI ने खुद अदालत में अर्जी दाखिल कर स्वीकार किया कि गलत व्यक्ति की गिरफ्तारी हुई थी — जिसके बाद बलिया के राज सिंह को रिहा कर दिया गया। रिहाई के बाद राज सिंह ने जो खुलासे किए, उन्होंने पुलिस जाँच पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
चंद्रनाथ रथ — कौन थे और कैसे हुई हत्या?
चंद्रनाथ रथ पश्चिम बंगाल में नेता प्रतिपक्ष और BJP नेता शुभेंदु अधिकारी के करीबी निजी सहायक थे। 6 मई 2026 को मध्यमग्राम (बारासात) में उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह हाई-प्रोफाइल हत्या राज्य की राजनीति में तूफान ला गई। मामले की जाँच CBI को सौंपी गई।
गलत गिरफ्तारी — कैसे हुई यह चूक?
हत्या के पाँच दिन बाद 11 मई को बंगाल पुलिस की STF ने अयोध्या से राज सिंह नाम के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया। लेकिन जाँच में पता चला कि यह वही राज सिंह नहीं था जो इस हत्याकांड का आरोपी था। दरअसल असली आरोपी का नाम राजकुमार सिंह उर्फ राज सिंह है — और दोनों के नाम में समानता ने पुलिस को गुमराह किया।
CBI ने जब मामले की स्वतंत्र जाँच की तो सच सामने आया। एजेंसी ने बारासात अदालत में अर्जी दाखिल कर कहा कि बलिया निवासी राज सिंह का इस हत्याकांड से कोई संबंध नहीं है। अदालत ने CBI की अर्जी स्वीकार कर राज सिंह को रिहा करने का आदेश दे दिया।
CCTV और कुर्ते ने बचाई जान
रिहाई के बाद राज सिंह ने मीडिया से बात करते हुए कहा — “अगर CBI समय पर नहीं आती तो मेरा एनकाउंटर हो जाता।” उन्होंने बताया कि जेल में रहते हुए उन्हें लगातार डराया जा रहा था और दबाव बनाया जा रहा था। उनका कहना है कि उनके परिवार ने CCTV फुटेज और सबूत CBI को दिए जिससे उनकी बेगुनाही साबित हो सकी। एक कपड़ों की दुकान से खरीदा गया कुर्ता भी अहम सबूत बना जिसने यह साबित किया कि वे घटना के वक्त उस जगह थे ही नहीं।
राज सिंह ने CBI और मीडिया का आभार जताते हुए कहा — “अगर आप निर्दोष हैं तो CBI के पास जाइए।”
असली आरोपी गिरफ्तार
CBI ने इस हत्याकांड के असली मास्टरमाइंड राजकुमार सिंह उर्फ राज सिंह को मुजफ्फरनगर के छपार टोल प्लाजा के पास से गिरफ्तार किया। राजकुमार बलिया के रसड़ा इलाके का रहने वाला है और इलाके में लोग उसे भी “राज सिंह” के नाम से जानते थे — यही भ्रम गलत गिरफ्तारी की वजह बना। राजकुमार की निशानदेही पर CBI ने बलिया के फेफना थाना क्षेत्र के नवीन सिंह को भी गिरफ्तार किया। CBI ने नवीन को कोलकाता ले जाने के लिए ट्रांजिट रिमांड माँगी थी लेकिन अदालत ने अर्जी खारिज कर दी — जिसके बाद नवीन को न्यायिक अभिरक्षा में मऊ जेल भेजा गया। जाँच में यह भी सामने आया कि हत्या में इस्तेमाल कार बलिया के बांसडीह रोड क्षेत्र से महज 50 हजार रुपये में खरीदी गई थी।
