गाज़ीपुर, 2 अगस्त। गोरखपुर पुलिस ने फर्जी पासपोर्ट सत्यापन मामले में गाज़ीपुर के नोनहरा थाना क्षेत्र के नसीरपुर कुसुम गांव निवासी उत्तर प्रदेश पुलिस के एक सिपाही को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी रविवार को हुई। इसके बाद आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
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डिपोर्टेशन के बाद खुला मामला
पुलिस के अनुसार यह मामला तब सामने आया जब इंडोनेशिया से एक गैंगस्टर को डिपोर्ट कर भारत लाया गया। जांच के दौरान उसके पासपोर्ट पर लगी सत्यापन रिपोर्ट में गड़बड़ी मिली। इस सूत्र के आधार पर जांच आगे बढ़ी और सिपाही शशिकांत यादव तक पहुंची। पूछताछ में सामने आया कि यह मामला अकेला नहीं था।
12 फर्जी दस्तावेज सत्यापित
पुलिस अभिलेखों के अनुसार शशिकांत की तैनाती अगस्त 2023 से गोरखनाथ थाने में रही। जांच में सामने आया कि उसने इस दौरान 12 लोगों के दस्तावेजों का सत्यापन किया, जिनमें 3 आरोपी गैंगस्टर श्रेणी के हैं। इनमें से कुछ का पता दिल्ली और पंजाब से जुड़ा है। पते के तौर पर गोरखपुर और लच्छीपुर इलाके का इस्तेमाल किया गया। करीब छह महीने पहले शशिकांत का तबादला गोरखपुर जीआरपी में हुआ था।
डेढ़ साल पुराना नेटवर्क
जांच अधिकारियों के मुताबिक यह मामला करीब डेढ़ साल पुराना बताया जा रहा है। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि इस दौरान कुल कितने फर्जी पासपोर्ट बनाए गए और इसमें कितने लोग शामिल थे। पुलिस को आशंका है कि इसके जरिए कुछ अपराधी विदेश जा चुके हैं। जांच का दायरा अब दस्तावेज बनाने वालों, आवेदकों और बीच के दलालों तक बढ़ाया जा रहा है।
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विभागीय जांच भी शुरू
पुलिस विभाग ने बताया कि मामला सामने आने के बाद विभागीय स्तर पर अलग से जांच शुरू कर दी गई है। अधिकारियों के अनुसार यह देखा जा रहा है कि सत्यापन के समय निगरानी किस स्तर पर थी और इसमें शशिकांत के अलावा कोई अन्य पुलिसकर्मी भी शामिल है या नहीं। पुलिस के मुताबिक हर सत्यापन रिपोर्ट को दोबारा जांचने की व्यवस्था पर भी विचार किया जा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि आगे की कार्रवाई जांच में मिले तथ्यों के आधार पर की जाएगी होगी।

