ग्रेटर नोएडा। कासना स्थित राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (GIMS) में 15 जून से स्थायी नियुक्ति की मांग को लेकर धरने पर बैठे करीब 400 आउटसोर्स कर्मचारियों के आंदोलन ने बुधवार देर रात हिंसक रूप ले लिया। 28 घंटे की बातचीत बेनतीजा रहने के बाद पुलिस और प्रशासनिक टीम धरना स्थल पर पहुंची। कर्मचारियों को हटाने के प्रयास के दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। कर्मचारियों ने पुलिस पर बल प्रयोग, महिलाओं के साथ अभद्रता और CCTV बंद कराने के आरोप लगाए हैं जबकि पुलिस ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है। गुरुवार सुबह स्थिति और तनावपूर्ण हो गई जब एक महिला कर्मचारी नाले में गिर गई। कासना कोतवाली ने GIMS निदेशक की तहरीर पर कर्मचारियों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है।
11 दिन का धरना, 28 घंटे की बेनतीजा वार्ता
GIMS अस्पताल में लंबे समय से कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारी नियमितीकरण या संविदा पर समायोजन तथा हाल ही में निकाली गई नई भर्ती प्रक्रिया को रद्द करने की मांग को लेकर 15 जून से अस्पताल परिसर में धरने पर थे। कर्मचारियों का कहना है कि उनकी अधिकांश मांगों पर संस्थान प्रबंधन सहमत हो गया था, लेकिन नियमितीकरण के मुद्दे पर कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला।
बुधवार को कर्मचारियों, GIMS प्रशासन, जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों के बीच करीब 28 घंटे तक वार्ता चली लेकिन कोई हल नहीं निकला। वार्ता विफल होने के बाद कर्मचारी फिर से धरना स्थल पर बैठ गए। पुलिस का कहना है कि ये कर्मचारी अस्पताल के मुख्य हॉल और प्रवेश द्वार पर बैठे थे जिससे रोजाना आने वाले मरीजों को गंभीर परेशानी हो रही थी और चिकित्सा सेवाएं बाधित हो रही थीं। उनसे बार-बार अनुरोध किया गया कि वे अस्पताल परिसर में किसी अन्य स्थान पर धरना दें, लेकिन कर्मचारियों ने यह मानने से इनकार कर दिया।
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रात को पुलिस पहुंची, आरोप-प्रत्यारोप शुरू
वार्ता विफल होने के बाद बुधवार देर रात करीब साढ़े 12 बजे पुलिस और प्रशासनिक टीम धरना स्थल पर पहुंची। कर्मचारियों का आरोप है कि इससे पहले धरना स्थल की बिजली और CCTV कैमरे बंद कर दिए गए और मुख्य तथा इमरजेंसी गेट भी बंद कर दिए गए जिससे अफरातफरी मच गई। उनका कहना है कि विरोध करने पर पुलिस ने बल प्रयोग किया, महिला कर्मचारियों के साथ धक्का-मुक्की हुई और वीडियो बना रहे लोगों के मोबाइल छीनने का प्रयास किया गया।
पुलिस का पक्ष इससे बिल्कुल अलग है। कोतवाली पुलिस ने कहा कि कुछ कर्मचारी स्वेच्छा से स्थान बदलने के लिए तैयार हो गए थे लेकिन उनके साथियों ने उन्हें रोकने के लिए खींचतान और धक्का-मुक्की शुरू कर दी। पुलिस के अनुसार प्रदर्शनकारियों ने बाहरी अराजक तत्वों और विभिन्न संगठनों से जुड़े लोगों को भी धरना स्थल पर बुलाया जिन्होंने धमकी दी और गेट तोड़ने का प्रयास किया। इसके अलावा संस्थान कर्मियों के साथ मारपीट, गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देने तथा सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का भी आरोप है। पुलिस ने लाठीचार्ज और मारपीट के आरोपों को पूर्णतः असत्य बताया है और कहा कि उच्चाधिकारी मौके पर मौजूद थे।
कर्मचारियों के अनुसार उन्हें पहले OPD-17 के सामने बैठाया गया और फिर रात में बसों में बैठाकर पुलिस लाइन ले जाया गया। GIMS के M ब्लॉक हॉस्टल में रहने वाले आंदोलनकारी कर्मचारियों को भी पुलिस तलाश कर हिरासत में लेने की कोशिश कर रही है — जिससे कर्मचारियों में रोष और बढ़ गया है।
महिला नाले में गिरी, FIR दर्ज
गुरुवार सुबह जब कुछ कर्मचारी फिर GIMS परिसर में एकत्रित होने लगे तो पुलिस ने उन्हें हटाने का प्रयास किया। इसी दौरान एक महिला कर्मचारी नाले में गिर गई। कर्मचारियों का आरोप है कि पुलिस के दौड़ाने के कारण यह हुआ और पुलिसकर्मियों ने मदद करने के बजाय वहां से हट जाना उचित समझा। बाद में साथी कर्मचारियों ने ही उसे बाहर निकाला।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद कासना कोतवाली ने GIMS के निदेशक ब्रिगेडियर डॉ. राकेश गुप्ता की तहरीर पर कर्मचारियों के खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा और तोड़फोड़ के आरोप में FIR दर्ज की है।
आंदोलन जारी रखने का ऐलान
कर्मचारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस और लिखित आश्वासन नहीं मिलता — विशेषकर नियमितीकरण के मुद्दे पर — उनका आंदोलन जारी रहेगा। एक तरफ कर्मचारियों पर FIR है, दूसरी तरफ उनके आरोप हैं कि पुलिस ने रात के अंधेरे में CCTV बंद करके कार्रवाई की। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो इस विवाद को और गहरा कर रहे हैं। अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन बातचीत के जरिए हल निकालेगा या कानूनी दांव-पेच में यह मामला और उलझेगा।



